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नेपाल में वोटिंग शुरू, क्या GenZ के सपने पूरे होंगे? उम्मीदवारों और पार्टियों के घोषणापत्र कर रहे कंफ्यूज

शिवम शेखावत
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    मार्च 05, 2026 08:23 am IST
    • Published On मार्च 05, 2026 06:41 am IST
    • Last Updated On मार्च 05, 2026 08:23 am IST
नेपाल में वोटिंग शुरू, क्या GenZ के सपने पूरे होंगे? उम्मीदवारों और पार्टियों के घोषणापत्र कर रहे कंफ्यूज

नेपाल में गुरुवार को चुनाव है. वोटिंग शुरू हो चुकी है. सितंबर 2025 के Gen Z प्रदर्शनों के बाद यह पहला और 2015 में लागू हुए संविधान के बाद तीसरा चुनाव है. 275 संसदीय सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. इनमें से 165 सदस्य सीधे पहले स्थान पर आने वाली प्रणाली से चुने जाएंगे, जबकि 110 सदस्य अनुपात के आधार पर चुने जाएंगे. शुरुआत में 120 पार्टियां दर्ज थीं, जिनमें से 68 ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं. कुल 3406 उम्मीदवार मैदान में हैं. यह चुनाव पहले तय नवंबर या दिसंबर 2027 से करीब दो साल पहले हो रहा है. इसकी वजह Gen Z प्रदर्शन हैं, जिनकी वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा और देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया. नेपाल चुनाव में करीब 1.89 करोड़ मतदाता वोट डालने की तैयारी कर रहे हैं. लोगों को उम्मीद है कि यह चुनाव नेपाल की राजनीति की दिशा को बदलेगा.

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नेपाल की राजनीति के मुख्य खिलाड़ी

नेपाल की राजनीति को अक्सर कुर्सी बदलने का खेल कहा जाता है. यहां तीन बड़ी पार्टियां और उनके नेता सत्ता बदलते रहते हैं. पुष्प कमल दहल प्रचंड के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी केंद्र). के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल). शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस.

पिछले साढ़े तीन दशकों में इन पार्टियों और उनके नेताओं ने सरकार में बने रहने के लिए आपस में कमजोर और अपने फायदे के समझौते किए और अस्थिर गठबंधन बनाए. 2017 में यूएमएल सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि 2022 में नेपाली कांग्रेस सबसे आगे रही. जुलाई 2024 तक यूएमएल और नेपाली कांग्रेस ने मिलकर ओली को प्रधानमंत्री बनाकर गठबंधन सरकार चलाई. Gen Z प्रदर्शनों के बाद यही सरकार गिर गई. पहले चुनाव से पहले की चर्चा ज्यादातर चुनाव से पहले गठबंधन बनाने पर होती थी, जो नतीजे आने के बाद अक्सर टूट जाते थे. बार बार गठबंधन बनने और टूटने की वजह से कोई भी प्रधानमंत्री पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है.

नेपाल चुनाव एक नजर में

सीट - 275
पार्टियां - 68
उम्मीदवार- 3406
वोटर -1.89 करोड़

एक ही तरह के नेताओं के बार-बार सत्ता में बने रहने और देश में खास सुधार न होने की वजह 2022 के चुनाव में कुछ नए दल उभरे. रबी लामिछाने की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनी. लेकिन इस साल चुनाव से पहले का माहौल अलग है.आज की राजनीति पिछले चुनाव से अलग भी है और कुछ मामलों में वैसी ही भी है. पुरानी पार्टियों में से सिर्फ यूएमएल ने नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं किया है और ओली अब भी पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. वे अपने गृह क्षेत्र झापा-5 से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से वे छह बार जीत चुके हैं. पिछले साल जब प्रदर्शन शुरू हुए थे, तब ओली ने उन्हें अपनी सरकार को अस्थिर करने और नेपाल की संप्रभुता और एकता को खतरे में डालने की बाहरी साजिश बताया था.

उन्होंने अपना कड़ा रुख बनाए रखा और प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, जिसमें पहले दिन 19 लोगों की मौत हुई थी. बाद में उन्होंने इस्तीफा दिया, लेकिन इस्तीफे और चुनाव के बीच के समय में भी उन्होंने प्रदर्शन करने वालों के इरादों पर सवाल उठाए. उन्होंने प्रतिनिधि सभा भंग करने के फैसले को गलत बताया और अंतरिम सरकार को अवैध कहते हुए सर्वोच्च न्यायालय से संसद बहाल करने की मांग की. इसके बावजूद, देश में सरकार के खिलाफ माहौल होने के बाद भी वे फिर प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद में चुनाव लड़ रहे हैं.

नेपाली कांग्रेस

दूसरी ओर नेपाली कांग्रेस में कुछ बदलाव हुए हैं. देउबा अब अपने गृह क्षेत्र ददेलधुरा से चुनाव नहीं लड़ रहे और गगन थापा पार्टी अध्यक्ष बनकर आगे आए हैं. देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा, जो पिछली सरकार में विदेश मंत्री थीं, पिछले साल प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना कर चुकी हैं. देउबा और थापा के बीच मतभेद पहले से थे, खासकर यूएमएल के साथ गठबंधन के फैसले के बाद. देउबा ने पार्टी का विशेष अधिवेशन बुलाने से इनकार किया, जबकि थापा ने इसे बुलाया और सर्वोच्च न्यायालय ने उसे सही माना. इससे थापा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनना आसान हुआ. 

