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ब्लॉग राइटर
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3P वाला महासंकट...कल तक जहां खड़े थे नीतीश और जदयू, तेजस्वी के सामने आ गई वही चुनौती
बिहार में पिछले 4 लोकसभा चुनावों में राजद का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. पार्टी को कभी भी 10 सीट पर भी जीत नहीं मिली है. अब विधानसभा चुनाव की हार ने तेजस्वी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
- दिसंबर 23, 2025 08:57 am IST
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आज भी गांधी क्यों भारत के लिए आवश्यक ही नहीं अपरिहार्य हैं
यह सच है कि गांधी के विचार अकादमिक गहराई में रूसो, मार्क्स या लॉक जैसे दार्शनिकों जितने व्यवस्थित नहीं लगते. वे जटिल परिभाषाएं या भारी सिद्धांत नहीं गढ़ते. लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी ताकत भी थी.
- अक्टूबर 02, 2025 08:45 am IST
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स्मृति शेष - शिबू सोरेन : वो सहे भी, लड़े भी, गिरे भी, और अंत में जीतकर चले गए
शिबू सोरेन उन विरले नेताओं में से थे जिन्होंने अपने जीवन में उस सपने को साकार होते देखा, जिसकी लड़ाई उन्होंने शुरू की थी. झारखंड का अलग राज्य. और सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि राज्य बनने के बाद उसे नेतृत्व भी दिया. जब आज वो दुनिया से गए हैं तो उनकी पार्टी की झारखंड में मजबूत सरकार है.
- अगस्त 04, 2025 13:44 pm IST
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प्यार, भरोसा और एक पल की लापरवाही: क्या हम अपने पालतू जानवरों के योग्य हैं?
यह वीडियो सिर्फ एक हादसे का सबूत नहीं है. यह एक आईना है, जो हमारे समाज की संवेदनशीलता, हमारे रिश्तों की गहराई और हमारी जिम्मेदारी के खोखलेपन को उजागर करता है.
- अप्रैल 03, 2025 22:44 pm IST
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बिहार दिवस के मायने : कितना बदला बिहार, कितने बदले बिहारी?
बिहार बदला है, पर जितना बदलना चाहिए था, उतना नहीं. बिहारी भी बदले हैं, पर उसकी तकदीर नहीं बदली. सड़कें बनीं, पर नौकरियां नहीं. बिजली आई, पर उद्योग नहीं. बिहार दिवस के मौके पर सरकार अपनी तारीफ करती है. लेकिन कब तक हम बिहार दिवस सिर्फ उत्सव की तरह मनाते रहेंगे?
- मार्च 22, 2025 00:23 am IST
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जयंती विशेष: बाजार की भीड़ में दबी औरत, साहिर की कलम में जिंदा है
साहिर अलग थे... बेहद अलग थे...तमाम समकालिन शायरों से अलग थे. उनके विचार इसलिए अलग थे क्योंकि वह सिर्फ खूबसूरत अल्फाज़ नहीं लिखते थे, बल्कि उनमें ज़िंदगी की सच्चाई समेटते थे. उनकी लेखनी में उर्दू की शान और हिंदी की सरलता का ऐसा मेल था कि हर आम और खास तक उनकी बात पहुंचती थी. वह शायर थे, मगर समाज सुधारक की तरह लिखते थे.
- मार्च 08, 2025 09:14 am IST
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'पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो...', सड़कों पर मारने से सफदर हाशमी मरा नहीं करते
जब किसी फैक्ट्री में मजदूरों के लिए "हल्ला बोल" मंचित होता है, जब कलाकार अपने नाटकों से शोषण और भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हैं, तब ऐसा लगता है कि सफदर हाशमी खुद वहां खड़े हैं. उनकी आवाज़ हर प्रदर्शन, हर नाटक, और हर गीत में गूंजती है
- जनवरी 02, 2025 07:42 am IST
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स्मृति शेष : आप... दीद के काबिल थे डॉ. मनमोहन सिंह
बतौर वित्त मंत्री 1991 से 1996 में उनके कार्य बेहतरीन थे लेकिन जो उनके कार्य 2004 से 2009 गौण रह गए वो बेमिशाल थे.
- दिसंबर 27, 2024 14:42 pm IST
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यह बीजेपी की हार से बढ़कर हेमंत सोरेन की जीत है
हेमंत सोरेन पहले ऐसे नेता बनकर उभरे हैं जिसकी स्वीकार्यता पूरे राज्य में है. झारखंड के सभी प्रमुख जनजातियों में अब जेएमएम की पकड़ हो गयी है. एक समय में मुंडा, उरांव और पहाड़िया जनजातियों का वोट बीजेपी को मिलता रहा था लेकिन हेमंत गेमचेंजर साबित हुए हैं.
