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21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल
- Friday January 2, 2026
वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.
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"असली धुरंधरों" को महसूस, आत्मसात, अनुसरण करने, सम्मान देने की जरूरत
- Friday January 2, 2026
सिनेमा संदेश ही दे सकता है, इसे ग्रहण करना, आत्मसात करना समाज के ऊपर है! ISI करीब 77 साल पहले अपनी स्थापना (1 जनवरी, 1948) के बाद से ही भारत के खिलाफ 'अलग-अलग तरह के युद्ध' छेड़े हुए है. ऐसे-ऐसे युद्ध, जिनकी आप एक बार को कल्पना भी नहीं कर सकते
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सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में गंदे पानी से 11 मौत: लीक सीवेज, टेंडर में देरी, शिकायतों की अनदेखी- NDTV की पड़ताल
- Friday January 2, 2026
सूत्रों के मुताबिक, भागीरथपुरा की पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए अगस्त 2025 में ही ₹2.40 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था, जिसमें गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतों का जिक्र था. लेकिन न टेंडर खोला गया, न काम शुरू हुआ.
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सैलाब में खो गया सुकून... कोविड के बाद अचानक 'घुमक्कड़' कैसे हो चली जिंदगी?
- Wednesday December 31, 2025
कोरोना के बाद भारत में एक नई आदत नहीं, बल्कि एक नई मानसिकता पैदा हुई है. 'अब नहीं तो कभी नहीं' की मानसिकता. लॉकडाउन ने लोगों से सिर्फ आजादी नहीं छीनी थी, उसने समय का भरोसा भी छीन लिया था. नतीजा यह हुआ कि जैसे ही पाबंदियां हटीं, लोग घरों से नहीं, बल्कि भीतर जमी हुई बेचैनी से बाहर निकले.
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QS 2026: भारतीय विश्वविद्यालयों की हरित प्रगति, सरकार की पहल का क्या असर?
- Monday December 29, 2025
- Dr. Monu Singh Rajawat
QS रैंकिंग में दुनियाभर के विश्वविद्यालयों को शामिल किया जाता है. इस बार की रैंकिंग में आईआईटी रुड़की, बीएचयू जैसे संस्थानों को दर्जा मिला है.
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अरावली कटी तो आएंगे कई देश जद में... ये मुद्दा सिर्फ राजस्थान का थोड़ी है
- Wednesday December 24, 2025
अरावली का मुद्दा जंगल बनाम विकास की बहस का है ही नहीं. यह उस सोच की परीक्षा है, जो मानती है कि पहाड़ काटे जा सकते हैं, हवा बांटी जा सकती है और पानी को फाइलों में सीमित किया जा सकता है. अरावली पर चला हर बुलडोजर सिर्फ अलवर या गुरुग्राम की जमीन नहीं छीलता, वह दक्षिण एशिया की साझा सांसों पर असर डालता है.
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विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे... दीवार से देह निकल गई, शब्दों की खिड़की से रोशनी आती रहेगी
- Wednesday December 24, 2025
- Priyadarshan
विनोद कुमार शुक्ल लिख और छप तो सातवें दशक से रहे थे और अपनी सहज प्रयोगशीलता के साथ रचनाकर्म को बरत रहे थे, लेकिन कीर्ति संभवतः उन्हें कुछ देर से मिली. सत्तर और अस्सी के दशक बहुत ऊंची आवाज़ में सुनाई पड़ने वाली जनपक्षधर कविताओं के थे जिनके बड़े नायक नागार्जुन, त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल जैसे कवि थे.
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कांग्रेस में फिलहाल कोई वैकेंसी नहीं, राहुल और प्रियंका एक ही हैं
- Tuesday December 23, 2025
- Manoranjan Bharti
राहुल वैसे नेता हैं जो खुद खूब मेहनत करते हैं और अपने नेताओं से भी वही उपेक्षा करते है. भले ही उनके पास कोई अहमद पटेल जैसा राजनैतिक सूझबूझ वाला व्यक्ति नहीं है. उनकी अपनी एक युवा टीम है जो अपने ढंग से पार्टी चला रही है और उसे ही यह जवाब देना है कि पार्टी का प्रदर्शन सुधर क्यों नहीं रहा.
