
जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने को लेकर मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच शह और मात का खेल शुरू हो गया है। बीजेपी के संगठन महासचिव राम माधव ने आज राजभवन में राज्यपाल एनएन वोहरा से मुलाकात की, और लगभग आधा घंटे चली इस मुलाकात के बाद सियासी पारा एकाएक चढ़ गया है।
पिछले हफ्ते राज्यपाल ने पीडीपी और बीजेपी को 1 जनवरी तक सरकार बनाने को लेकर मीटिंग के लिए बुलावा भेजा था। इसी सिलसिले में पीडीपी की महबूबा मुफ्ती बुधवार को जम्मू में राज्यपाल से मुलाकात करेंगी और सरकार बनाने को लेकर अपनी पार्टी की कोशिशों की जानकारी देंगी, जबकि बीजेपी को राज्यपाल ने गुरुवार एक बजे का वक्त दिया है, लेकिन तय कार्यक्रम से पहले राम माधव की राज्यपाल से मुलाकात को बेहद अहम मन जा रहा है।
गौरतलब है कि राम माधव सोमवार से ही जम्मू में डेरा डाले हुए हैं और पार्टी नेताओं के साथ उनकी कई दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि पार्टी नेता उनकी मुलाकात के बारे में खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन समझा जा रहा है कि राम माधव पार्टी हाईकमान का कोई सन्देश लेकर राज्यपाल से मिले हैं। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब कांग्रेस की तरफ से पीडीपी और फारुख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ मिलकर महागठबंधन की सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। पीडीपी की तरफ से भी महागठबंधन को लेकर उत्साह दिखने के बाद बीजेपी कैम्प में खलबली मच गई है।
प्रदेश अध्यक्ष जुगल किशोर ने तो ऐसे किसी भी गठजोड़ को जनादेश के साथ धोखा करार दिया है। कच्ची छावनी स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में जुगल किशोरी ने साफ कह दिया कि बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने की विरोधी दलों की कोशिश जनता को स्थिर और स्थायी सरकार नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने को लेकर बीजेपी हाईकमान की तरफ से कोशिशें जारी हैं और पार्टी का प्रस्ताव वह राज्यपाल को 1 जनवरी को सौंप देंगे। प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलों को विराम देते हुए कहा कि नई सरकार के गठन के लिए 19 जनवरी तक का वक्त राज्यपाल के पास है और उम्मीद जताई कि तब तक कोई न कोई सियासी हल निकल जाएगा।
87 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीडीपी के 28, बीजेपी के 25, नेशनल कांफ्रेंस के 15 और कांग्रेस के 12 सदस्य हैं। 23 दिसंबर को हुई वोटों की गिनती में बहुमत के लिए ज़रूरी 44 के आंकड़े तक कोई दल नहीं पहुंच पाया, जिसके बाद प्रदेश में गठबंधन सरकार को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। माना जा रहा है कि जम्मू में ज़बरदस्त सफलता के बाद प्रदेश को पहला हिन्दू मुख्यमंत्री देने के अपने वादे को साकार करने के लिए बीजेपी कश्मीर घाटी की दोनों अहम पार्टियों - पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस - से डील पर काम कर रही है, लेकिन पीडीपी पूरे छह साल के लिए अपना सीएम बनाने की मांग पर अड़ी हुई है, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस को बीजेपी से हाथ मिलाने पर घाटी के मुस्लिम वोटरों की नाराज़गी का डर सता रहा है।
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