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    विश्व रंगमंच दिवस: कैसे होली के रंग को थियेटर ने बचाया, नैनीताल में कैसे लोकप्रिय हुए नाटक

    विश्व रंगमंच दिवस पर हिमांशु जोशी बता रहे हैं कि उत्तराखंड के नैनीताल में कैस शुरू और मजबूत हुई थियेटर की परंपरा और कैसे स्थानीय बोलियों ने उसे समृद्ध बनाया.

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    जब पहाड़ में सूखते हैं नौले और भरते हैं स्विमिंग पूल... विश्व जल दिवस पर उत्तराखंड के बदलते पहाड़ की कहानी

    उत्तराखंड में जल संकट और जमीन के बदलते स्वरूप ने सामाजिक ढांचे को कमजोर किया है, जिससे किसानों का आत्मविश्वास घटा है.

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    World Down Syndrome Day 2026: समझ और साथ से बदलेगी सोच

    21 मार्च को दुनिया भर में World Down Syndrome Day 2026 मनाया जाता है. इस साल की थीम Improve Our Support Systems यानी हमारी सहयोग प्रणाली को बेहतर बनाना है. एम्स के मेडिकल सोशल वेलफेयर ऑफिसर रोहित गुप्ता बताते हैं कि डाउन सिंड्रोम कोई बीमारी नहीं बल्कि एक जेनेटिक स्थिति है, जिसमें chromosome 21 की एक अतिरिक्त कॉपी होती है.

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    सुप्रीम कोर्ट में पीरियड्स लीव का मुद्दा तो यूट्यूब में पीरियड्स पर Silent Cycle

    चार प्रमुख पात्रों के इर्द-गिर्द बुनी गई यह कहानी भारतीय समाज में लड़के-लड़कियों के बीच होने वाले भेदभाव से शुरू होती है और धीरे-धीरे पीरियड्स के दौरान महिलाओं पर थोपे गए एकतरफा नियमों और सामाजिक सोच को प्रभावी ढंग से सामने लाती है.

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    हरीश राणा केस और Guzaarish: जब सिनेमा में उठा इच्छा मृत्यु का सवाल

    इच्छा मृत्यु या पैसिव यूथेनेशिया के विषय पर संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म Guzaarish जीवन, पीड़ा और गरिमा के अधिकार पर एक संवेदनशील कृति है. संजय लीला भंसाली की फिल्मों की एक पहचान उनका गहरा और डार्क विजुअल टोन रहा है और Guzaarish में यह शैली साफ दिखाई देती है, जिसमें रंग और रोशनी मिलकर किरदार के भीतर के अंधेरे को भी सामने लाते हैं.

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    जब मशीनों पर टिका हो जीवन: इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या कहता है

    भारत में इच्छामृत्यु संबंधी कानून का संवैधानिक आधार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है. समय के साथ न्यायपालिका ने इस प्रावधान की व्याख्या केवल जीने के अधिकार के रूप में नहीं बल्कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार के रूप में की है.

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    कभी फैंस के लिए विलेन रहे हार्दिक पांड्या कैसे बन गए कुंगफू पांड्या

    टी 20 विश्व कप जीतने वाली टीम के प्रमुख स्तंभ हार्दिक पांड्या के करिअर में आए उतार-चढाव को याद कर रहे हैं हिमांशू जोशी.

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    महिलाओं के अधिकारों और स्थिति पर समाज से सवाल करतीं दो फिल्में

    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हिन्दी की दो फिल्मों के जरिए महिलाओं की स्थिति और समाज में जारी उनकी लड़ाई की तरफ इशारा कर रहे हैं हिमांशू जोशी.

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    फिल्म 'पिंक' का एक डायलॉग, जिसने समाज में बहस छेड़ दी थी

    इन दिनों हिन्दी फिल्म अस्सी की चर्चा है. यह फिल्म बलात्कार जैसे विषय पर बनी है. इस फिल्म में अभिनेत्री तापसी पन्नू प्रमुख भूमिका में हैं. इससे पहले 2916 में आई तापसी पन्नू की फिल्म पिंक ने भी ऐसी ही सुर्खियां बटोरी थीं. पिंक के बारे में बता रहे हैं हिंमाशु जोशी.

