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वेलेंटाइन-डे पर विशेष: प्रेम, डर और समाज... रिश्तों की आजादी पर फिर चर्चा

हिमांशु जोशी
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    फ़रवरी 14, 2026 14:38 pm IST
    • Published On फ़रवरी 14, 2026 14:38 pm IST
    • Last Updated On फ़रवरी 14, 2026 14:38 pm IST
वेलेंटाइन-डे पर विशेष: प्रेम, डर और समाज... रिश्तों की आजादी पर फिर चर्चा

आज प्रेम का पर्व है, लेकिन भारत में प्रेम करने की आजादी पर सामाजिक दबाव और प्रतिबंधों के सवाल अब भी कायम हैं. वेलेंटाइन डे के मौके पर जहां देशभर में प्रेम का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं हाल की ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं ने रिश्तों की सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है. जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से सामने आए एक मामले ने इस चर्चा को और तेज कर दिया, जिसमें एक अंतरधार्मिक कपल की हत्या ने सामाजिक दबाव और पारिवारिक विरोध की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए.

मुरादाबाद केस: रिश्ते के विरोध में कथित ऑनर किलिंग

मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस के अनुसार मुरादाबाद में 27 वर्षीय युवक और 22 वर्षीय युवती लंबे समय से रिश्ते में थे. दोनों अलग-अलग धर्मों से थे और परिवार इस संबंध का विरोध कर रहा था. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि युवती के भाइयों ने कथित रूप से दोनों को निशाना बनाया. पुलिस ने मामले को ऑनर किलिंग की श्रेणी में दर्ज करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में पारिवारिक नाराजगी और सामाजिक दबाव अहम वजह के रूप में सामने आए. घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल रहा और प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी.

पुराने मामलों की पृष्ठभूमि: मनोज-बबली केस की याद

ऑनर किलिंग की चर्चा होते ही हरियाणा का चर्चित मनोज-बबली केस याद आता है. जून 2007 में प्रेम विवाह करने वाले इस कपल की हत्या ने पूरे देश में बहस छेड़ दी थी. इसके बाद मार्च 2010 में कर्नाल की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कई आरोपियों को सजा दी, जिसे ऑनर किलिंग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना गया. हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों से अंतरजातीय और अंतरधार्मिक रिश्तों को लेकर हमले, धमकियां और सामाजिक दबाव की खबरें सामने आती रही हैं, जिससे यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह जाती.

बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी वेलेंटाइन डे का असर दिखाई देता है. बाजारों, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर युवा इसे खुले तौर पर मनाते हैं, लेकिन इसी दौरान कई जगहों से विरोध, नैतिक पहरेदारी या सामाजिक दबाव की खबरें भी सामने आती हैं.

लोकतंत्र, डर और प्रेम पर 

पत्रकार और लेखक रवीश कुमार अपनी किताब The Free Voice में लिखते हैं, “The way things are in India, couples invariably find little love and far more hatred in the course of their love. That they still dare to love is worthy of our salutations.” वे ऑनर किलिंग को “a cocktail made of prejudice, hate and misogyny” बताते हैं. उनके मुताबिक समाज में बढ़ते डर और पूर्वाग्रह का असर सबसे पहले निजी रिश्तों पर दिखाई देता है, जहां प्रेम करने वाले युवाओं को विरोध और कभी-कभी हिंसा का सामना करना पड़ता है.

गांधी का प्रेम और अहिंसा का विचार

इसी संदर्भ में महात्मा गांधी का प्रेम और अहिंसा का विचार आज भी प्रासंगिक दिखाई देता है. गांधी ने लिखा था, “Where there is love there is life.” उनके लिए प्रेम केवल व्यक्तिगत भावना नहीं बल्कि सामाजिक नैतिकता और अहिंसा का आधार था. जब प्रेम से जुड़े मामलों में हिंसा की खबरें सामने आती हैं, तब गांधी का यह दृष्टिकोण सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन जाता है और समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है.

वेलेंटाइन डे के दिन प्रेम का उत्सव जितना निजी भावनाओं से जुड़ा है, उतना ही यह समाज की मानसिकता का आईना भी बन जाता है. सवाल सिर्फ यह नहीं कि लोग प्रेम कैसे करते हैं, बल्कि यह भी है कि समाज प्रेम को कितनी स्वतंत्रता और सुरक्षा देने के लिए तैयार है. शायद इसी संतुलन में प्रेम, लोकतंत्र और व्यक्तिगत अधिकारों की असली परीक्षा छिपी हुई है.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उससे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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