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल

प्रदर्शनों के बाद प्रचंड के नेतृत्व वाली माओवादी पार्टी का प्रभाव भी कम हुआ है. उनकी पार्टी ने करीब 10 छोटी पार्टियों के साथ मिलकर नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी नाम से नया दल बनाया है, जिसमें माधव कुमार नेपाल की पार्टी भी शामिल है.

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी

स्थापित पार्टियों के अलावा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी भी मजबूत दावेदार बनकर सामने आई है. काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. उन्होंने झापा-5 से ओली के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे पुराने और नए नेताओं के बीच सीधी टक्कर दिखेगी. मेयर के रूप में उनका काम तेज फैसले लेने और शहर के ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देने के लिए जाना गया. प्रदर्शन शुरू होने के बाद उन्हें अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में भी देखा गया था. हालांकि उनकी एकतरफा काम करने की शैली को लेकर कुछ लोगों को चिंता भी है, फिर भी उनकी उम्मीदवारी को लेकर उत्साह ज्यादा है. कुलमान घिसिंग की उज्यालो नेशनल पार्टी भी चुनाव में है. राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी भी मैदान में है, लेकिन वह ज्यादा मजबूत नहीं मानी जा रही.

नेपाल चुनाव-मुख्य पार्टियां 

UML-के.पी. शर्मा ओली
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-पुष्प कमल दहल प्रचंड
नेपाली कांग्रेस- शेर बहादुर देउबा
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी- बालेन शाह


क्या Gen Z के सवालों को जवाब मिलेगा?

पिछले साल जब लोग सड़कों पर उतरे थे, तो उनकी शिकायतें कई थीं. वे लंबे समय से सत्ता पर कुछ खास लोगों के कब्जे, बढ़ते भ्रष्टाचार, रोजगार की कमी और लगातार राजनीतिक अस्थिरता से परेशान थे. जब सरकार ने 26 सोशल मीडिया साइटों पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया, तो यह लोगों के गुस्से का आखिरी कारण बन गया और वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आए.

भ्रष्टाचार के मामले में नेपाल का बुरा हाल है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2024 की रिपोर्ट में नेपाल 180 देशों में 107वें स्थान पर है. विश्व बैंक के अनुसार देश में बेरोजगारी 10.7% है और युवाओं में यह 20.7% है. 15 से 34 साल के लोग कुल आबादी का 36% और काम करने वाली आबादी का 47% हैं. पिछले तीन दशकों में 70 लाख से ज्यादा लोग विदेश चले गए हैं. विश्व बैंक के अनुसार, 2024 तक देश की जीडीपी में विदेश से भेजे गए पैसों का हिस्सा 26.4% है. बार-बार सरकार बदलने और अलग अलग गठबंधन बनने से किसी भी पार्टी के लिए इन लंबे समय से चले आ रहे ढांचे से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम करना मुश्किल हो जाता है.

नेपाल में भ्रष्टाचार

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2024 रिपोर्ट में 107वां स्थान
नेपाल में बेरोजगारी- 10.7%
युवा बेरोजगारी-20.7%

हालांकि पार्टियों के घोषणापत्र में इन समस्याओं का जिक्र है, लेकिन उन्हें पूरा करने की साफ योजना नजर नहीं आती. यह भी साफ नहीं है कि सत्ता में आने पर GenZ की मांगों को नीतियों में कैसे शामिल किया जाएगा. सीधे चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में सिर्फ 31% 25 से 40 साल के हैं, जबकि 56% 41 से 60 साल के हैं. महिला उम्मीदवार सिर्फ 388 हैं, जो 11.4% है, जबकि देश की 51% आबादी महिलाएं हैं और उनमें से अधिकतर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रही हैं.

नेपाल में बनेगी किसकी सरकार?

 जो भी सरकार बनाएगा, उसके नतीजे आने वाले सालों में नेपाल की राजनीति पर गहरा असर डालेंगे. आरएसपी के पक्ष में माहौल दिख रहा है, लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि बालेन शाह की लोकप्रियता कितने वोट में बदलेगी. नेपाल की चुनाव व्यवस्था ऐसी है कि किसी एक पार्टी को पूरा बहुमत मिलना मुश्किल होता है, इसलिए फिर गठबंधन बनने की संभावना रहेगी, जो नेपाल की राजनीति में लंबे समय से चलता आ रहा चक्र है. कुछ जानकार मानते हैं कि पूरी व्यवस्था बदलने की संभावना कम है, लेकिन यह बात अब साफ हो गई है कि नेपाल के पुराने नेताओं के लिए युवा पीढ़ी को साथ लिए बिना सत्ता में बने रहना आसान नहीं होगा.

(लेखिका ओआरएफ के सामरिक अध्ययन कार्यक्रम में जूनियर फेलो हैं. उनका शोध भारत के पड़ोसी देशों पर केंद्रित है, जिसमें नेपाल, अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर खास ध्यान दिया गया है.)

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