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जब अदालतें पहाड़ तय करने लगें... अरावली पर SC के 100 मीटर वाले फैसले की असहज करने वाली सच्चाई
- Wednesday December 24, 2025
- Bhavreen Kandhari
क्या पहाड़ियों और पर्वत प्रणालियों की वैज्ञानिक परिभाषा तय करना सुप्रीम कोर्ट का काम है? पर्यावरण संरक्षण में भारतीय न्यायपालिका की भूमिका ऐतिहासिक रही है, खासकर अनुच्छेद 21 के तहत, जहां उसने कार्यपालिका की निष्क्रियता के बीच हस्तक्षेप किया है.
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अब चुनावी वादों को चुनाव घोषणा पत्र से जमीन पर उतारना पड़ता है, क्या है नीतीश के 'सात निश्चय-3'
- Tuesday December 16, 2025
- Sanjeev Kumar Mishra
चुनाव के दौरान की जाने वाली घोषणाओं पर उन पर जमीन पर होने वाले क्रियान्वयन को लोग किस तरह से देखते हैं, बता रहे हैं संजीव कुमार मिश्र.
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'जिन्ना के चश्मे से देखने वालों ने वंदे मातरम के पदों को जानबूझकर भूलाया', संसद में बोले राजनाथ सिंह
- Monday December 8, 2025
Winter Session of Parliament: लोकसभा में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर सोमवार को विशेष बहस हुई, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के भी कई नेताओं ने अपनी बातें रखी. यहां पढ़ें संसद में वंदे मातरम पर चली महाबहस की पल-पल के अपडेट.
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वह वाक्य जो फिसलकर गिर पड़ा... क्या सिर्फ हास्य था, या सदियों से चली आती किसी छिपी हुई सीढ़ी का चरमराना?
- Tuesday December 23, 2025
हर आदमी की दो मौतें होती हैं. एक जब वह सच को देखता है, और दूसरी जब सच उसे देख लेता है. आज सच ने सदन को देख लिया. तारीफ तब तक तारीफ नहीं होती, जब तक उसमें बराबरी का स्पर्श न हो.
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21वीं सदी के 25 साल, कितने कमाल-कितने मलाल
- Friday January 2, 2026
वैसे इन पच्चीस वर्षों में जितने त्वरित बदलाव दिख रहे हैं, उतने ही ज़िद्दी ठहराव भी नज़र आ रहे हैं. जिन बीमारियों को हम उन्नीसवीं सदी में ख़त्म मान ले रहे थे, वे इक्कीसवीं सदी में प्रगट हो रही हैं. जिन बहसों को बीती सदी में बीत जाना चाहिए था, वे नई धमक के साथ मौजूद हैं.
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- Friday January 2, 2026
सूत्रों के मुताबिक, भागीरथपुरा की पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए अगस्त 2025 में ही ₹2.40 करोड़ का टेंडर जारी किया गया था, जिसमें गंदे और बदबूदार पानी की शिकायतों का जिक्र था. लेकिन न टेंडर खोला गया, न काम शुरू हुआ.
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अरावली कटी तो आएंगे कई देश जद में... ये मुद्दा सिर्फ राजस्थान का थोड़ी है
- Wednesday December 24, 2025
अरावली का मुद्दा जंगल बनाम विकास की बहस का है ही नहीं. यह उस सोच की परीक्षा है, जो मानती है कि पहाड़ काटे जा सकते हैं, हवा बांटी जा सकती है और पानी को फाइलों में सीमित किया जा सकता है. अरावली पर चला हर बुलडोजर सिर्फ अलवर या गुरुग्राम की जमीन नहीं छीलता, वह दक्षिण एशिया की साझा सांसों पर असर डालता है.
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विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे... दीवार से देह निकल गई, शब्दों की खिड़की से रोशनी आती रहेगी
- Wednesday December 24, 2025
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क्या पहाड़ियों और पर्वत प्रणालियों की वैज्ञानिक परिभाषा तय करना सुप्रीम कोर्ट का काम है? पर्यावरण संरक्षण में भारतीय न्यायपालिका की भूमिका ऐतिहासिक रही है, खासकर अनुच्छेद 21 के तहत, जहां उसने कार्यपालिका की निष्क्रियता के बीच हस्तक्षेप किया है.
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- Tuesday December 16, 2025
- Sanjeev Kumar Mishra
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- Monday December 8, 2025
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