केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश विधानसभा भंग करने और राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने की सिफारिश की है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह तय किया गया।
कैबिनेट ने राष्ट्रपति से सिफारिश की कि राज्य विधानसभा भंग की जाए और केंद्रीय शासन की अवधि 30 अप्रैल के बाद भी जारी रहे।
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन की रिपोर्ट के बाद यह फैसला किया गया। उन्होंने राज्य के मौजूदा हालात के बारे में केन्द्र को जानकारी दी थी।
आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के फैसले की अनिवार्य पुष्टि के लिए संसद में जाने से पहले केन्द्र सरकार को और दो महीने मिलने में कैबनेट का फैसला मदद कर सकता है।
आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा कि लोकसभा चुनाव के नौ चरणों वाले मतदान में अब तीन और चरण रह गए हैं। ऐसे में राष्ट्रपति शासन के फैसले की पुष्टि के लिए संसद सत्र बुलाना मुश्किल है, क्योंकि ज्यादातर सांसद चुनाव में व्यस्त हैं।
राष्ट्रपति शासन के फैसले की पुष्टि संसद द्वारा दो महीने के भीतर होनी चाहिए। आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन 1 मार्च को लगाया गया था।
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