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विचार
  • फ्रांस में जासूसी की पुष्टि, इज़रायल में छापा, छवियों की चिन्ता में छवियों का बंटाधार
    रवीश कुमार
    फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी ANSSI ने पुष्टि कर दी है कि मीडिया पार्ट के दो पत्रकारों के फोन में पेगासस था. इस सुरक्षा एजेंसी ने इन पत्रकारों के फोन की फोरेंसिक जांच की है.
  • 'मैरी नहीं हारी, मैरी हारा नहीं करतीं...' - सपना नहीं टूटा, इसने नई पीढ़ी के लिए बीज बोए हैं...
    अनिता शर्मा
    रिंग के अंदर या बाहर तिरंगे में लिपटी मैरी कॉम की आंखों के आंसू सब कह गए. मुकाबला हार कर, उसके नतीजे से सहमत न होते हुए भी, जब मैरी ने अपनी प्रतिद्वंदी को गले लगाया, तो मानों खुद उस कोलंबियाई बॉक्सर ने अंदर से कहा होगा, असली विजेता तो तुम ही हो मैरी... असली विजेता तो तुम ही हो...
  • यूपी को बचाना है तो मुलायम-कांशीराम के वारिसों को मिलना होगा
    प्रियदर्शन
    6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद जब यूपी में बीजेपी की आक्रामक राजनीति अपने चरम पर थी, तब अचानक बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने एक साथ आने की घोषणा कर पूरी राजनीति पलट दी. भारतीय राजनीति में पहली बार दलित और पिछड़े साथ आ रहे थे. तब यह नारा बहुत लोकप्रिय हुआ था कि 'मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम.'
  • विदाई के पहले
    स्वाति चतुर्वेदी
    78 की उम्र में बीएस येदियुरप्पा आखिरकार देश की सर्वश्रेष्ठ और चतुर सियासी जोड़ी को साधने में सफल रहे. हम बात कर रहे हैं पीएम मोदी और अमित शाह की. पिछले एक महीने से येदियुरप्पा ने बारीकी से हर पहलू का अध्ययन किया और जान लिया कि भाजपा उनके शेष कार्यकाल के लिए उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं रहेगी.
  • महाराष्ट्र में 'भयावह भूस्खलनों' के क्या हैं मायने...? - आदित्य ठाकरे
    आदित्य ठाकरे ने कहा, जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए जब 130 करोड़ लोग आगे बढ़ेंगे तो दुनिया पर असर व्यापक होगा. हमें बस यह मान लेने की जरूरत है कि जलवायु परिवर्तन हमारी सोच से भी काफी तेज है और हम उसे और तेज करने का कारण बन रहे हैं. 
  • जासूसी पर जांच :  ममता ने न्यायिक आयोग बनाया, केंद्र ने फिर टरकाया
    रवीश कुमार
    पेगसास जासूसी कांड की जांच में एक नया मोड़ आ गया है. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले की जांच का ऐलान किया था लेकिन इससे एक कदम आगे जाते हुए बंगाल की सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन कर दिया है. दिल्ली आने से पहले ममता बनर्जी ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला किया. इस न्यायिक आयोग का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन लोकुर को बनाया गया है. कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य भी इस आयोग के सदस्य होंगे.
  • बदली बदली सी कांग्रेस-राहुल प्रियंका की कांग्रेस
    मनोरंजन भारती
    2024 के पहले आपको बदली बदली सी कांग्रेस नजर आएगी. क्योंकि जिस हालत में कांग्रेस है जानकार मानते हैं कि इससे बुरा और नहीं हो सकता क्या पता अगले चुनाव में पार्टी डूबने के बजाए तैर जाए क्योंकि बदल रही है कांग्रेस
  • सच छापा तो पड़ गया छापा
    रवीश कुमार
    अगर आप सरकार से सवाल करना चाहते हैं, आलोचना करना चाहते हैं तो पहले एक काम कीजिए. आयकर विभाग और प्रत्यर्पण निदेशालय जिसे ED कहते हैं उनके अधिकारियों से पूछ लीजिए कि कितना तक लिखें तो छापा पड़ेगा और कितना तक न लिखें तो छापा नहीं पड़ेगा.
