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विचार
  • कोरोना के दौर में लोगों को चुनाव नहीं वैक्सीन की जरूरत
    सुशील कुमार महापात्र
    मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा रिलीज किए गए डेटा के हिसाब से पिछले 24 घंटों में भारत में 1,61,736 कोरोना केस आए हैं. 879 लोगों की मौत हुई है. पिछले तीन दिनों से डेढ़ लाख से भी ज्यादा केस आ रहे हैं जबकि पिछले 7 दिनों से 1 लाख से ज्यादा केस रिकॉर्ड किए गए हैं. मार्च 2020 में जब भारत में लॉकडाउन लगाया गया तब देश में 500 के करीब केस थे. अब जब देश में रोज डेढ़ लाख से ज्यादा केस आ रहे हैं तब भी कई राज्यों  में चुनाव हो रहे हैं. रोड शो और रैली हो रही हैं. हज़ारों की संख्या में लोग बिना मास्क पहने, बिना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रैली और रोड शो में शामिल हो रहे हैं.
  • पश्चिम बंगाल: ये तीन जातियां तय करेंगी सत्ता का रास्ता, BJP की कवायद बनाम ममता की किलेबंदी
    मनोरंजन भारती
    पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में BJP की रणनीति बिल्कुल साफ है. BJP ने नॉर्थ बंगाल में अपने भविष्य को आजमाने की कोशिश की है. उत्तर बंगाल में 8 लोकसभा  सीटें हैं. 2019 में नॉर्थ बंगाल की आठ में से सात लोकसभा सीटें BJP ने जीती थीं. भारतीय जनता पार्टी ने एक रणनीति के तहत यहां पर अलग-अलग जातियों या समुदाय को केंद्र में रखा है. सबसे पहले राजवंशी समुदाय, जिसको भूमिपुत्र भी कहा जाता है. कूचबिहार, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग नार्थ, साउथ दिनाजपुर जैसी क़रीब तीस सीटों पर इनका दबदबा है. राजवंशी चाहते हैं कि NRC हो और बांग्लादेशियों की पहचान करके उन्हें बाहर निकाला जाए. यही वजह है कि BJP ने यहां पर अपनी पैठ बना ली है. 
  • पश्चिम बंगाल में आगे कतई नहीं है BJP, कांटे की टक्कर दे रही हैं एन्टी-इन्कम्बेन्सी से जूझतीं ममता
    मनोरंजन भारती
    पश्चिम बंगाल में इस बार का विधानसभा चुनाव काफी महत्वपूर्ण है. यह चुनाव ऐसे वक्त में लड़ा जा रहा है, जब पूरे देश में कोरोना का रोमांच अपने चरम पर है, मगर पश्चिम बंगाल में खूब रैलियां हो रही हैं और बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं. हां, इतना ज़रूर है कि अधिकतर लोग मास्क पहनते हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग कहीं नज़र नहीं आती.
  • आम आदमी दवा नहीं खरीद पाएगा, उसे जीने के लिए 'धर्म का गौरव' दिया जाएगा
    कोरोना के इस दौर में अस्पतालों में भयंकर भीड़ है. आज पूरा दिन बीमार लोगों के लिए फ़ोन करने में गया है. कहीं सफलता नहीं मिली है. इस दौरान महामारी और उसके प्रकोप को लेकर भयावह चीज़ों का पता चला. दवा की कमी है. भले सरकार दावा करती रहे, हक़ीक़त यह है कि जीवन रक्षक दवाओं के लिए भी फ़ोन करना पड़ रहा है.
  • अस्पतालों के बाहर 'गुजरात मॉडल' खोज रहे हैं गुजरात के लोग, मिल नहीं रहा
    गुजरात के लोग भी गुजरात मॉडल के झांसे में रहे हैं. पिछले साल भी और इस साल भी जब वहां के लोग अस्पतालों के बार दर-दर भटक रहे हैं तब उन्हें वह गुजरात मॉडल दिखाई नहीं दे रहा.
  • कोरोना टीकाकरण की प्राथमिकता में गंभीर मरीज कहां हैं?
