नौकरी के हालात
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कफाला सिस्टम! खत्म हुई सऊदी अरब की गुलामी परंपरा, कैसे भारतीयों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
- Thursday October 23, 2025
- Written by: रिचा बाजपेयी
अब भारतीय मजदूरों को नौकरी बदलने या देश छोड़ने में अधिक स्वतंत्रता और सुरक्षा मिलेगी. शोषण और पासपोर्ट जब्त करने जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है. इससे भारतीय श्रमिकों के कामकाजी हालात और जीवन स्तर दोनों में सुधार संभव है.
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न जॉब, न इनकम... नेपाल में हिंसा भड़कने के पीछे कहीं बेरोजगारी तो नहीं?
- Thursday September 11, 2025
- Reported by: Dev Kumar, Edited by: श्वेता गुप्ता
ओडिशा सरकार ने ओडिशा स्पेशल अरमेंड पुलिस में भर्ती निकली है. इस सरकारी नौकरी के लिए 3000 से ज्यादा नेपाली छात्र झारसुगुड़ा पहुंचे हैं. हैरानी की बात यह है कि वेकेंसी सिर्फ 135 हैं. इससे नेपाल के युवाओं के हालात को आसानी से समझा जा सकता है.
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'युद्धग्रस्त इजराइल जाने के लिए ये लंबी-लंबी कतारें क्यों...." : प्रियंका ने PHOTO शेयर कर BJP से पूछा सवाल
- Tuesday January 30, 2024
- Reported by: भाषा
प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर कहीं पर युद्ध के हालात हैं तो सबसे पहले हम अपने नागरिकों को वहां से बचाकर, वापस अपने वतन लाते हैं, लेकिन बेरोजगारी ने आज ये हाल कर दिया है कि देश की सरकार हजारों असहाय और मजबूर युवाओं को युद्धग्रस्त इजराइल जाकर ये खतरा उठाने से भी बचा नहीं रही.
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राशन लेने के लिए नहीं यहां नौकरी के लिए हो रही धक्का-मुक्की, Walk-in Interview की भीड़ का ये Video देख पकड़ लेंगे सिर
- Saturday December 16, 2023
- Edited by: संज्ञा सिंह
एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात क्या हैं. वायरल वीडियो क्लिप में सैकड़ों नौकरी चाहने वाले एक कंपनी के वॉक-इन इंटरव्यू स्थल के बाहर जगह के लिए धक्का-मुक्की कर रहे हैं.
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महंगाई एक सच्चाई, नौकरी एक सपना, ऐसे कॉपी पेस्ट से बनेगा भारत विश्व गुरु?
- Tuesday April 5, 2022
- एनडीटीवी
सवाल यह भी है कि क्या सरकार के पास आर्थिक क्षमता बची है कि वह इन भर्तियों को पूरी करे? आखिर क्यों भर्तियों को लेकर इस तरह के हालात बने हुए हैं. अभी भी कई भर्तियां ऐसी हैं जिनकी सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है मगर महीनों से नियुक्ति पत्र नहीं मिल रहे हैं.
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पारिवारिक हालात के चलते नौकरी छोड़ने वाली महिलाओं के लिए राजस्थान सरकार लाई ‘बैक टू वर्क’ योजना
- Tuesday November 30, 2021
- Reported by: भाषा
जो महिलाएं कार्यस्थल पर जाने में सक्षम नहीं होंगी, उन्हें ''वर्क फ्रॉम होम'' (घर से काम)का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा. रोजगार से जुड़ने की इच्छुक महिलाओं को महिला अधिकारिता निदेशालय व सीएसआर संस्था के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए एकल खिड़ी प्रणाली की सुविधा विकसित की जाएगी.
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बचत का ब्याज निगेटिव, घट गई कमाई
- Thursday September 23, 2021
- रवीश कुमार
उन लोगों ने कभी कहा तो नहीं लेकिन उन्हें पता है कि उनका जीवन कैसे चल रहा है. रिश्तेदारों के व्हाट्सएप ग्रुप में बस यही पूछ लें कि बैंकों में बचत पर मिलने वाले ब्याज का क्या हाल है. वे प्याज़ का रोना रोने लगेंगे ताकि आपका ध्यान बंट जाए और इस सवाल का जवाब नहीं देना पड़े. ऐसे बहुत से लोग हैं जो बैंकों में बचत पर मिलने वाले ब्याज से अपना ख़र्च चलाते हैं. यह एक निश्चित सी कमाई होती है और ज़्यादातर मामलों में सीमित भी. अब अगर ये कमाई भी घटने लगे, माइनस में जाने लगे तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि गोदी मीडिया पर भारत को सुपर पावर बताने की होड़ क्यों मची है. इसीलिए ताकि आम लोगों की खस्ता आर्थिक हालात पर चर्चा न हो सके. जिस तरह से अच्छी नौकरी और अच्छी सैलरी के दिन चले गए उसी तरह से सुरक्षित बचत के भी दिन चले गए. या तो शेयर बाज़ार का खेल सीख लीजिए या फिर माइनस में जा रही कमाई को देखते रहिए. आपके पुराने सारे रास्ते बंद हो चुके हैं.
