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    अगर लूला और मैक्रों दिल्ली आकर कनॉट प्लेस और इंडिया गेट गए तो उन्हें क्या याद आ सकता है

    ब्राजील और फ्रांस के राष्ट्रपति एआई इंपैक्ट समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आने वाले हैं. ऐसे में राजधानी दिल्ली में देखने के लिए क्या है और वो कैसे खुद को उससे जोड़ सकते हैं, बता रहे हैं विवेक शुक्ल.

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    बांग्लादेश चुनाव: उतरते नकाब और आगे की राह

    बांग्लादेश की जनता ने अब तक धैर्य रखा, लेकिन अब लोग खराब होती अर्थव्यवस्था, चरमराती कानून व्यवस्था और जनमत संग्रह के जरिए थोपे जा रहे संवैधानिक बदलावों के खिलाफ मुखर हो रहे हैं. पूरे देश में "आगेई भालो छिलो" (पहले ही अच्छा था) की गूंज सुनाई दे रही है.

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    सौ साल बाद के लिए अभी लिखी जा रही किताबें

    फ्यूचर लाइब्रेरी ऐसी ही विराट परियोजना है जिसका इरादा हमारे समय की सर्वश्रेष्ठ रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को एक सदी के बाद के पाठकों के लिए बचाए रखने का है. वैसे यह सच है कि  दुनिया जितनी तेज़ी से बदलती है, उतनी ही ज़िद के साथ पुरानेपन से जकड़ी भी रहती है.

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    'उसने बुलाया था': हत्या, प्रेम और सिस्टम के सवालों का थ्रिलर

    पीयूष पांडे ने किताब को बिल्कुल किसी हिंदी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की तरह लिखा है.'छह महीने पहले' जैसे संकेतों के साथ कहानी फ्लैशबैक में जाती है.पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे पाठक किसी फिल्म के दृश्य देख रहा हो.

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    प्रोफेसर आंद्रे बेतेई: असमानता से भरे समाज में विवेक, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्य

    प्रख्यात समाजशास्त्री और लेखक आंद्रे बेतेई का बीते हफ्ते दिल्ली में निधन हो गया. वो 2003 से दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस थे.वह भारत में जाति व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं पर अपने अध्ययनों के लिए जाने जाते हैं. उनके कामकाज पर नजर डाल रहे हैं डॉक्टर धीरज कुमार.

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    सहयोग और साझेदारी से आगे बढ़ेगी दुनिया, भारत दिखा रहा है रास्ता

    नीति आयोग की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 से 2023 के बीच करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं. इसी तरह के विकास के और काम को भारत ने कैसे हासिल किया बता रही हैं अर्चना व्यास.

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    आदत से कब बाज आएगा पाकिस्तान, इस्लामाबाद हमले पर पड़ोसी की शर्मनाक और हास्यास्पद रणनीति

    पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बीते हफ्ते एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. अपनी आदत के मुताबिक पाकिस्तान ने इस हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा दिया. पाकिस्तान ऐसा बार-बार क्यों करता है, बता रहे हैं विवेक शुक्ला.

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    चुपचाप कहां गुम हो गए मालाबार सिवेट, क्या इत्र उद्योग की भेंट चढ़ गए

    मालाबार सिवेट पश्चिमी घाट का एक स्थानिक (एन्डेमिक) मांसाहारी स्तनधारी है, यानी यह दुनिया में केवल इसी क्षेत्र में पाई जाती थी. लेकिन अब वह लुप्तप्राय है. क्या है इसके कारण बता रही है अबिथा शेकर.

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    तीन बहनों की त्रासदीः मन के प्रेत का तांडव 

    उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की एक सोसाइटी में एक साथ तीन सगी नाबालिग बहनों की आत्महत्या देश के मानसिक स्वास्थ्य की कहानी कह रही है. यह घटना इस बात की ओर भी इशारा है कि हम असली दुनिया से मुंह मोड़कर किस कदर आभासी दुनिया में जीने लगे हैं. क्या हो सकता है इससे बचने का रास्ता, बता रही हैं मेधा.

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    क्या अमेरिका से ट्रेड डील कर भारत ने सबसे अच्छा विकल्प चुना, रूस से तेल खरीद होगी बंद?

