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रवीश कुमार

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

  • भारत के स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण कहते हैं कि सबको टीका नहीं दे सकते हैं. जिन लोगों को ज़्यादा ख़तरा है उन्हें दिया जा रहा है. लेकिन क्या इसका कोई वैज्ञानिक आधार सरकार के पास है कि जिस मरीज़ को डायलिसिस के लिए जाना होता है उसके लिए कोरोना ख़तरा नहीं है? कैंसर के जो मरीज़ कीमो के लिए जाते हैं उन्हें टीके की ज़रूरत नहीं है? ऐसे लोगों को टीकाकरण की प्राथमिकता सूची से बाहर रखने का क्या वैज्ञानिक आधार रहा होगा? यह इस वक्त का सबसे बड़ा कठिन प्रश्न है. पहले हल नहीं किया गया तो क्या अब किया जाएगा?
  • अमित शाह पर कार्रवाई की बात आप कल्पना में भी नहीं सोच सकते और यह तो बिल्कुल नहीं कि चुनाव आयोग कार्रवाई करने का साहस दिखाएगा, क्योंकि अब आप यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि चुनाव आयोग की वैसी हैसियत नहीं रही. आप जानते हैं कि कोई हिम्मत नहीं कर पाएगा.
  • कोरोना को लेकर गंभीरता के दो केंद्र हैं. मीटिंग और ब्रीफिंग. तालाबंदी को लेकर सब अलग-अलग तालियां बजा रहे हैं. इस बार भांति भांति की तालाबंदी है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दस दिनों के लिए पूरी तरह तालाबंदी कर दी गई है. महाराष्ट्र में कई ज़िलों में तालाबंदी है तो दिल्ली में रात दस बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक की तालाबंदी है. गुजरात में हाई कोर्ट ने ही कहा है कि तीन-चार दिनों की तालाबंदी कर दी जाए. गुजरात सरकार ने पूरे महीने के लिए 20 शहरों में रात 8 बजे से सुबह छह बजे का कर्फ्यू घोषित कर दिया है. कहीं आठ बजे से कर्फ्यू है तो कहीं दस बजे से कर्फ्यू है. कुछ भी.
  • इस चुनाव में कुछ भी हो जा रहा है. मतलब आज कोलकाता में पोलिंग होनी थी, खबर आती है कि उलूबेरिया के सेक्टर अफसर तपन सरकार रिज़र्व EVM लेकर चले गए और अपने एक रिश्तेदार के यहां सो गए. वो रिश्तेदार तृणमूल कांग्रेस के नेता निकले. मतलब कुछ भी. EVM लिया और समोसा खाने चले गए. EVM लिया मामा जी से मिलने चले गए. दोस्त की सगाई में चले गए और खा पी कर सो गए.
  • आपको याद होगा कि पिछले साल जुलाई में रफाल विमान आने वाला था. गोदी मीडिया के चैनलों ने उसके विजुअल से स्क्रीन को भर दिया. रफाल विमान की खूबियां ज़ोर ज़ोर से बताने लगा और उन लोगों को चिढ़ाने लगा जो रफाल के सौदे पर आरोप लगाया करते थे कि इस डील के ज़रिए अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई है. चैनलों पर रफाल को लेकर चमकदार हेडिंग लगाई गई, ऐसे जैसे गुलाब जल लेकर बारात के स्वागत में एंकर दरवाज़े पर खड़े हों.
  • व्हाट्सऐप यूनवर्सिटी में रिश्तेदारों के ग्रुप में इसे लेकर कोई चर्चा नहीं होती. इस दर्द को भी लोग सांप्रदायिकता के नशे में भूल गए, यह बहुत अच्छी बात है. उन्हें सपना देखना अच्छा लगता है कि भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनेगा, अभी हालत तो यह है कि जो है, वही हाथ से सरकता जा रहा है.
