Atiq Ahmed in Dhurandhar 2: रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर-2 रिलीज होने के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है. लेकिन इस फिल्म ने एक सियासी विवाद को भी जन्म दे दिया है. दरअसल इस फिल्म में सपा के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता रहे अतीक अहमद से मिलता-जुलता एक किरदार दिखाया गया है. फिल्म में इस किरदार का नाम आतिफ अहमद दिखाया गया है. फिल्म के अनुसार, आतिफ अहमद का पाकिस्तान की ISI और लश्कर-ए-तैयबा से लिंक था. पाकिस्तानी लिंक के जरिए वो भारत में जाली नोट के सप्लाई में शामिल था.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
फिल्म में उसके पाकिस्तान के समर्थन से यूपी में एक 'पाकिस्तान समर्थित सरकार' बनाने की साजिश में शामिल होने की बात भी दिखाई गई है. आतिफ अहमद के बहाने अतीक अहमद को धुरंधर-2 में दिखाने के मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहुत कुछ लिखा जा रहा है. कई लोग धुरंधर के निर्देशक आदित्य धर को निशाने पर ले रहे हैं. वहीं कुछ लोग फिल्म को सच्ची घटनाओं पर केंद्रित भी बता रहे हैं.
सपा के पूर्व सांसद ने दी प्रतिक्रिया
इस बीच समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस मुद्दें पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. आप किसी का भी अपमान कर सकते हैं. आप बस फिल्म को सफल बनाना चाहते हैं...'' एसटी हसन ने कहा कि अगर उनके पास कोई सबूत हो तो इंटेलिजेंस को दे. आप समाज में नफरत फैलाना चाहते हैं. जब आप पर सवाल उठेंगे तो आप इसे काल्पनिक बताएंगे.
'फिल्म हिट कराने के लिए जानबूझकर विवाद खड़ा करने की साजिश'
सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि इस तरह की फिल्मों के जरिए जानबूझकर विवाद खड़ा किया जाता है, ताकि लोगों की दिलचस्पी बढ़े और फिल्म को फायदा मिले. उनके अनुसार, जब किसी फिल्म को लेकर विवाद होता है तो लोग उसे देखने के लिए और ज्यादा उत्सुक हो जाते हैं. जिससे फिल्म की कमाई बढ़ती है.
AIMIM नेता वारिस पठान ने भी की आलोचना
दूसरी ओर AIMIM नेता वारिस पठान ने कहा कि मुसलमानों को बदनाम करने के लिए 'धुरंधर 2' बनाई गई है. वारिस पठान ने कहा कि मैं इस तरह की फिल्में नहीं देखता हूं, जिसमें सिर्फ नफरत परोसी जा रही हो. मैंने फिल्म का पहला पार्ट भी नहीं देखा है. उन्होंने दावा किया कि इस तरह की फिल्में सिर्फ एक साजिश के तहत बनाई जाती है, ताकि मुसलमानों को बदनाम किया जा सके. देश में नफरत फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं.
वारिस पठान ने आगे कहा कि इससे पहले भी कई प्रोपेगेंडा फिल्में बनाई जा चुकी हैं. ऐसी फिल्में बनाकर सिर्फ पैसा बनाया जा रहा है, फिल्म मेकर्स को इस बात की परवाह नहीं है कि इससे समाज में क्या प्रभाव पड़ेगा. वे सिर्फ पैसा कमाने के लिए फिल्मों के माध्यम से झूठ, नफरत और प्रोपेगेंडा दिखाते हैं.
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