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    संविधान, बराबरी और हाशिये की आवाज को मुख्यधारा तक लाने वाली एक सशक्त कहानी 'जय भीम'

    संविधान, बराबरी और हाशिये की आवाज को मुख्यधारा तक लाने वाली एक सशक्त कहानी...

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    इमरान खान के नाम पर आई चिट्ठी और टी20 वर्ल्डकप विवाद

    भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबलों में हैंडशेक की परंपरा सीमित होने से खेल भावना पर सवाल उठे हैं. सोशल मीडिया ने खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ाया है.

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    वेलेंटाइन-डे पर विशेष: प्रेम, डर और समाज... रिश्तों की आजादी पर फिर चर्चा

    बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी वेलेंटाइन डे का असर दिखाई देता है. बाजारों, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर युवा इसे खुले तौर पर मनाते हैं, लेकिन इसी दौरान कई जगहों से विरोध, नैतिक पहरेदारी या सामाजिक दबाव की खबरें भी सामने आती हैं.

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    'उसने बुलाया था': हत्या, प्रेम और सिस्टम के सवालों का थ्रिलर

    पीयूष पांडे ने किताब को बिल्कुल किसी हिंदी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म की तरह लिखा है.'छह महीने पहले' जैसे संकेतों के साथ कहानी फ्लैशबैक में जाती है.पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे पाठक किसी फिल्म के दृश्य देख रहा हो.

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    आ गया 2026 : सुंदरता के पोस्टकार्ड से बाहर का उत्तराखंड और विकास की असली तस्वीर

    नए साल की शुरुआत हो चुकी है. उत्तराखंड में सूर्य की पहली किरण एक नई उम्मीद के साथ लोगों के जेहन में उतर चुका है.

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    उत्तराखंड में खेती पर गहरा संकट : तिल, चौलाई और कीवी बन सकते हैं सहारा

    वर्ष 2015 में 5000 से 6000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा उनके सुझाव पर कीवी के पौधे वितरित किए गए थे. शुरुआती वर्षों में कई परिवारों को कीवी की खेती से अच्छी आमदनी हुई.

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    उत्तराखंड@25: विकास मॉडल पर गहरी समीक्षा की मांग

    सनवाल ने कहा कि जौनसार, कुमाऊं और गढ़वाल की अलग सामाजिक-सांस्कृतिक प्रकृति को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियाँ तैयार करनी होंगी और छोटे-बड़े किसानों के लिए अलग नीतियां बनानी चाहिए ताकि वे अपने उत्पाद बड़े बाजार तक पहुँचा सकें. मौजूदा विकास मॉडल पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है.

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    गहरा है पहाड़ों पर विनाश और समाज की अनदेखी का संबंध

    भट्ट की अगली रिपोर्ट ताला गांव (रुद्रप्रयाग जिला) से थी. यहां धंसाव के चलते अब तक 80 परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है.

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    युवाओं के हीरो कोहली की कहानी कुछ फिल्मी सी, बस अब परीकथा जैसे अंत की जरूरत

    2019 वर्ल्ड कप विराट कोहली के करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर था. कप्तान के रूप में उन्होंने 9 मैचों में 443 रन बनाए, लेकिन भारत सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हार गया. सोशल मीडिया पर उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को भी गलत तरीके से निशाना बनाया गया.

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    DDLJ के 30 साल: एक फिल्म जिसने दिखाया, भारतीयता और आधुनिकता साथ रह सकती है

    काजोल, अमरीश पुरी और शाहरुख खान के शानदार अभिनय से सजी फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' की रीलीज को 20 अक्तूबर को 30 साल पूरे हो गए. इस फिल्म में दिखाए गए मूल्यों और महिला किरदारों के बारे में बता रहे हैं हिमांशु जोशी.

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    दीपावली: बम पटाखों से कहीं बड़ा एक भाव

    उत्तराखंड के पहाड़ी समाज में दीपावली सदियों से अन्य त्योहारों की तरह प्रकृति और पशुओं के प्रति आभार का अवसर रही है. पिथौरागढ़ के आचार्य दामोदर भट्ट कहते हैं यहां कई गांवों में दीपावली के आसपास दो से तीन हफ्तों तक दीपक जलाए जाते हैं.

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