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    भारत का बजट 2026: बाजार की निराशा के बीच चमकती भविष्य की उम्मीदें

    2026 के बजट में एक साथ दो तस्वीरें दिखा देती हैं, जिसमें एक तरफ बाजार की निराशा और दूसरी तरफ भविष्य की उम्मीदें दिखाई देती हैं. हालांकि शेयर मार्केट की शुरुआत  चिंता की वजह रही, लेकिन सरकार का दीर्घकालिक विज़न मजबूत सुधारों, निवेश और नवाचार पर आधारित है.

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    Budget 2026: क्या सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से खींच लिया है अपना हाथ, जानें क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ

    वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपना 9वां बजट पेश किया. इसमें सरकार ने सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर समेत कई घोषणाएं की हैं. लेकिन विशेषज्ञ वित्त मंत्री के बजट भाषण में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए कोई प्रमुख घोषणा न होने पर सवाल उठा रहे हैं. आइए जानते हैं कि क्या हैं इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के विशेषज्ञ विनायक चटर्जी की राय.

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    ईरान न तो अफगानिस्तान है और न इराक, क्या केवल 'धमकी' दे रहा है अमेरिका

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी शब्द युद्ध और दोनों की रणनीति के बारे में बता रहे हैं अज़ीज़ुर रहमान आज़मी. यह भी जानिए कि आखिर ईरान इतना संयंम क्यों दिखा रहा है.

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    अजीत पवार ने मुझसे कहा था- देखना मैं सीएम बनूंगा

    राजनीतिक रूप से अलग होने के बावजूद, अजित पवार हमेशा अपने चाचा-चाची और भतीजी के बारे में बड़े स्नेह से बात करते थे. पहली बार तो वे पवार के कहने पर ही मूल एनसीपी में वापस लौटे थे. पवार उनके राजनीतिक आदर्श थे और उन्होंने राजनीति "साहब" के साथ रहकर सीखी थी.

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    भारत और ईयू का बीमा कवच बनेगा मुक्त व्यापार समझौता, कितनी बड़ी हैं इसकी चुनौतियां

    भारत और यूरोपिय संघ ने मंगलवार को नई दिल्ली में जिस मुक्त व्यापार समझौते पर दस्तखत किए क्या है उसकी अहमियत बता रहे हैं अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जानकार डॉक्टर समीर शेखर और व्यापार मामलों की शोध छात्रा नरगिस मोहापात्रा.

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    भोपाल के कलियासोत डैम में अब क्यों नहीं आते हैं प्रवासी पक्षी, कौन बिगाड़ रहा है उसका इको सिस्टम

    झीलों के शहर भोपाल के कलियासोत डैम और उसके परिस्थितिकी तंत्र के बारे में बता रहे हैं पर्वतारोही आशीष कोलारकर.

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    क्या कुर्दों के साथ युद्ध-विराम के बाद सीरिया में आएगी शांति?

    बशर अल असद की सरकार का तख्तापलट कर अहमद अल शरा सीरिया के राष्ट्रपति बने थे.सीरिया की अंतरिम सरकार की सेना और कुर्दों की सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज के बीच संघर्ष विराम 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है. क्या यह समझौता सीरिया में शांति ला पाएगा.

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    धार की ये सरस्वती पूजा और एक वो जब हम मां की साड़ी से बना लेते थे पंडाल-एक रिपोर्टर की आंखों देखी

    मध्य प्रदेश के धार के भोजशाला परिसर में इस साल सरस्वती पूजा और जुमे की नमाज एक ही दिन हुई. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे.इस रिपोर्टर डायरी में पढ़िए की एनडीटीवी के अनुराग द्वारी ने वहां क्या देखा और उनके मन में कैसे-कैसे विचार उमड़े.

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    बर्फीले तूफान और गर्म होती पृथ्वी: जलवायु परिवर्तन पर कितना सच बोल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्लाइमेट या जलवायु परिवर्तन को लेकर अक्सर बयान देते रहते हैं. इस समय अमेरिका में चल रहे बर्फीले तूफान को देखते हुए उन्होंने फिर एक बयान दिया है.ट्रंप क्लाइमेट पर ट्रंप के बयानों की पड़ताल कर रही हैं ओजस्विनी तक्षक.

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    ट्रंप 2.0 और नियम-आधारित व्यवस्था का संकट: अमेरिकी सॉफ्ट पावर का पतन

    ट्रंप 2.0 के अंतर्गत अमेरिका एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां, वह शक्ति तो बनाए रखना चाहता है, लेकिन नेतृत्व के दायित्वों से पीछे हट रहा है. यह असंतुलन टिकाऊ नहीं है. इतिहास बताता है कि केवल हार्ड पावर पर आधारित प्रभुत्व अल्पकालिक होता है.