  • धूप को बांधने चले तुगलक
    प्रियदर्शन
    जो लोग अरसे से 'दैनिक भास्कर' पढ़ते रहे हैं, वे पिछले कुछ महीनों से भास्कर में आए बदलावों को लेकर कुछ चकित थे. यह साफ़ नज़र आ रहा था कि 'दैनिक भास्कर' पत्रकारिता के धर्म के मुताबिक लगातार वे ख़बरें खोज और दे रहा है जिसे देने से दूसरे बच रहे थे. कोविड के दूसरे दौर में गंगा के पाट पर बनी क़ब्रों की तस्वीर बिल्कुल दहलाने वाली थी. पिछले दिनों उसने टीकाकरण की सुस्त रफ़्तार पर भी विस्तार से रिपोर्टिंग की. ऐसा नहीं कि वह सारी ख़बरें केंद्र सरकार या बीजेपी को निशाना बनाकर कर रहा था. जयपुर में होने के नाते उसने राजस्थान की गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ भी लगातार ख़बरें कीं. उसी की ख़बर से यह बात खुली थी कि राजस्थान में बहुत सारे टीके बिना इस्तेमाल फेंक दिए गए हैं. सरकार ने इसका खंडन भी किया, लेकिन भास्कर लगातार इस बात के प्रमाण देता रहा कि उसकी ख़बर सही है.
  • कैप्टन बनाम सिद्धू - फिलहाल युद्ध विराम मगर जंग जारी रहेगी
    मनोरंजन भारती
    पंजाब में महीनों से चले आ रहे नवजोत सिंह सिद्धू बनाम कैप्टन अमरिंदर सिंह के झगड़े में लगता है फिलहाल युद्ध विराम आ गया है. वजह ये है कि शुक्रवार को पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सिद्धू अपना कार्यभार संभालने वाले हैं और उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को एक चिट्ठी लिख कर इस समारोह में आने का अनुरोध किया है.
  • डरावने समय का ‘न्यू नॉर्मल’
    प्रियदर्शन
    'न्यू नॉर्मल' को हिंदी में क्या कहेंगे? इस सवाल पर विचार करते हुए मुझे सलमान रुश्दी का मिडनाइट्स चिल्ड्रेन याद आया- वहां एक किरदार कहता है- 'सब ठीकठाक है.' सब ठीकठाक है- यानी कुछ है जो गड़बड़ है. 'ठीक' में शामिल 'ठाक' दरअसल किसी विसंगति, किसी विरूपता की ओर इशारा करने का काम करता है.
  • सरकार पेगासस जासूसी की जांच से भाग क्यों रही है?
    प्रियदर्शन
    कुछ देर के लिए मान लें कि पेगासस जासूसी का वास्ता सरकार या उसकी एजेंसियों से नहीं है. लेकिन अगर नहीं है तो सरकार को क्या इस बात की चिंता नहीं होनी चाहिए कि कौन लोग इस देश के बेहद महत्वपूर्ण नागरिकों के जीवन में ऐसी डरावनी घुसपैठ कर रहे हैं?
  • आर्थिक संकट से घिरे देश में विपक्ष और पत्रकारिता की निगरानी करने की खबर भयानक
    रवीश कुमार
    पेगसस जासूसी कांड में पत्रकारों के अलावा अब विपक्ष के नेताओं के भी नाम आ गए हैं. दि वायर ने रविवार के बाद आज एक और रिपोर्ट छापी है जिसमें इसकी पुष्टि की गई है कि जासूसी के लिए 300 फोन नंबरों की एक सूची बनाई गई थी जिसमें राहुल गांधी के भी दो नंबर शामिल हैं. इसी सूची में राहुल से जुड़े 9 और नंबर डाले गए थे लेकिन राहुल ने नंबर बदल लिया था. राहुल ने वायर से कहा है कि उनके व्हाट्सऐप पर अतीत में संदिग्ध मैसेज आए हैं. जासूसी के लिए ही ऐसा किया जाता है. राहुल ने वायर से कहा है कि “यदि आपकी जानकारी सही है, तो इस स्तर की निगरानी व्यक्तियों की गोपनीयता पर हमले से आगे की बात है. यह हमारे देश की लोकतांत्रिक नींव पर हमला है. इसकी गहन जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जाए.” राहुल के अलावा उनके सहयोगी अलंकार सवाई, सचिव राव का नाम भी सूची में है. राहुल गांधी के सात गैर राजनीतिक दोस्तों के भी नाम हैं.