    रवीश कुमार
    भारत के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण कहते हैं कि सबको टीका नहीं दे सकते हैं. जिन लोगों को ज़्यादा ख़तरा है उन्हें दिया जा रहा है. लेकिन क्या इसका कोई वैज्ञानिक आधार सरकार के पास है कि जिस मरीज़ को डायलिसिस के लिए जाना होता है उसके लिए कोरोना ख़तरा नहीं है? कैंसर के जो मरीज़ कीमो के लिए जाते हैं उन्हें टीके की ज़रूरत नहीं है? ऐसे लोगों को टीकाकरण की प्राथमिकता सूची से बाहर रखने का क्या वैज्ञानिक आधार रहा होगा? यह इस वक्त का सबसे बड़ा कठिन प्रश्न है. पहले हल नहीं किया गया तो क्या अब किया जाएगा?
  • अब किसी नई 'पहल' का इंतज़ार है
    प्रियदर्शन
    'पहल' के पहले दौर से भी मैं जुड़ा रहा - एक पाठक की तरह और एक 'पहल' विक्रेता की तरह. यह 87 से 90 के बीच के कभी के दिन थे, जब रांची में रहते हुए और जन संस्कृति मंच के लिए उत्साह और सक्रियता से काम करते हुए हम बाहर की पत्रिकाएं बांटना-बेचना भी अपना कर्तव्य समझते थे.
  • अलग देश बन गए हैं अमित शाह, उन पर लागू नहीं होते भारत के कानून
    रवीश कुमार
    अमित शाह पर कार्रवाई की बात आप कल्पना में भी नहीं सोच सकते और यह तो बिल्कुल नहीं कि चुनाव आयोग कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा, क्योंकि अब आप यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि चुनाव आयोग की वैसी हैसियत नहीं रही. आप जानते हैं कि कोई हिम्मत नहीं कर पाएगा.
  • कोरोना का संकट गंभीर, कई राज्यों में तालाबंदी की तैयारी
    रवीश कुमार
    कोरोना को लेकर गंभीरता के दो केंद्र हैं. मीटिंग और ब्रीफिंग. तालाबंदी को लेकर सब अलग-अलग तालियां बजा रहे हैं. इस बार भांति भांति की तालाबंदी है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दस दिनों के लिए पूरी तरह तालाबंदी कर दी गई है. महाराष्ट्र में कई ज़िलों में तालाबंदी है तो दिल्ली में रात दस बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक की तालाबंदी है. गुजरात में हाई कोर्ट ने ही कहा है कि तीन-चार दिनों की तालाबंदी कर दी जाए. गुजरात सरकार ने पूरे महीने के लिए 20 शहरों में रात 8 बजे से सुबह छह बजे का कर्फ्यू घोषित कर दिया है. कहीं आठ बजे से कर्फ्यू है तो कहीं दस बजे से कर्फ्यू है. कुछ भी.
  • क्या चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने की कोश‍िशें पर्याप्त हैं?
    रवीश कुमार
    इस चुनाव में कुछ भी हो जा रहा है. मतलब आज कोलकाता में पोलिंग होनी थी, खबर आती है कि उलूबेरिया के सेक्टर अफसर तपन सरकार रिज़र्व EVM लेकर चले गए और अपने एक रिश्तेदार के यहां सो गए. वो रिश्तेदार तृणमूल कांग्रेस के नेता निकले. मतलब कुछ भी. EVM लिया और समोसा खाने चले गए. EVM लिया मामा जी से मिलने चले गए. दोस्त की सगाई में चले गए और खा पी कर सो गए.
  • रफाल लड़ाकू विमान सौदे में फिर लगा दलाली का आरोप
    रवीश कुमार
    आपको याद होगा कि पिछले साल जुलाई में रफाल विमान आने वाला था. गोदी मीडिया के चैनलों ने उसके विजुअल से स्क्रीन को भर दिया. रफाल विमान की खूबियां ज़ोर ज़ोर से बताने लगा और उन लोगों को चिढ़ाने लगा जो रफाल के सौदे पर आरोप लगाया करते थे कि इस डील के ज़रिए अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई है. चैनलों पर रफाल को लेकर चमकदार हेडिंग लगाई गई, ऐसे जैसे गुलाब जल लेकर बारात के स्वागत में एंकर दरवाज़े पर खड़े हों.
  • सरकार ने नमकभर पैसा दिया, ढिंढोरा ऐसा पीटा, जैसे दो-दो लाख दिए हों
    रवीश कुमार
    व्हाट्सऐप यूनवर्सिटी में रिश्तेदारों के ग्रुप में इसे लेकर कोई चर्चा नहीं होती. इस दर्द को भी लोग सांप्रदायिकता के नशे में भूल गए, यह बहुत अच्छी बात है. उन्हें सपना देखना अच्छा लगता है कि भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनेगा, अभी हालत तो यह है कि जो है, वही हाथ से सरकता जा रहा है.
