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  • पंजाब की राजनीति में हमेशा बड़े चेहरों का वर्चस्व रहा है. सुरजीत सिंह बरनाला, प्रताप सिंह कैरों , बेअंत सिंह ,प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिन्द्र सिंह, सुखबीर सिंह बादल और उसी राह पर अब पंजाब के 100 दिन के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी चल रहे है. किसी ने नहीं सोचा था कि इतने कम समय में चरणजीत सिंह पंजाब की जनता के अलावा प्रदेश के बाहर भी इतने लोकप्रिय हो जाएंगे.
  • जब कांग्रेस ने पंजाब में दलित मुख्यमंत्री देने का फ़ैसला किया था, राहुल गांधी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने यह कहा था कि कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने दलित को मुख्यमंत्री बनाया. अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वह कैसे सिद्धू को मनाए? दलित मुख्यमंत्री का संदेश भी रहे, यानी सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे.
  • हाल के दिनों में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने महामृत्युंजय जाप और बगलामुखी पाठ करके लाखों मायूस कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए एक उम्मीद जगायी है और यह बताने की कोशिश भी की है कि कांग्रेस के पास टैलेंट की कमी नहीं है.
  • दरअसल हरीश रावत को डर था कि कहीं उनके साथ 2002 की घटना फिर से ना दोहराई जाए. 2002 में हरीश रावत के चेहरे पर चुनाव लड़ा गया था और मुख्यमंत्री की कुर्सी एनडी तिवारी के हिस्से में आई थी. इस बार रावत कांग्रेस आलाकमान से आश्वासन चाहते थे ताकि चुनाव के बाद कोई दूसरा उम्मीदवार मुख्यमंत्री की रेस में ना खड़ा हो जाए.
  • हरीश रावत ने कहा, “है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र में तैरना है, संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है. जिस समुद्र में तैरना है. सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं. जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं. मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि हरीश_रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है!'
  • राहुल गांधी ने मुश्किल विषयों पर जवाब देना शुरू कर दिया है. शुरुआती रुझान के लिए TV की बहस और अख़बारों की सुर्ख़ियों देखें, तो अभी राहुल गांधी को कामयाबी मिलती दिख रही है, लेकिन यह विषय बहुत व्यापक और गंभीर है. एक छोटी-सी गलती भी आपको सांप-सीढ़ी के खेल की तरह 99 से सीधा 9 पर लाकर खड़ा कर सकती है.
  • शिवसेना के राज्य सभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से और दूसरे दिन कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाक़ात कर कहा, “देश में विपक्ष का एक ही मोर्चा होना चाहिए तथा कांग्रेस के बिना कोई भी विपक्षी गठबंधन नहीं बन सकता.” 
  • मोदी समर्थक उनकी तारीफ़ इस बात को लेकर करते थे कि प्रधानमंत्री मोदी कभी भी कठोर फ़ैसले करने से पीछे नहीं हटेंगे. आज जब प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से माफ़ी माँगी और तीन क़ानून रद करने का फ़ैसला किया तो हो सकता है उनके समर्थकों में थोड़ी निराशा हुई हो. 
  • कांग्रेस में ज़्यादातर नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2022 अक्टूबर तक राहुल गांधी फिर से कांग्रेस की कमान संभाल लेंगे. दरअसल इस प्रकरण में कई सारे सवाल छिपे हुए हैं.
  • आज की कार्यसमिति की बैठक का सार यह है कि फ़िलहाल कांग्रेस को बिखरने से रोकने के लिए सोनिया गांधी के नेतृत्व की आवश्यकता है.
  • सूत्रों के मुताबिक, 16 अक्टूबर को होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक मे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव की तारीख़ों का ऐलान होने वाला है. अक्टूबर, 2021 से लेकर 2022 तक पूरा लेखा-जोखा बताया जाएगा.
  • इससे पहले जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए थे और कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, उस वक़्त भी जी-23 के सीनियर नेताओं ने राहुल गांधी के काम करने के तरीक़े पर सवाल खड़े किए थे. यानी, एक बात तो साफ़ है, जब-जब राहुल गांधी के फ़ैसले ग़लत साबित होते हैं, जी-23 एकदम सक्रिय हो जाता है, यानी, ये सब नेता इंतज़ार करते हैं कि कब राहुल गांधी से गलती हो.
  • सचिन पायलट की मुलाक़ात दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ हुई तो लगने लगा कि अब राजस्थान में भी नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है.
  • पंजाब को दलित मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस ने अपने लिए मास्टर स्ट्रोक चला ही साथ ही आम आदमी पार्टी को भी विधानसभा चुनाव से पहले झटका दे दिया.
  • एक महीने की लम्बी मशक़्क़त के बाद रविवार रात को नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया. महीने पहले किसी ने नहीं सोचा होगा कि गांधी परिवार अपने सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस तरह चुनौती देगा.
  • कांग्रेस पार्टी में आम राय है कि राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल से कांग्रेस कार्यसमिति के सभी सदस्य, सभी महासचिव, प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, विधायक दल के नेता, सांसद, सभी फ्रंटल संस्थाएं और राज्यों के कांग्रेस के अधिकारिक ट्विटर हैंडलस को फ़ॉलो करना चाहिए. राहुल गांधी के इस फ़ैसले का दूसरा पहलू यह भी है कि वह हमेशा स्वयं को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाना चाहते हैं, जो सभी की सुनते है, सबसे राय मशविरा करते हैं और उसके बाद ही कोई फ़ैसला लेते हैं.
  • पांच राज्यों के चुनावी नतीजे हमारे सामने हैं. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने अपना क़िला सुरक्षित रखा, केरल के वामपंथी भी अपना एक मात्र गढ़ सुरक्षित रखने में सफल रहे. असम में बीजेपी ने भगवा झंडा फिर फहराया तो, डीएमके दस वर्षों के बाद सत्ता पर दोबारा क़ाबिज़ हुई. भाजपा गठबंधन ने पुडुचेरी कांग्रेस से छीन लिया लेकिन इन सबके बीच यह बात दीगर रही कि कांग्रेस को लोगों ने नकार दिया.
  • यह मेरी समझ से बाहर है कि टीआरपी के हिसाब से जिस चैनल को सिर्फ दो फ़ीसदी लोग ही देखते हो, उसे सरकार बैन कर रही है. याद नहीं आता कि भारतीय राजनीति में आयरन लेडी के नाम से शुमार इंदिरा गांधी के बाद कभी किसी और सरकार ने मीडिया पर इस तरह प्रतिबंध नहीं लगाया हो.

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