- मोज्तबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर. 1979 इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार पिता से पुत्र को मिली सत्ता
- मोज्तबा का प्रभाव मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से उनके करीबी संबंधों के कारण माना जाता है
- नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोज्तबा ईरान की सभी बड़ी नीतियों और सुरक्षा बलों पर अंतिम नियंत्रण और फैसला करेंगे
अमेरिका-इजरायल से जंग में मारे गए ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे अयातुल्लाह मुजतबा खामेनेई को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया है. ईरान के सुप्रीम लीडर का चयन करने के लिए जिम्मेदार मौलवियों के निकाय ने रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात अपने निर्णय की घोषणा की. एक बयान में इस निकाय ने कहा कि मुजतबा खामेनेई को "निर्णायक वोट" से इस पद के लिए चुना गया है. ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ने कहा है कि नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद ईरान ने इजरायल की ओर अपनी पहली मिसाइलें दाग भी दी हैं.
चलिए आपको यहां बताते हैं कि मुजतबा खामेनेई की अबतक की जिंदगी कैसी रही है और उनको अब सुप्रीम लीडर के रूप में कितनी शक्तियां मिलेंगी.
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कौन हैं मुजतबा खामेनेई?
1969 में मशहद में जन्मे मुजतबा, अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं. उनके परिवार में कुल मिलाकर पांच भाई-बहन हैं. उनका बचपन ऐसे दौर में बीता जब उनके पिता ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के विरोध में आवाज उठाने वाले प्रमुख धार्मिक नेताओं में शामिल हो चुके थे. 1979 में हुई इस्लामी क्रांति के बाद उनके परिवार की स्थिति पूरी तरह बदल गई और वे नए ईरानी शासन के प्रभावशाली दायरे में आ गए.
क्रांति के बाद उनका परिवार तेहरान चला गया. वहां मुजतबा ने अलवी हाई स्कूल में पढ़ाई की, जिसे अक्सर शासन से जुड़े प्रभावशाली लोगों को तैयार करने वाले संस्थान के रूप में देखा जाता है. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कोम शहर में रूढ़िवादी धर्मगुरुओं के मार्गदर्शन में धार्मिक शिक्षा हासिल की. हालांकि उन्होंने कई वर्षों तक धार्मिक अध्ययन किया, फिर भी वे अब तक ग्रैंड अयातुल्लाह के पद तक नहीं पहुंचे थे.
ईरान के संविधान के अनुसार देश के सुप्रीम लीडर के पास उच्च धार्मिक दर्जा होना जरूरी माना जाता है. इसी कारण मुजतबा की धार्मिक स्थिति को लेकर लंबे समय से वरिष्ठ धर्मगुरुओं के बीच चर्चा और बहस होती रही है. ईरान-इराक युद्ध के समय उन्होंने हबीब बटालियन में सेवा दी थी. इसी दौरान उनकी पहचान ऐसे लोगों से हुई जो आगे चलकर ईरान की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों में महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे.
मुजतबा का सुप्रीम लीडर चुना जाना खास क्यों?
मोजतबा खामेनेई को मिला यह प्रमोशन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार है जब ईरान का सर्वोच्च नेतृत्व पिता से पुत्र के पास गया है. पिता के बाद बेटा सुप्रीम लीडर बना है और यह इस्लामी गणराज्य ईरान की उस मूल सोच के विपरीत है जिसमें शाह के शासन के बाद वंशानुगत शासन को स्वीकार नहीं किया गया था. इससे ईरान के अंदर बहस शुरू होने की संभावना है.
विश्लेषकों का कहना है कि उनका असली प्रभाव इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ उनके करीबी संबंधों से आता है. यह संगठन ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे में बेहद शक्तिशाली माना जाता है. वर्ष 2019 में अमेरिका ने मुजतबा पर प्रतिबंध लगाए थे. अमेरिकी आरोप था कि अली खामेनेई ने अपनी कुछ शक्तियां अपने बेटे को सौंप दी थीं और वे बिना किसी सार्वजनिक जवाबदेही के फैसलों में भूमिका निभा रहे थे.
सुधारवादी नेताओं और कुछ विदेशी सरकारों ने उन पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने और सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई का समर्थन करने के आरोप भी लगाए हैं. हालांकि ईरानी सरकार इन सभी आरोपों को लगातार खारिज करती रही है.
मुजतबा के पास कितना पावर होगा?
इस पद पर मुजतबा ईरान के आर्म्ड फोर्सेस के कमांडर-इन-चीफ हैं. उनके पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और अन्य सुरक्षा बलों पर अंतिम नियंत्रण होगा. साथ ही वो देश की सभी बड़ी नीतियों- विदेश, रक्षा, न्यूक्लियर, न्याय- पर अंतिम फैसला देंगे. अब वो ईरान के अंदर धार्मिक और राजनीतिक रूप से सबसे ऊंची अथॉरिटी हैं. अब देखना होगा कि ईरान अब अपने न्यू सुप्रीम लीडर की किस तरह हिफाजत करेगा क्योंकि इजरायल ने साफ कर दिया है कि वो न्यू सुप्रीम लीडर को अपना निशाना बनाएगा.
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