NDTV Khabar
होम | ब्लॉग

ब्लॉग

विचार
  • राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर के लिए जमीन 9 गुना दाम पर क्यों खरीदी?
    रवीश कुमार
    गणित में कमज़ोर होने के कारण तय नहीं कर पा रहा हूं कि कौन सी ख़बर बड़ी है. राम का नाम जुड़ा होने का कारण 5 मिनट में ज़मीन की कीमत 2 करोड़ से 18 करोड़ हो गई, ये ख़बर बहुत बड़ी है या पंजाब नेशनल बैंक ने अपनी कंपनी के 4000 करोड़ के शेयर एक दूसरी कंपनी को दे दिए, ये खबर बड़ी है. या तीसरी ख़बर इन दोनों से भी बड़ी है कि भारतीय बैंकों को 5000 करोड़ से अधिक का चूना लगाकर भारत से भाग गए बड़ोदरा के कारोबारी संदेरसा ने तेल कंपनी बनाकर भारत की सरकारी कंपनियों को पांच हज़ार करोड़ का कच्चा तेल एक दूसरी कंपनी के ज़रिए बेच दिया. तो आपको तय करना है 18 करोड़ का कथित घोटाला, 4000 करोड़ और 5000 करोड़ का कथित घोटाला इन तीनों में से कौन बड़ा है. तय करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आस्था की कोई कीमत नहीं होती. काफी समय तक सोचता रहा कि कहां से शुरू करूं. राम मंदिर के लिए ज़मीन ख़रीदने का एक मामला सामने आया है जिसके कई किरदार मामला सामने आने के बाद सामने नहीं आ रहे हैं. अगर कुछ गड़बड़ नहीं है तो सौदा में शामिल कई किरदार मीडिया के सामने क्यों नहीं आते? जिस मंदिर का भूमि-पूजन सबके सामने हुआ, एक एक बात पूरे देश को बताई गई, उस मंदिर के लिए ज़मीन के मामले से जुड़े किरदार पर्दे के पीछे क्यों छिपे रहे.
  • अचानक से ही जितिन प्रसाद के ब्राह्मण नेता का नैरेटिव गढ़ने के क्या मायने हैं?
    मनीष शर्मा
    क्या प्रदेश की जनता के करीब 11 प्रतिशत ब्राह्म्ण योगी से नाखुश हैं? आप जमीन पर किसी शर्मा, त्रिपाठी, मिश्रा, गौड, तिवारी से बात कीजिए, तो सब साफ हो जाएगा. ये तमाम लोग योगी के होने भर से ही गद्गद हैं. ब्राह्म्णों का बहुत बड़ा वर्ग योगी के लिबास और विचारों से सुकून पाता है. पिछले पांच सालों में प्रदेश के गांव-गांव और शहर-शहर योगी  की लोकप्रियता कई गुना बढ़ी है
  • मुकुल राय की वापसी के मायने...
    मनोरंजन भारती
    पश्चि‍म बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में मुकुल राय के वापसी की खबरें उसी दिन से आने लगी थीं जब तृणमूल कांग्रेस के नंबर 2 अभिषेक बनर्जी उनकी बीमार पत्नी से मिलने कोलकाता के एक अस्पताल में गए थे. हांलांकि इस खबर के आने के बाद प्रधानमंत्री ने खुद मुकुल राय को फोन किया था. मगर लगता है कि उससे बात नहीं बनी.
  • मृत्यु ही अंतिम सत्य, अंतिम सत्य छुपाती सरकार
    रवीश कुमार
    अक्सर आपने देखा होगा कि क्लास रुम में जो छात्र होमवर्क कर नहीं जाता है वो इसी जुगाड़ में रहता है कि मास्टर की नज़र उस पर न पड़े और जल्दी कक्षा ख़त्म होने की घंटी बज जाए. लगता है सरकार की भी यही हालत हो गई है. गोदी मीडिया कोशिश तो कर रहा है कि डिबेट का कोई ऐसा टॉपिक मिल जाए कि नया हंगामा खड़ा हो, जनता उसमें उलझ जाए मगर हो नहीं पा रहा है.
  • सॉरी PM, ऑक्सीजन संकट अकल्पनीय नहीं था
    रवीश कुमार
    यह सही है कि इस साल जैसा ऑक्सीजन की सप्लाई का संकट पहले कभी नहीं हुआ लेकिन यह भी सही है कि इसी सरकार के कार्यकाल में भारत के तीन राज्यों में ऑक्सीजन का संकट हुआ था. हमने उन दुर्घटनाओं से क्या सिखा, ऑक्सीजन की सप्लाई चेन को पहले से कितना बेहतर बनाया यह सब पूछना बेकार है क्योंकि ढंग से एक जगह से कोई जवाब नहीं मिलता है.
  • मोदी सरकार की वैक्सीन नीति पर उठते सवाल...