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    धुरंधर के मुक़ाबले इक्कीस

    अगर उन्माद के बीच विवेक की आवाज़ सुननी हो तो ‘इक्कीस’ भी देखें. सच तो यह है कि इस फिल्म की नाकामी हमारे विवेक की भी नाकामी है.

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    ईरानी लड़कियों के सीने में जलती है एक आग

    ईरान में लड़कियों अपने दमन और उत्पीड़न की परवाह किए बिना, अपने कटे होंठों से बहते लहू के साथ मोर्चे पर हैं, ईरान को बदलने की बात कर रही हैं. वैसे ईरान में लड़कियों की यह जुझारू भूमिका नई नहीं है.

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    एक राष्ट्र, एक चुनाव : महिलाओं के लिए क्यों खास, समझिए

    समकालिक चुनाव होने पर महिला आरक्षित सीटों का पुनर्गठन, उम्मीदवार चयन तथा राजनीतिक दलों की रणनीतिक तैयारी एकीकृत रूप से संभव होगी

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    क्या नेताओं का अहंकार इस दुनिया को नष्ट कर देगा?

    दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जो नई विश्व-व्यवस्था बनी थी, वह दो ध्रुवों में बंटी हुई एक शीतयुद्ध लड़ती रही. लेकिन सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका के एकाधिकार की छुपी हुई कोशिशें अब बिल्कुल स्पष्ट घोषणाओं में बदल चुकी हैं.

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    काशी की मणिकर्णिका पर मालवा की आह, विकास की दलीलें और विरासत का सवाल

    Manikarnika Ghat: काशी में लोग झगड़ा करते हैं तो भी गंगा की ओर देखकर करते हैं क्योंकि यहां हर बात का गवाह कोई न कोई घाट है और मणिकर्णिका तो ऐसा घाट है जहां आग भी गवाह होती है. इंदौर के होल्कर वंशज नाराज़ हैं. समाज के लोग नाराज़ हैं. राजनीति भी गरमाई है.

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    दिल्ली बुक फेयर में लाखों नई किताबें, AI और इंटरनेट पर दुनिया भर के कंटेंट के बावजूद कैसे टिकी हैं पुस्तकें

    किताबों ने हमें देखना सिखाया है. किताबें ख़ूब ख़रीदें. यह अनुभव आम है कि हम जितनी किताबें ख़रीदते हैं, उतनी पढ़ नहीं पाते. लेकिन किताबों का घर में होना आश्वस्त करता है कि किसी भी दिन हम चाहें तो उन्हें पलटेंगे. किताबें भी हमें अपनी आलमारियों से देखती रहती हैं.

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    मिट गए सोमनाथ को तोड़ने वाले... आज भी यहां शान से गूंजता है हर-हर महादेव!

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण खुद चंद्रदेव ने किया था. कहा जाता है कि राजा दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रमा ने इसी जगह पर मिट्टी का शिवलिंग बनाकर महादेव की घोर तपस्या की थी. जब शिव जी प्रसन्न हुए, तो यहां 'सोमनाथ' के रूप में स्थापित हो गए. तभी से ये जगह आस्था का केंद्र बन गई.

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    सुपरस्टार के 'नाम पर' दिखना, छपना कहीं आसान, लेकिन सवाल शाहरुख खान से कहीं आगे का है!

    सवाल यह है कि 'एक वर्ग' जो साल 2024 में ट्विटर पर-ऑल आइज ऑन राफाह- पोस्ट की झड़ी लगा देता है, वह इस तरह की घटनाओं पर क्यों चुप्पी साध लेता है? यहां एक बार को किंग खान की मजबूरी समझी जा सकती है, लेकिन बाकी लोगों को किसी शख्स की जिंदा जला देने, बर्बरतापूर्ण ढंग से मार देने की घटना क्यों नहीं झकझोरती?

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    "असली धुरंधरों" को महसूस, आत्मसात, अनुसरण करने, सम्मान देने की जरूरत

    सिनेमा संदेश ही दे सकता है, इसे ग्रहण करना, आत्मसात करना समाज के ऊपर है! ISI करीब 77 साल पहले अपनी स्थापना (1 जनवरी, 1948) के बाद से ही भारत के खिलाफ 'अलग-अलग तरह के युद्ध' छेड़े हुए है. ऐसे-ऐसे युद्ध, जिनकी आप एक बार को कल्पना भी नहीं कर सकते

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    स्मृतिशेष ज्ञानरंजन: हिंदी की ऊष्मा और ऊर्जा का एक स्रोत चला गया

    वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार ज्ञानरंजन का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनकी कहानियों के साथ-साथ 'पहल' नाम की साहित्य पत्रिका के संपादन के लिए भी याद किया जाएगा.

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