
चुनाव आयोग ने आज भाजपा नेता अमित शाह के उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में प्रचार करने पर लगी रोक को हटा लिया। इससे पहले शाह ने भरोसा दिलाया कि वह लोक शांति और कानून-व्यवस्था को बाधित नहीं करेंगे।
आयोग ने एक आदेश में कहा कि शाह को जनसभाएं करने, रैलियां निकालने और रोड शो करने तथा जुलूस निकालने की इजाजत दी गई है।
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के निकट सहयोगी शाह के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि वह उत्तर प्रदेश में भाजपा के प्रभारी हैं।
चुनाव आयोग ने ‘बदला लेने वाले’ शाह के विवादास्पद बयान के कारण उनके चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी। उनके साथ सपा के नेता और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान के चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाई गई थी।
आयोग ने अपने आदेश में कहा, 'आपने अपने हलफनामे में कहा है कि आप शपथ लेते हैं कि मैं प्रचार के दौरान कोई आपत्तिजनक अथवा अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करूंगा और किसी भी तरह से आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करूंगा।'
गौरतलब है कि भड़काऊ भाषण देने के बाद आयोग ने शाह की चुनावी रैलियों और भाषण पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही अखिलेश सरकार में मंत्री आजम खान की रैलियों पर भी रोक लगा दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक आजम खान को अभी यह राहत नहीं दी गई है।
इन दोनों नेताओं ने ही भड़काऊ भाषण दिए थे, जिनकी चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी। दोनों के भाषणों की जांच करने के बाद आयोग ने इनके रैली करने पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ एफआईआर दर्ज करने का भी आदेश दिया था।
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