    भारत और अमेरिका ने एक व्यापार समझौते की घोषणा की है. अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 फीसद टैरिफ को कम कर 18 फीसदी कर दिया है. भारत ने क्यों किया यह समझौता और रूस के साथ तेल के व्यापार पर क्या पड़ेगा इस समझौते का असर बता रहे हैं डॉक्टर राजन कुमार.

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    भारत से ट्रेड डील के लिए क्यों तैयार हुआ अमेरिका, नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप कैसे बदल रहे हैं वर्ल्ड ऑर्डर

    भारत और अमेरिका ने जिस व्यापार समझौते पर सहमति की घोषणा की है, उसके फायदे क्या होंगे और इस समझौते के लिए भारत ने अमेरिका को कैसे मजबूर किया बता रहे हैं डॉक्टर नीरज कुमार.

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    कितना बड़ा बदलाव ला सकती है ऑरेंज इकॉनमी, जिसका जिक्र वित्त मंत्री ने बजट में किया

    इस साल के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस ऑरेंज इकॉनमी का जिक्र किया है, वह क्या हैं और वह देश में क्या बदलाव लाएगा, उसके बारे में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार विवेक शुक्ल.

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    दुष्यंत की कोशिश थी कि ये सूरत बदलनी चाहिए- उन्होंने ग़ज़लों की बिल्कुल नई लकीर खींची

    अचानक यह बात समझ में आती है कि उर्दू में फ़ैज़ जिस बात के लिए सराहे जाते हैं- रोमानियत और राजनीति को मिलाने के लिए, उसे शायद हिंदी में दुष्यंत कुमार ने कुछ और गाढ़ेपन के साथ साधने में कामयाबी हासिल की है.

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    बॉर्डर की चिंता या विक्टिम कार्ड का पैंतरा....लोकसभा में राहुल के भाषणों की मंशा को समझिए

    लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बार-बार एक ऐसी किताब के अंश को पढ़ने की कोशिश की, जो अभी छपी भी नहीं है. क्या है राहुल गांधी की राजनीति, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार मिश्र.

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    नरेंद्र मोदी का संकल्प बजट: शक्ति, स्वाभिमान और स्वायत्तता का संगम

    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को जिस बजट को पेश किया वह नरेंद्र मोदी सरकार की राजनीतिक दृष्टि और रणनीतिक सोच का कैसे बयान कर रहा है, बता रहे हैं जेएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर मनीष दभाड़े.

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    बजट 2026: संतुलन, संवेदनशीलता और सतत विकास की तलाश

    क्या बजट भारत की वर्तमान आर्थिक अवस्था की जरूरतों को पूरी तरह संबोधित कर पाता है या फिर कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपेक्षाएं अधूरी रह जाती हैं, बता रहे हैं डॉक्टर समीर शेखर.

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    आम बजट 2026: लोकलुभावनता से आगे, जिम्मेदार शासन की ओर

    आम बजट 2026 में इस बार मिशन 2047 को ध्यान में रखा गया है. सेमीकंडक्टर से लेकर रेयर अर्थ तक पर सरकार ने खास ध्यान दिया है.

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    बजट 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण से निकला संदेश, भारत बनेगा 'हार्ड पॉवर'-'साफ्ट पॉवर'

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026 का बजट पेश किया. उन्होंने इस बजट में कई तरह की घोषणाएं की है. इसके आधार पर कहा ज रहा है कि 'वेलफेयर-ड्रिवन ग्रोथ'से 'रणनीतिक अर्थव्यवस्था' बनने की ओर लंबी छलांग है.

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    भारत का बजट 2026: बाजार की निराशा के बीच चमकती भविष्य की उम्मीदें

    2026 के बजट में एक साथ दो तस्वीरें दिखा देती हैं, जिसमें एक तरफ बाजार की निराशा और दूसरी तरफ भविष्य की उम्मीदें दिखाई देती हैं. हालांकि शेयर मार्केट की शुरुआत  चिंता की वजह रही, लेकिन सरकार का दीर्घकालिक विज़न मजबूत सुधारों, निवेश और नवाचार पर आधारित है.

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    Budget 2026: क्या सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से खींच लिया है अपना हाथ, जानें क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ

    वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपना 9वां बजट पेश किया. इसमें सरकार ने सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर समेत कई घोषणाएं की हैं. लेकिन विशेषज्ञ वित्त मंत्री के बजट भाषण में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए कोई प्रमुख घोषणा न होने पर सवाल उठा रहे हैं. आइए जानते हैं कि क्या हैं इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के विशेषज्ञ विनायक चटर्जी की राय.

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