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    धुरंधर के मुक़ाबले इक्कीस

    अगर उन्माद के बीच विवेक की आवाज़ सुननी हो तो ‘इक्कीस’ भी देखें. सच तो यह है कि इस फिल्म की नाकामी हमारे विवेक की भी नाकामी है.

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    ईरानी लड़कियों के सीने में जलती है एक आग

    ईरान में लड़कियों अपने दमन और उत्पीड़न की परवाह किए बिना, अपने कटे होंठों से बहते लहू के साथ मोर्चे पर हैं, ईरान को बदलने की बात कर रही हैं. वैसे ईरान में लड़कियों की यह जुझारू भूमिका नई नहीं है.

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    एक राष्ट्र, एक चुनाव : महिलाओं के लिए क्यों खास, समझिए

    समकालिक चुनाव होने पर महिला आरक्षित सीटों का पुनर्गठन, उम्मीदवार चयन तथा राजनीतिक दलों की रणनीतिक तैयारी एकीकृत रूप से संभव होगी

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    क्या नेताओं का अहंकार इस दुनिया को नष्ट कर देगा?

    दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जो नई विश्व-व्यवस्था बनी थी, वह दो ध्रुवों में बंटी हुई एक शीतयुद्ध लड़ती रही. लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका के एकाधिकार की छुपी हुई कोशिशें अब बिल्कुल स्पष्ट घोषणाओं में बदल चुकी हैं.

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    काशी की मणिकर्णिका पर मालवा की आह, विकास की दलीलें और विरासत का सवाल

    Manikarnika Ghat: काशी में लोग झगड़ा करते हैं तो भी गंगा की ओर देखकर करते हैं क्योंकि यहां हर बात का गवाह कोई न कोई घाट है और मणिकर्णिका तो ऐसा घाट है जहां आग भी गवाह होती है. इंदौर के होल्कर वंशज नाराज़ हैं. समाज के लोग नाराज़ हैं. राजनीति भी गरमाई है.

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    दिल्ली बुक फेयर में लाखों नई किताबें, AI और इंटरनेट पर दुनिया भर के कंटेंट के बावजूद कैसे टिकी हैं पुस्तकें

    किताबों ने हमें देखना सिखाया है. किताबें ख़ूब ख़रीदें. यह अनुभव आम है कि हम जितनी किताबें ख़रीदते हैं, उतनी पढ़ नहीं पाते. लेकिन किताबों का घर में होना आश्वस्त करता है कि किसी भी दिन हम चाहें तो उन्हें पलटेंगे. किताबें भी हमें अपनी आलमारियों से देखती रहती हैं.

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    मिट गए सोमनाथ को तोड़ने वाले... आज भी यहां शान से गूंजता है हर-हर महादेव!

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण खुद चंद्रदेव ने किया था. कहा जाता है कि राजा दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा ने इसी जगह पर मिट्टी का शिवलिंग बनाकर महादेव की घोर तपस्या की थी. जब शिव जी प्रसन्न हुए, तो यहां 'सोमनाथ' के रूप में स्थापित हो गए. तभी से ये जगह आस्था का केंद्र बन गई.

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    सुपरस्टार के 'नाम पर' दिखना, छपना कहीं आसान, लेकिन सवाल शाहरुख खान से कहीं आगे का है!

    सवाल यह है कि 'एक वर्ग' जो साल 2024 में ट्विटर पर-ऑल आइज ऑन राफाह- पोस्ट की झड़ी लगा देता है, वह इस तरह की घटनाओं पर क्यों चुप्पी साध लेता है? यहां एक बार को किंग खान की मजबूरी समझी जा सकती है, लेकिन बाकी लोगों को किसी शख्स की जिंदा जला देने, बर्बरतापूर्ण ढंग से मार देने की घटना क्यों नहीं झकझोरती?

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    "असली धुरंधरों" को महसूस, आत्मसात, अनुसरण करने, सम्मान देने की जरूरत

    सिनेमा संदेश ही दे सकता है, इसे ग्रहण करना, आत्मसात करना समाज के ऊपर है! ISI करीब 77 साल पहले अपनी स्थापना (1 जनवरी, 1948) के बाद से ही भारत के खिलाफ 'अलग-अलग तरह के युद्ध' छेड़े हुए है. ऐसे-ऐसे युद्ध, जिनकी आप एक बार को कल्पना भी नहीं कर सकते

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    स्मृतिशेष ज्ञानरंजन: हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया

    वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ज्ञानरंजन का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनकी कहानियों के साथ-साथ 'पहल' नाम की साहित्य पत्रिका के संपादन के लिए भी याद किया जाएगा.