  • सावधान, आपके फोन में छुपा बैठा यह जासूस कौन है?
    प्रियदर्शन
    पत्रकारों की जासूसी नई बात नहीं है. दुनिया भर की सरकारें करती हैं. लेकिन सब करते हैं इसलिए यह नहीं समझ लेना चाहिए कि यह कोई अच्छा काम है. अंततः यह लोकतंत्र विरोधी कार्रवाई ही है. लेकिन भारत में जो कुछ हो रहा है, वह जासूसी भर नहीं है.
  • सिद्धू के ज़रिए खोया हुआ वर्चस्व पाना चाहता है गांधी परिवार...
    एक महीने की लम्बी मशक़्क़त के बाद रविवार रात को नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया. महीने पहले किसी ने नहीं सोचा होगा कि गांधी परिवार अपने सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस तरह चुनौती देगा.
  • नवजोत सिद्धू जो चाहें, कर सकते हैं : गांधी परिवार का संदेश
    अमरिंदर सिंह के करीबी सूत्रों का कहना है कि कैप्टन ने गांधी परिवार को यह संदेश दे दिया है कि यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनकी है कि पंजाब चुनाव में सिद्धू की कीमत न चुकानी पड़े. यह सुनिश्चित करें कि सिद्धू अपने दायरे में रहें.
  • बॉक्सिंग के लिए नहीं तो लव जिहाद के लिए देख लीजिए ‘तूफ़ान’
    संजय किशोर
    बवाल काटने के लिए ट्रोलर को ‘तूफ़ान’ देखनी पड़ेगी. खेल में दिलचस्पी रखने वालों को भी ‘तूफ़ान’ देखनी चाहिए. ये फ़िल्म खिलाड़ियों और ख़ासतौर पर मुक्केबाज़ों के लिए है. कइयों को लगेगा कि ये उनकी ही कहानी है. कई बार भटकने के बावजूद फ़िल्म आपको सच्चाई के क़रीब ले जाती है.
  • एक तरह से आईटी सेल ने दानिश के काम की तारीफ की...
    रवीश कुमार
    कई मैसेज में देखा कि श्मशान से तस्वीरें लेकर दानिश ने दुनिया भर में भारत की छवि को नुक़सान पहुँचाया. श्मशान से पत्रकारिता नहीं करनी चाहिए.
  • गुरू अभी मत ठोको ताली थोड़ा संयम रखो
    मनोरंजन भारती
    दरअसल कांग्रेस आलाकमान को लगता है कि जिस ढंग से सिद्धू ने घोषणा होने के पहले ही अपने को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने का जश्न मनाने लगे. अपने सर्मथक विधायकों के साथ बैठकें करने लगे और जिस ढंग से पोस्टरबाजी हुई वो सब ठीक नहीं था.
  • कलराज मिश्र तो बस निमित्त मात्र हैं
    प्रियदर्शन
    राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र की जीवनी से पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. राजस्थान के कई सांस्कृतिक संगठनों और लेखकों ने मांग की है कि इस जीवनी के प्रकाशक पर इसकी बिक्री में लाखों के घपले का जो आरोप लग रहा है उसकी जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक इस प्रकाशन से लेकर राजभवन तक से जुड़े सभी संदिग्ध व्यक्तियों को हटाया जाए.
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