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    दून लाइब्रेरी देहरादून में हम्पी से हिमालय तक पर उठे सवाल, क्या उत्तराखंड में बर्फबारी का पैटर्न बदला है

    देहरादून के दून पुस्तकालय और शोध केंद्र में कर्नाटक के हम्पी को विषय बनाकर लिखी गई किताब 'हम्पी: उत्कर्ष से अपकर्ष तक' पर चर्चा में वक्ताओं ने कहा कि हम्पी एक भौगोलिक करिश्मा है.

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    तुर्की के लिए खतरा क्यों है तबाह ईरान, क्या मिडिल-ईस्ट के दरवाजे पर दस्तक दे रही है नई 'मुसीबत'

    ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध से चिंतित क्यों है तुर्की. उसकी चिंता का कारण क्या है और एक मजबूत ईरान तुर्की के लिए क्यों जरूरी है बता रहे हैं गौरव कुमार द्विवेदी.

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    BJP के 46 वर्ष: वैचारिक बीज से भारत के भविष्य को आकार देने वाले राष्ट्रीय आंदोलन तक

    भाजपा का 47 वर्षों का सफर महज एक राजनीतिक गाथा नहीं, बल्कि विचारधारा, त्याग और ट्रांसफॉरमेशन की एक गाथा है. एक मजबूत संगठनात्मक आधार, दूरदर्शी नेतृत्व और प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं के बल पर, पार्टी आने वाले दशकों में भारत के भविष्य को आकार देने के लिए तैयार है.

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    क्या बिहार की शराबबंदी से मालामाल हुए झारखंड और बंगाल, अब कौन सा नशा कर रहे हैं लोग

    इस साल पांच अप्रैल को बिहार में शराबबंदी लागू हुए 10 साल पूरे हो गए. राज्य की नीतीश सरकार की ओर से सामाजिक सुधार, महिला सशक्तिकरण और जनस्वास्थ्य की दिशा में उठाए गए इस क्रांतिकारी कदम की समीक्षा कर रहे हैं अभिनव नारायण.

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    इजरायल-अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच खाड़ी से अधिक पैसा भारत क्यों आ रहा है, आगे क्या होने वाला है

    इजरायल-अमेरिका-ईरान के युद्ध का आज 38वां दिन है. इस युद्ध का असर हर तरफ दिखाई देने लगा है. भारत की अर्थव्यवस्था और खाड़ी के देशों में रहने वाले भारतीयों पर इसका क्या असर हो सकता है, बता रहे हैं डॉक्टर तारीक मसूद.

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    सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी नहीं रहे,भोजपुरी बोलने वाला भारतवंशी चला गया

    सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी का 30 मार्च को निधन हो गया. उनके पूर्वज 19वीं शताब्दी में बिहार से अनुबंधित मजदूरों के रूप में सूरीनाम पहुंचे थे. अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने वहां के समाज और राजनीति में अपनी जगह बनाई. उनके योगदान को याद कर रहे हैं विवेक शुक्ल.

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    हौसला, ईंधन, बदला: 'धुरंधर' के चश्‍मे से ईरान बनाम इजरायल-अमेरिका की जंग

    The Iran-Israel War: A 'Dhurandhar' Style Plot: ईरान और इजरायल-अमेरिका की इस जंग का अंत फिलहाल नजर नहीं आता. ये जंग अब संसाधनों से आगे निकलकर 'अहंकार' की लड़ाई बनती दिख रही है. इजरायल-अमेरिका अपनी ताकत के नशे में धुरंधर दिख रहे हैं, तो ईरान अपनी जिद में.

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    नक्सलवाद पर बड़ा मोड़: देवुजी का प्रस्ताव- बैन हटाओ, हथियार हम छोड़ देंगे

    देवुजी का प्रस्ताव वो मौका है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. क्योंकि इतिहास गवाह है कि विचारधारा नए रूप में लौटती है. नक्सलवाद एक 'रक्तबीज' की तरह है. इसे गोली नहीं न्याय, विकास और संवाद की जरूरत है.

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    खामेनेई पर बम हमला, सख्त सुरक्षा और एक भारतीय महिला पत्रकार का 1981 में लिया गया चौंकाने वाला इंटरव्यू

    1981 का ईरान… सियासी उथल-पुथल से गुजर रहे दौर में एक महिला पत्रकार पहुंचती है खामेनेई का इंटरव्यू लेने… चौंकाने वाली सुरक्षा जांच... और फिर लंबे इंटरव्यू का सिलसिला... पर फोटो नहीं खिंचवाने का आज भी मलाल, जानते हैं क्यों?

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    तड़ातड़ गोलियों की आवाज से पूरा जंगल गूंज उठा, नीली जीप में छेद बन चुके थे, नक्सलियों के आंतक की वो कहानी

    भारत अब नक्सलवाद से मुक्ति पा चुका है. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सीमा के करीब जंगलों से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता था. 2005 में नक्सलियों ने गुजरात परिवहन की बस जला दी थी.