  • भारत सरकार ने 25 फरवरी को सूचना तकनीकि को लेकर नए नियमों को अधिसूचित किया है. इसका नाम The Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021, है. इन नियमों को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इससे इंटरनेट पर चलने वाले मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र पत्रकारों के लिए खतरा हो जाएगा.
  • क्या 10 मार्च को नंदीग्राम से लौटते वक्त ममता बनर्जी पर हमला हुआ? हमले की खबर आते ही ममता पर हुए हमले को या उन्हें लगी चोट को ड्रामा बताने की जल्दी में खुद को सहिष्णु और संवेदनशील बताने वाले लोग तेज़ी से फिसलने लगे. किसी को चोट लगी हो उसे ड्रामा बताने से पहले बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं ने इंतज़ार करना भी ठीक नहीं समझा.
  • विरोध-प्रदर्शन से जब कृषि क़ानून वापस नहीं हुए तो सरकारी कंपनियों में काम करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि उनके आंदोलन पर मीडिया और राजनीति हंसेगी. ठठाकर हंसेगी. जब दूसरी कंपनियों को ख़त्म किया जा रहा था तब इस वर्ग के व्हाट्स एप ग्रुप में कुछ और चल रहा था.
  • पहले की राजनीति सांप्रदायिकता को घर घर नहीं पहुँचाती थी. दंगे होते थे और शहर या राज्य के सीमित लोग इसकी चपेट में आते थे. लेकिन अब इसका व्यापक रूप से सामाजीकरण हुआ है. इसमें इन रिश्तेदारों का बहुvत बड़ा योगदान है.
  • भारत के युवा हमेशा ही निराश करते हैं. उनसे उम्मीद थी कि वे नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम को लेकर डिबेट में डूब जाएंगे लेकिन वे नौकरी पर डिबेट की मांग करने लगे. भारत इंग्लैंड टेस्ट मैच के दूसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले इन युवाओं ने नौकरी की बात शुरू कर दी.
  • एक ऐसे समाज में जब नब्बे दिनों से किसान कृषि क़ानूनों के विरोध के दौरान अंबानी और अडानी के नाम से भी नारे लगा रहे हैं, राहुल गांधी हम दो और हमारे दो के आरोप मढ़ रहे हैं, अमित शाह अहमदाबाद में एक क्रिकेट स्टेडियम का नाम नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम रख देते हैं. जिसके भीतर एक छोर का नाम रिलायंस एंड है और दूसरे छोर का अडानी एंड. 
  • बहस की कमी नहीं पड़नी चाहिए. अगर बेरोज़गारी और पेट्रोल के दाम को लेकर लोग ज़्यादा मीम बनाने लगें तो उन्हें नए मीम बनाने का मौका देना भी एक तरह आपदा में अवसर के समान है. लोग खुद ही इस काम में लगे हुए हैं कि मोटेरा क्रिकेट स्टेडियम का नाम नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम हो गया है. व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का यह फेवरेट टॉपिक है कि किस नेता के नाम पर स्टेडियम से लेकर क्या क्या है.
  • अंधेरों की हजार परतें इंसाफ़ की हवा की दिशा नहीं रोक सकती हैं. सत्ता के दम पर 22 साल की एक लड़की को डराने का अहंकार आज एक फैसले की कापी में चूरचूर होकर बिखरा पड़ा है. सत्ता इससे सबक नहीं लेगी लेकिन पुलिस के अफसरों को लगा कर गोदी मीडिया की फौज खड़ी कर इस मुल्क, जिसका नाम भारत है, में एक 22 साल की लड़की को जिस तरह घेरा गया और उसका मुकाबला इस लड़की ने किया है वही दिशा है. सिर्फ उसका नाम दिशा नहीं है बल्कि वाकई वह दिशा है. जब उसने 20 फरवरी को भरी अदालत में कह दिया कि किसानों की बात करना गुनाह है तो वह जेल में रहना चाहेगी.
