
नरेंद्र मोदी के कथित 'तानाशाही वाले रवैये' से सहयोगी दलों में विरोध पैदा होने की बात का खंडन करते हुए बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऐसी सूरत में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर कोई 'स्वीकार्य' समझौता निकालने का सवाल ही नहीं है।
एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा चुनाव बाद नरेंद्र मोदी का समर्थन की घोषणा का हवाला देते हुए राजनाथ सिंह ने इसे 'अकारण' बताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना के साथ बीजेपी का संबंध कभी नहीं टूटने वाला है।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, शिवसेना के साथ हमारी पुरानी दोस्ती है और यह भविष्य में भी बनी रहेगी। आजकल कई पार्टियां मोदी का नाम ले रही हैं। ओ भाई, आप अपने अकारण समर्थन की हमें पेशकश क्यों कर रहे हैं? आप या तो एनडीए में शामिल हो सकते हैं या बीजेपी में विलय हो सकते हैं। एमएनएस का नाम लिए बगैर सिंह ने कहा कि किसी को भी लोगों को गुमराह नहीं करना चाहिए।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, नरेंद्र मोदी बीजेपी नीत एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। यदि हम सत्ता में आते हैं, तो समझौते के रूप में प्रधानमंत्री पद का कहीं अधिक स्वीकार्य उम्मीदवार खोजने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
राजनाथ से यह पूछा गया था कि मोदी की कथित 'तानाशाही वाले सोच' को लेकर क्या एनडीए के कुछ घटक दल प्रधानमंत्री पद के लिए उनके नाम का विरोध कर सकते हैं। उन्होंने कहा, यदि उनका रवैया तानाशाही वाला है, तो वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लोकप्रियता के साथ नहीं चुने जाते।
उन्होंने एनडीए के सत्ता में आने पर पार्टी नेता अरुण जेटली के उप प्रधानमंत्री बनने की बातों को सिरे से खारिज कर दिया। राजनाथ ने बताया कि एनडीए का समर्थन करने वाली पार्टियों की संख्या बढ़कर 25 पहुंच गई है, शामिल होने वाला नया दल टीडीपी है।
यह पूछे जाने पर कि क्या मोदी एनडीए के सभी घटक दलों को साथ रख पाएंगे और अटल बिहारी वाजपेयी की तरह सरकार चला पाएंगे, राजनाथ सिंह ने कहा कि मोदी के तहत गठबंधन सरकार में कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने कहा, दोनों लोगों के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती। अटल जी, अटल जी हैं और मोदी, मोदी हैं।
बीजेपी अध्यक्ष ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पार्टी के घोषणापत्र में जिक्र सभी मुद्दे भारतीय संविधान के दायरे में हैं। राजनाथ ने बीजेपी महासचिव अमित शाह का बचाव किया और यह आरोप खारिज कर दिया कि उत्तर प्रदेश में एक चुनाव रैली के दौरान की गई उनकी हालिया टिप्पणी में सांप्रदायिक सुर था।
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