- दिसंबर 06, 2024 17:46 pm IST
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स्मृति शेष : औद्योगीकरण के मुद्दे पर भारतीय लेफ्ट को 'राइट' करना चाहते थे बुद्धदेव भट्टाचार्य
बुद्धदेव भट्टाचार्य पर लिखने वाले उन्हें नंदीग्राम और सिंगूर की असफलता तक ही छोड़ देते हैं, लेकिन बंगाल में उनके दौर में हुए कार्यो की अच्छी व्याख्या नहीं होती है. अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान वामपंथी नेताओं के परंपरागत सोच से हटकर काम करने की कोशिश उन्होंने की थी.
- अगस्त 08, 2024 21:27 pm IST
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JMM के 50 साल : आंदोलन से निकली पार्टी, टूटती-बिखरती रही... पर कैसे बढ़ा कारवां
जेएमएम की स्थापना के समय एके रॉय बिहार विधानसभा के सदस्य थे और उनके संरक्षण में शिबू सोरेन टुंडी के जंगलों में महाजनों, अर्थात शोषकों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे. इस लड़ाई के दौरान कई बार हिंसक झड़प भी होती थी. जिस कारण शिबू सोरेन पर कई मुकदमें दर्ज हो गए थे.
- जुलाई 29, 2024 23:41 pm IST
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जयंती विशेष: भौगोलिक दुनिया के ही नहीं विचारों की दुनिया के भी यायावर थे त्रिपिटकाचार्य राहुल सांकृत्यायन
केदार पांडेय को जब हम राहुल सांकृत्यायन के नाम से संबोधित करते हैं तो उन्हें महापंडित कहने से बेहतर त्रिपिटकाचार्य कहना शायद उचित होगा. राहुल नाम उनका बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के बाद रखा गया था. महापंडित तो वो काशी से ही थे. इसके बाद राहुल बनने की लंबी यात्रा रही भौगोलिक भी और वैचारिक भी.
- जुलाई 29, 2024 23:40 pm IST
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4 सीट हारकर भी 5 साल की राजनीति जीत गए नीतीश कुमार
BJP के लिए केंद्र की राजनीति बेहद महत्वपूर्ण है. केंद्र सरकार की मजबूती के लिए नीतीश कुमार के 12 सांसद बेहद महत्वपूर्ण हैं तो अब भाजपा को इसके बदले में बिहार में अपने मुख्यमंत्री की इच्छा को कुर्बानी देनी होगी...
- जुलाई 29, 2024 23:40 pm IST
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राम मंदिर के लिए संघर्ष से लेकर भारत रत्न मिलने तक....आसान नहीं है भारतीय राजनीति में लालकृष्ण आडवाणी होना
लालकृष्ण आडवाणी की राजनीति में एक सबसे बड़ी बात वो देखने को मिलती है कि उन्होंने आइडियोलॉजी+इम्प्लीमेंट की नीति को अपनाया. उन्होंने अपने विचार की स्वीकार्यता को बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन झोंक दिया.
- फ़रवरी 03, 2024 16:10 pm IST
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प्रदूषण, हीटवेव, चक्रवात, क्लाइमेट रिफ्यूजी जैसी समस्याएं, भारत में कब बनेंगे चुनावी मुद्दे?
पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों पर राजनीतिक दलों की चुप्पी हैरत करने वाली नहीं मानी जा सकती है. संसदीय राजनीति में कोई भी दल उसी मुद्दे को उठाता है जिसकी मांग जनता की तरफ से होती है. आम लोग इस समस्या को झेल रहे हैं. लेकिन उनके बीच जागरुकता की बेहद कमी है.
- जून 02, 2022 02:18 am IST
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कोल इंडिया में आउटसोर्सिंग 'आंतरिक उपनिवेश' में शोषण की एक और नई शुरुआत
निजी मालिक उत्पादन को बढ़ाने के लिए काम के घंटों को असीमित कर देंगे. पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की अपने स्तर पर व्याख्या कर दी जाएगी. एक बड़ी कंपनी अपने उत्पादन लक्ष्य को बढ़ाने के लिए कई छोटी-छोटी कंपनियों को काम का ठेका दे देगी ये छोटी कंपनी पुराने खान मालिकों के गैंग्स ऑफ वासेपुर के पात्र शाहिद खान जैसे पहलवानों की तरह होंगे, उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ उत्पादन को बढ़ाना रह जाएगा.
- मई 17, 2020 22:19 pm IST
सचिन झा शेखर
सचिन झा शेखर