  • मैं इस सवाल का उत्तर जानना चाहता हूँ कि जो पार्टी धर्म और धार्मिक पहचान की राजनीति करती हो वह अपने समर्थक समूह से लेकर कार्यकर्ता समूह में धर्म का कौन सा आचरण स्थापित कर पाती है?
  • पेट्रोल और डीज़ल के दाम दस दिन से लगातार बढ़ते जा रहे हैं. मध्य प्रदश में प्रीमियम पेट्रोल सौ रुपये लीटर हो गया है. अनुपपूर शहर में तो सामान्य पेट्रोल 100 रुपये लीटर हो गया है. भारत में अब ऐसे कई शहर हैं जहां पेट्रोल 98 से 100 रुपये लीटर बिक रहा है. उपभोक्ता को समझ नहीं आ रहा है कि ये दाम अंतरराष्ट्रीय कारणों से बढ़ रहे हैं या उन कारणों से जिसका पता नहीं चल रहा है. पेट्रोल डीज़ल के बढ़ते दाम से हर दिन लोगों की कमाई घटती जा रही है. 2017, 2018 के बाद यह तीसरा मौका है जब पेट्रोल की कीमतें लंबी छलांग रही हैं.
  • अच्छी बात है कि 98 से 100 रुपये लीटर पेट्रोल बिकने से देश परेशान नहीं है. दिल्ली में एक रात में गैस के सिलेंडर के दाम 50 रुपये बढ़ गए, दिल्ली परेशान नहीं है. जो देश इन बातों से परेशान नहीं है उस देश को इस बात से परेशान किया जा रहा है कि बंगलुरु की एक 22 साल की लड़की दिशा ए रवि गिरफ्तार हुई है जिस पर राजद्रोह, दो समुदायों के बीच नफरत और साज़िश करने के आरोप हैं. भारत की छवि ख़राब करने के आरोप हैं. भारत की छवि ख़राब करना एक नया आरोप है, इसे कानूनी रूप से कहां परिभाषित किया गया है यह बताना मेरे बस की बात नहीं है. लेकिन दिशा ए रवि की गिरफ्तारी के सिलसिले में कुछ शब्द चल पड़े हैं. हैं पुराने लेकिन इस बार पुलिस की निगाह से संदिग्ध हो गए हैं. टूल किट. डिजिटल स्टार्म. यानी ट्वीटर फेसबुक या व्हाट्सएप के ज़रिए किसी चीज़ को वायरल कर देना. आए दिन होता रहता है और आप इसके आदी हो चुके हैं.
  • चौपट अर्थव्यवस्था के दौर में भारतीय जनता ने महंगाई को जिस तरह गले लगाया है वह अद्भुत है. हर बढ़ती हुई कीमत जनता को स्वीकार है. जनता ने महंगाई को लेकर सरकार को मनोवैज्ञानिक दबाव से मुक्त कर दिया है.
  • जिस समाज में प्रेम करना मुश्किल हो जाए उस समाज में सबसे पहले नौजवान ही नहीं रहना चाहेंगे. रहेंगे भी तो मन मार कर. ज़िंदा लाश बन कर.
  • किसान आंदोलन ने इतना तो कर दिया कि नवंबर से लेकर अभी तक देश में खेती पर बात हो रही है. इस बीतचाती के कई मंच हैं. एक मंच है संसद. दूसरा मंच है राजनीतिक रैलियां. तीसरा मंच है किसान आंदोलन और उनकी महापंचायतें हैं. चौथा मंच है अखबारों के संपादकीय पन्ने हैं. किसान आंदोलन के कारण कांग्रेस और बीजेपी की आर्थिक नीतियां भी एक्सपोज़ होती रहीं. विपक्ष में रहते हुए कुछ और सत्ता में आकर कुछ. ऐसा इसलिए होता है कि दोनों की आर्थिक नीतियां एक ही किताब और स्कूल से आती हैं.
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