    कोरोना महामारी से हो रही मौतों और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली के साथ नरेन्द्र मोदी सरकार की वैक्सीन नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं. 3 जून को सुनवाई करते हुए जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने मोदी सरकार को फटकारते हुए वैक्सीन नीति का पूरा हिसाब किताब देने का आदेश दिया था. राज्य सरकारों को वैक्सीन खरीदने का दबाव बनाने वाली नीति का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आम बजट में कोरोना से निपटने के लिए आवंटित 35 हजार करोड़ का वैक्सीनेशन के लिए इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया?
  • जितिन प्रसाद का कदम, कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी की खराब स्थिति का संकेत
    वीर सांघवी
    आंतरिक कलह पर काफी लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया. कांग्रेस के सामने असली खतरा विशेषाधिकार प्राप्त कुलीनों और यहां तक कि बीजेपी से भी नहीं है. असली खतरा उसके नेतृत्व द्वारा पार्टी को संभाल पाने की अक्षमता है.
  • जितिन बीजेपी के लिए कितने बड़े प्रसाद हैं?
    प्रियदर्शन
    जितिन प्रसाद अब आधिकारिक तौर पर बीजेपी में हैं. मन से वे शायद पहले से बीजेपी से जुड़ चुके थे. पिछले कुछ दिनों से वे अपनी ब्राह्मण पहचान पर अतिरिक्त ज़ोर दे रहे थे और उन्होंने ब्राह्मण चेतना मंच भी बना डाला था. बीजेपी अब उनमें कद्दावर सामाजिक नेता देख रही है. बताया जा रहा है कि उनके आगमन से बीजेपी से नाराज़ चल रहे ब्राह्मण फिर पार्टी की ओर मुड़ सकते हैं.
  • पल्स पोलियो अभ‍ियान से कोरोना टीकाकरण की तुलना क्यों?
    रवीश कुमार
    राष्ट्र के नाम संदेश. संदेश भले राष्ट्र के नाम पर था, था दरअसल प्रधानमंत्री के नाम ही. और उनके नाम संदेश यह था कि अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए तथ्यों को इधर-उधर कर तर्क गढ़ने से भले ग़लती छिप जाती है लेकिन हमेशा के लिए ओझल नहीं होती है. जब जब पर्दा हटता है तब तब ग़लती दिखाई दे जाती है. राष्ट्र के नाम संदेश से यही हुआ.
  • जितिन प्रसाद के जरिये बीजेपी ने साधे एक तीर से कई निशाने 
    अखिलेश शर्मा
    BJP को अगर मिशन 2022 में कामयाब होना है तो वह ब्राह्मणों की उपेक्षा नहीं कर सकती. इस समुदाय का पिछले तीन चुनावों से पार्टी को जमकर समर्थन मिला है. राज्य में उनकी संख्या 10 प्रतिशत से भी अधिक है और चुनाव परिणाम तय करने में उनकी एक बड़ी भूमिका होती है.
  • जितिन प्रसाद चले गए, सचिन पायलट बेचैन और देख रही कांग्रेस 
    सिंधिया, प्रसाद, पायलट औऱ मिलिंद देवड़ा सभी विरासत में मिली राजनीति के चेहरे हैं और जिन्हें अगली पीढ़ी के उन नेताओं में गिना जाता है, जो राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के करीबी रहे हैं. पिछले दो सालों में उनके बीच समीकरण ठीक नहीं रहे हैं. बहरहाल, गांधी चुनाव राजनीति में अकेले कोई छाप छोड़ने में असफल रहे हैं. यही वजह है कि दो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा.
  • एक राह जो ले जाती है प्रकृति से स्वयं की ओर
    अगर यह चेतना ईश्वर है तो यही ज्ञात होता है कि ईश्वर भी सर्वव्यापी है. वह फूलों, पेड़ों, जानवरों, नदियों, हवाओं, बादलों की गर्जन में, चिड़ियों के गीतों में, बहार में, मोर के नृत्य में, हम सभी में है. हम सभी परस्पर हैं.
  • समाज का पतन देखिए, उसमें सवाल पूछने की हिम्‍मत ही नहीं बची है
    रवीश कुमार
    ढाई महीने के इस जनसंहारी दौर की हर बात रिकॉर्ड करनी चाहिए. उम्मीद थी कि हर तबका मिलकर इलाज की सरकारी व्यवस्था को मुकम्मल करने के लिए दबाव बनाएगा. इन ढाई महीनों की ग़लतियों पर बात करेगा, जवाबदेही तय करेगा ताकि आगे कुछ न हो. लेकिन दो हफ़्ते न बीते, लोग वहीं घूम फिर कर पहुँच गए हैं. कितने लोग मरे किसी को पता नहीं.
  • बंद हो गए जब झूठ के सारे दरवाज़े, दोष राज्यों पर मढ़ चले प्रधानमंत्री
    रवीश कुमार
    ईमानदारी की नहीं. टीके को लेकर शुरू से झूठ बोला गया. बिना टीके के आर्डर के दुनिया का सबसे बड़ा टीका अभियान बताया गया. जब झूठ के सारे दरवाज़े बंद हो गए, तब प्रधानमंत्री ने भाषण के पतले दरवाज़े से अपने लिए निकलने का रास्ता बना लिया.