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    वेनेज़ुएला पर हमला: अमेरिकी ताकत की नई परिभाषा गढ़ता डोनाल्ड ट्रंप का 'डॉनरो सिद्धांत'

    डोनाल्ड ट्रंप का 'डॉनरो सिद्धांत' लोकतंत्र या वैचारिक संघर्ष से कम और संसाधनों, सुरक्षा और महान शक्ति प्रतिस्पर्धा से अधिक जुड़ा है. इस बारे में और विस्तार से बता रहे हैं डॉक्टर मनीष दाभाडे.

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    वेनेजुएला में नैतिकता गई तेल लेने! पश्चिम का दोहरा रवैया, संयुक्त राष्ट्र पर सवाल, शीतयुद्ध की आशंका

    अमेरिका का वेनेजुएला पर सीधा सैन्य हमला वैश्विक राजनीति में ताक़त बनाम नैतिकता की बहस को फिर से तेज़ कर रहा है, जहां तेल संसाधनों और भू-रणनीतिक हितों के लिए अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों की अनदेखी की गई.

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    21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल

    वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.

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    छत्तीसगढ़ के माओवादी आंदोलन से आदिवासियों को क्या मिला

    छत्तीसगढ़ में करीब चार दशक तक चले माओवादी आंदोलन में आदिवासियों के हिस्से में क्या आया है, बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी.

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    IND vs RSA: दक्षिण अफ्रीका ने टीम इंडिया को "फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट" से बाहर निकाल दिया!

    India vs South Africa: टीम इंडिया का सीरीज में सफाया तो तभी तय हो गया था जब उसे दक्षिण अफ्रीका ने उस पर 549 का भारी-भरकम लक्ष्य लाद दिया था, लेकिन आखिरी दिन सर्वकालिक सबसे बड़ी हार की कल्पना शायद ही किसी ने की थी

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    आ गया 2026 : सुंदरता के पोस्टकार्ड से बाहर का उत्तराखंड और विकास की असली तस्वीर

    नए साल की शुरुआत हो चुकी है. उत्तराखंड में सूर्य की पहली किरण एक नई उम्मीद के साथ लोगों के जेहन में उतर चुका है.

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    सैलाब में खो गया सुकून... कोविड के बाद अचानक 'घुमक्कड़' कैसे हो चली जिंदगी?

    कोरोना के बाद भारत में एक नई आदत नहीं, बल्कि एक नई मानसिकता पैदा हुई है. 'अब नहीं तो कभी नहीं' की मानसिकता. लॉकडाउन ने लोगों से सिर्फ आजादी नहीं छीनी थी, उसने समय का भरोसा भी छीन लिया था. नतीजा यह हुआ कि जैसे ही पाबंदियां हटीं, लोग घरों से नहीं, बल्कि भीतर जमी हुई बेचैनी से बाहर निकले.

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    QS 2026: भारतीय विश्वविद्यालयों की हरित प्रगति, सरकार की पहल का क्या असर?

    QS रैंकिंग में दुनियाभर के विश्वविद्यालयों को शामिल किया जाता है. इस बार की रैंकिंग में आईआईटी रुड़की, बीएचयू जैसे संस्थानों को दर्जा मिला है.

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    अरावली कटी तो आएंगे कई देश जद में... ये मुद्दा सिर्फ राजस्थान का थोड़ी है

    अरावली का मुद्दा जंगल बनाम विकास की बहस का है ही नहीं. यह उस सोच की परीक्षा है, जो मानती है कि पहाड़ काटे जा सकते हैं, हवा बांटी जा सकती है और पानी को फाइलों में सीमित किया जा सकता है. अरावली पर चला हर बुलडोजर सिर्फ अलवर या गुरुग्राम की जमीन नहीं छीलता, वह दक्षिण एशिया की साझा सांसों पर असर डालता है.

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    जब अदालतें पहाड़ तय करने लगें... अरावली पर SC के 100 मीटर वाले फैसले की असहज करने वाली सच्चाई

    क्या पहाड़ियों और पर्वत प्रणालियों की वैज्ञानिक परिभाषा तय करना सुप्रीम कोर्ट का काम है? पर्यावरण संरक्षण में भारतीय न्यायपालिका की भूमिका ऐतिहासिक रही है, खासकर अनुच्छेद 21 के तहत, जहां उसने कार्यपालिका की निष्क्रियता के बीच हस्तक्षेप किया है.

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