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    भारत सरकार ने माओवादियों को कैसे किया परास्त, क्या चाहते थे आदिवासी माओवादी

    केंद्र सरकार ने देश से माओवादियों के खात्मे की घोषणा कर दी है. छत्तीसगढ़ देश में सबसे अधिक माओवाद प्रभावित राज्य रहा है. वहां से कैसे खत्म हुए माओवादी. सरकार ने इसके लिए क्या कदम उठाए और माओवादियों के अंतर्विरोध क्या रहे बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी.

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    21वीं सदी में युद्ध की दिशा तय कर रहे हैं ड्रोन + डेटा + AI, क्या होना चाहिए भारत का प्लान

    रूस-यूक्रेन युद्ध, भारत-पाकिस्तान युद्ध और ईरान-इजरायल और अमेरिका में जारी युद्ध ने भविष्य में होने वाले युद्धों की एक झलक भर दी है. आज कैसे लड़े जा रहे हैं युद्ध और भविष्य में कैसे लड़े जाएंगे युद्ध, इसके बारे में बता रहे हैं रणनीतिक मामलों के जानकार डॉक्टर अमर सिंह.

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    नक्सलवाद का अंत और 'हजार चौरासी की मां' की चेतावनी, जिस पर सरकार को ध्यान देना होगा

    पश्चिम बंगाल में नक्सलवादी आंदोलन को खत्म करने के लिए चलाए गए अभियान के बाद हिंदी बांग्ला की मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी ने एक उपन्यास लिखा था. उसका नाम था '1084 की मां'. इसके लिए उन्होंने क्या कहने की कोशिश की थी, बता रहे हैं विवेक शुक्ल.

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    खात्मे की ओर नक्सली...अब चुनौती इन्हें दोबारा ना पैदा होने देने की

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की घोषणा के मुताबिक 31 मार्च 2026 को देश में नक्सलवादी आंदोलन का अंत हो जाएगा. भारत में यह कैसे खड़ा हुआ और कैसी थी इसकी जमीन बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार सलमान रावी.

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    शादी के बाद महिला की 'ना' को क्यों नहीं सुन पाती हैं अदालतें 

    शादी से पहले और शादी के बाद महिलाओं की 'ना' का कितना महत्व हैं और इस पर भारत में अदालतों का क्या रुख रहा है, इसके बारे में बता रही हैं एडवोकेट सीमा जोशी.

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    माओवादियों के जाने के बाद छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में क्या होगा, क्या आदिवासी धर्म के नाम पर लड़ेंगे

    गृहमंत्री अमित शाह ने कई बार कहा है कि 31 मार्च तक माओवादी आंदोलन का नामोनिशान मिट जाएगा. यह तारीख अब बिल्कुल करीब है. इससे पहले पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी ने छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित इलाके का दौरा कर जाना कि वहां लोग अब किस बात की चर्चा कर रहे हैं.

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    युद्ध के बीच बेमानी है  'अर्थ ऑवर', युद्ध से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को जानकर हिल जाएंगे आप 

    दुनिया भर में आज 'अर्थ ऑवर' मनाया गया. यह पर्यावरण को बचाने की एक पहल है. लेकिन ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच क्या यह संभव है. युद्ध का पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बता रहे हैं हिमांशु जोशी.

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    बालेन शाह: नेपाल में हिंदुत्व की राजनीति का आगाज, संसद में कहां से कहां पहुंच गए 'सवर्ण' और 'दलित'

    पांच मार्च को हुए चुनाव के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल की नई सरकार ने आज शपथ ली. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की इस चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला है. बालेन शाह की चुनौतियों और उनके शपथ ग्रहण समारोह से निकले संदेश के बारे में बता रहे हैं मोहन कुमार मिश्र और रसना यादव .

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    विश्व रंगमंच दिवस: दिल्ली में रवींद्रनाथ टैगोर के सामने हुआ था पहला बंगाली नाटक, कैसी है कुमाऊंनी नाटक परंपरा

    विश्व रंगमंच दिवस पर विवेक शुक्ल बता रहे हैं कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हिंदी के अलावा बंगाली और कुमाऊंनी नाटकों की परंपरा कैसे विकसित हुई और आज किस हाल में है.

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    विश्व रंगमंच दिवस: कैसे होली के रंग को थियेटर ने बचाया, नैनीताल में कैसे लोकप्रिय हुए नाटक

    विश्व रंगमंच दिवस पर हिमांशु जोशी बता रहे हैं कि उत्तराखंड के नैनीताल में कैस शुरू और मजबूत हुई थियेटर की परंपरा और कैसे स्थानीय बोलियों ने उसे समृद्ध बनाया.

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