  • प्रधानमंत्री जी, राज्यों की नहीं, अपनी बात कीजिए
    रवीश कुमार
    टीकाकरण के अभियान की पूरी जिम्मेदारी अब भारत सरकार उठाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि 21 जून से राज्यों की खरीद का 25 प्रतिशत हिस्सा भी केंद्र खरीदकर राज्यों को देगा. 18 साल से ऊपर के सभी को मुफ्त दिया जाएगा. प्राइवेट अस्पतालों का 25 प्रतिशत कोटा बरकरार रहेगा लेकिन 150 से अधिक सर्विस चार्ज नहीं ले सकेंगे.
  • ट्विटर विवाद : क्योंकि भारत नाइजीरिया नहीं है
    अखिलेश शर्मा
    कल रात ट्विटर पर एक बड़ी खबर आई. फ्रांस की समाचार एजेंसी एएफपी ने ब्रेकिंग न्यूज चलाई कि नाइजीरिया ने अनिश्चितकाल के लिए ट्विटर पर प्रतिबंध लगा दिया है. पता चला कि ट्विटर ने वहां के राष्ट्रपति मुहम्मद बुहारी का एक ट्वीट कुछ समय के लिए हटा दिया था. इस ट्वीट में राष्ट्रपति ने देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से के उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात की थी जिन पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. कई लोगों ने इस ट्वीट की शिकायत की थी और इसे ट्विटर की एब्यूजिव बिहेवियर नीति का उल्लंघन माना था जिसके बाद ट्विटर ने उनका ट्वीट हटा दिया. जिसके बाद नाइजीरिया ने यह कार्रवाई की. सरकार के फैसले के तुरंत बाद ट्विटर की साइट पर रोक लग गई और लोग ट्वीट नहीं कर पाए. वहां ट्विटर बहुत लोकप्रिय है. उसके करीब चार करोड़ यूजर हैं.
  • ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या क्यों नहीं बताती है सरकार?
    रवीश कुमार
    ब्लैक फंगस की बीमारी के मामले न सिर्फ बढ़ते जा रहे हैं बल्कि इसके इंजेक्शन को हासिल करना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. लेकिन अधिकृत रूप से आपको नहीं बताया जाता है कि भारत में ब्लैक फंगस के कितने मरीज़ हैं. जबकि सरकार ने इसे महामारी के रूप में नोटिफाई किया है. मतलब किसी प्राइवेट डॉक्टर के पास भी ब्लैक फंगस का मरीज़ आएगा तो उसे सरकार को बताना होगा. जब यह महामारी है तब केंद्र सरकार हर दिन क्यों नहीं बताती है कि ब्लैक फंगस के मरीज़ों की संख्या कितनी है.
  • राहुल गांधी ने क्यों बदली ट्विटर की रणनीति?
    कांग्रेस पार्टी में आम राय है कि राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल से कांग्रेस कार्यसमिति के सभी सदस्य, सभी महासचिव, प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, विधायक दल के नेता, सांसद, सभी फ्रंटल संस्थाएं और राज्यों के कांग्रेस के अधिकारिक ट्विटर हैंडलस को फ़ॉलो करना चाहिए. राहुल गांधी के इस फ़ैसले का दूसरा पहलू यह भी है कि वह हमेशा स्वयं को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाना चाहते हैं, जो सभी की सुनते है, सबसे राय मशविरा करते हैं और उसके बाद ही कोई फ़ैसला लेते हैं.
  • अप्रैल-मई के दो महीने, जब जिंदगी की गरिमा ही नहीं बची
    रवीश कुमार
    दो महीने तक आपने देखा कि किसी की ज़िंदगी की कोई गरिमा नहीं बची थी. आम आदमी हो या मुग़ालते में रहने वाले रसूख़दार लोग. सब अस्पताल में बेड खोज रहे थे और ऑक्सीजन का सिलेंडर तक हासिल नहीं कर पा रहे थे. इस अंजाम से गुज़रने के बाद भी अगर आग़ाज़ नया नहीं होगा तो फिर से वही अंजाम होगा. गुजराती अख़बारों और भास्कर समूह ने तमाम राज्यों से मौत के आंकड़े को छिपाने का जो खेल पकड़ा है उसे कुछ अंग्रेज़ी अख़बार भी सीख रहे हैं.
  • प्रशांत किशोर के 'संन्यास की घोषणा' के बाद अब आगे क्या? नयी चुनौती के क्या होंगे मायने?
    मनीष कुमार
    2 मई को, जब पांच राज्यों के परिणाम घोषित किए गए, तो प्रशांत किशोर को न केवल बंगाल की जीत, बल्कि तमिलनाडु की जीत के लिए भी क्रेडिट मिला, जहां उन्होंने एमके स्टालिन के साथ काम किया था, जो 68 साल की उम्र में पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं. उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि अभियान को अंजाम देना मुश्किल था क्योंकि प्रशांत किशोर ने खुद को बंगाल में ट्रांसप्लांट कर लिया था;
12345»

Advertisement

 
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com