  • क्या भारतीय सियासत में नई इबारत लिख पाएंगे मुस्लिम दल और उनके नेता...?
    अमरीश कुमार त्रिवेदी
    पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों के गठबंधन की राजनीति की परख तो होगी ही, लेकिन साथ ही चुनाव देश में अलग राजनीतिक पहचान और रसूख पाने की कोशिश में जुटे मुस्लिम दलों और मुस्लिम नेताओं के लिए भी बेहद अहम है.
  • शरण कुमार लिंबाले को सरस्वती सम्मान : ‘हम फेंके हुए बस टिकटों जैसे थे’
    प्रियदर्शन
    ज़ख़्मों के लिए पुरस्कार और उस पर ताली बजाना कोई बेहतर मानवीय उपक्रम नहीं है. इसलिए मराठी लेखक शरण कुमार लिंबाले के उपन्यास 'सनातन' पर 15 लाख रुपये के सरस्वती सम्मान की घोषणा को उस तरह नहीं देखना चाहिए जिस तरह हम सभी पुरस्कारों को देखते हैं.
  • चुनाव से ऐन पहले मंदिर क्यों पहुंच जाते हैं PM मोदी? क्या है बंगाल चुनाव से कनेक्शन?
    प्रमोद कुमार प्रवीण
    यह पहली बार नहीं है, जब वोटिंग के वक्त प्रधानमंत्री किसी मंदिर में गए हों. 2018 में कर्नाटक विधान सभा चुनाव के दिन पीएम नेपाल के सीता मंदिर पहुंचे हुए थे. इसी तरह 2019 में लोकसभा चुनाव के वक्त वह केदारनाथ की गुफा में ध्यान लगा रहे थे. इस बार वह बांग्लादेश के मंदिरों में पूजा करेंगे.
  • CM ममता बनर्जी पर PM नरेंद्र मोदी ने नहीं किया पर्सनल अटैक...! आखिर क्यों बदली रणनीति...?
    प्रमोद कुमार प्रवीण
    ममता बनर्जी के चोटिल होने के बाद PM मोदी की यह पहली चुनावी सभा थी. इस बीच ममता बनर्जी व्हीलचेयर पर चुनावी सभाओं में जाती दिख रही हैं. इससे ममता बनर्जी की तस्वीर बंगाल की घायल शेरनी के रूप में उभरी है.
  • बिहार में शराबबंदी के प्रति नीतीश कुमार की 'गंभीरता' कैसे मंत्री रामसूरत राय के कारण दांव पर लगी है?
    मनीष कुमार
    बिहार में आप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थक हों या आलोचक, शराबबंदी के प्रति उनकी प्रतिबद्दता पर सवाल नहीं कर सकते. लेकिन उनके समर्थक हों या विरोधी वो साथ-साथ इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि शराबबंदी को लागू कराने में नीतीश सरकार विफल रही है जिसके कारण पूरे राज्य में एक समानांतर आर्थिक व्यवस्था कायम हुई है और जिसके सबसे अधिक लाभान्वित बिहार पुलिस के जवान, अधिकारी और अपराधी रहे हैं.
  • ममता बनर्जी पर हमले का आरोप एक साज़िश, हादसा या सियासी दांव?
    राकेश तिवारी
    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी नंदीग्राम के बिरुलिया गांव में सड़क पर गाड़ी में चलते हुए चोटिल हो गईं, उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया में मीडिया के सामने कहा, कि “कोई साज़िश है, मुझे चार-पांच लोगों ने धक्का दिया”.
  • OTT प्लैटफॉर्म की आड़ में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर वार?
    रवीश कुमार
    भारत सरकार ने 25 फरवरी को सूचना तकनीकि को लेकर नए नियमों को अधिसूचित किया है. इसका नाम The Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021, है. इन नियमों को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इससे इंटरनेट पर चलने वाले मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र पत्रकारों के लिए खतरा हो जाएगा.
  • बिहार पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट 2019: जारी हुए PET रिजल्ट, यहां करें चेक
    सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल CSBC रिजल्ट 2019 का रिजल्ट जारी कर दिया है. शारीरिक दक्षता परीक्षा, (PET) परिणाम सीएसबीसी की आधिकारिक साइट csbc.bih.nic.in पर बोर्ड द्वारा जारी किया गया है. वे उम्मीदवार जिन्होंने PET परीक्षा पास की है वे ड्राइविंग दक्षता टेस्ट, DET के लिए उपस्थित होने के योग्य होंगे
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