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दोस्तो, अच्छी सैलरी और अच्छी नौकरी के दिन चले गए
- Wednesday September 22, 2021
- रवीश कुमार
क्या आप जानते हैं कि कोरोना के इन पौने दो साल के दौरान स्कूल और कॉलेज की फीस कितनी बढ़ी है? हम भी नहीं जानते हैं. मान कर चला जा सकता है कि जो अमीर जनता सौ रुपये लीटर आराम से ख़रीद रही है वही अमीर जनता महंगी फीस भी आराम से ही दे रही होगी. जनता के बीच इतनी स्वीकृति है कि सरकार को अफसोस ही हो रहा होगा कि पेट्रोल का दाम 200 रुपये करना चाहिए था. हालात से हारी हुई जनता के बीच अगर न्यूज़ चैनलों के ऐंकर वीर रस में प्रदर्शन नहीं करते तो राष्ट्र आज कितना कमज़ोर लगता. इन एंकरों की बुलंद और बेशर्म आवाज़ ही इस वक्त हारे का सहारा है. एंकरों की ललकार न होती तो दर्शकों को ताकत की दवा न मिलती. बहुत दिनों के बाद बड़ों को कार्टून के रुप में न्यूज़ चैनल मिल गए हैं. जिस पर टॉम एंड जेरी का खेल चल रहा है . टॉम जेरी का पीछा कर रहा है और जेरी टॉम का. आप इस इंतज़ार में देखे जा रहे हैं कि टॉम को जेरी पकड़ेगा या जेरी को टॉम.
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सरकारी नौकरियों में भर्ती पर कोई प्रतिबंध नहीं, सर्कुलर के बाद केंद्र सरकार ने दी सफाई
- Saturday September 5, 2020
- Reported by: सुनील प्रभु, Translated by: सूर्यकांत पाठक
कोरोनो वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से उपजे आर्थिक संकट (Economic Crisis) के बीच व्यय विभाग ने सरकारी खर्च पर अंकुश लगाने के लिए शुक्रवार को सर्कुलर जारी किया. इसके एक दिन बाद केंद्र ने शनिवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में सरकारी नौकरियों (Government Jobs) के लिए भर्ती (Recruitment) या इनमें कटौती नहीं हो सकती है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के ट्वीट के कुछ घंटों के बाद यह स्पष्टीकरण आया है.
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कभी साइन बोर्ड पेंट किया करते थे राहत इंदौरी, हालात से लड़कर शायरी में हासिल की बुलंदी..
- Tuesday August 11, 2020
- Reported by: भाषा
उर्दू में ऊंची तालीम लेने के बाद इंदौरी एक स्थानीय कॉलेज में इस जुबान के प्रोफेसर बन गये थे. लेकिन बाद में उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और वह अपना पूरा वक्त शायरी और मंचीय काव्य पाठ को देने लगे थे.अपने 70 साल के जीवन में इंदौरी पिछले साढ़े चार दशक से अलग-अलग मंचों पर शायरी पढ़ रहे थे. उन्होंने कुछ हिन्दी फिल्मों के लिए गीत भी लिखे थे. लेकिन बाद में फिल्मी गीत लेखन से उनका मोहभंग हो गया.
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अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस की मार, IIT के ग्रेजुएटों के जॉब ऑफर ठंडे बस्ते में गए
- Wednesday April 22, 2020
- Written by: जे. सैम डेनियल स्टालिन, माया शर्मा, Translated by: सूर्यकांत पाठक
Coronavirus: अत्यधिक संक्रामक कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में 25 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया है. इसका दुनिया की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा है. विकास दर कम हो गई है, लाखों लोगों की नौकरी चली गई है. अब सामान्य खुशहाल हालात में लाए गए प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया जा रहा है. संक्रामक बीमारी ने भारत के प्रमुख संस्थानों - जैसे IIT और IIM के स्नातकों को भी नहीं बख्शा है. इन संस्थानों के ग्रेजुएटों को उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलने की गारंटी होती है.
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एक करोड़ का पैकेज भी होता होगा, लेकिन IIT वालों के लिए ज़मीनी हकीकत कुछ और है...
- Monday December 30, 2019
- अनुराग मेहरा
मीडिया में इस तरह के हालात की कुछ ख़बरें दिखती हैं, लेकिन सब छिप जाती हैं, जब एक करोड़ से ज़्यादा तनख्वाह वाली कोई नौकरी किसी को मिल जाती है. इस रिपोर्ट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के उस विद्यार्थी की बात की जाती है, जो कोर क्षेत्र में नौकरी करना चाहता था, लेकिन माता-पिता के ज़ोरदार दबाव में उसने बैंकिंग की नौकरी कबूल कर ली. एक और विद्यार्थी ने 30 लाख रुपये की पेशकश मिलने पर कहा, "लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझसे एक करोड़ रुपये वाले पैकेजों के बारे में कहा था, जिनके बारे में उन्होंने पढ़ा है..."
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कश्मीर की झूठी तस्वीर पेश कर रही मोदी सरकार, सब कुछ ठीक तो फिर कर्फ्यू क्यों : दिग्विजय सिंह
- Friday September 13, 2019
- Reported by: IANS, Edited by: सूर्यकांत पाठक
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि कश्मीर में स्थिति सामान्य है, लेकिन यदि सब कुछ सामान्य होता तो वहां कर्फ्यू जैसे हालात नहीं होते. गोवर्धन परिक्रमा करने आए दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, "कश्मीर अतिसंवेदनशील मुद्दा है. इसका समाधान वाजपेयी के फार्मूले पर ही होना चाहिए. कश्मीर पर सरकार झूठी तस्वीर पेश कर रही है. वहां अगर सब कुछ सामान्य होता तो कर्फ्यू क्यों लगता."
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जम्मू-कश्मीर के हालात पर नौकरी छोड़ने वाले IAS के इस्तीफे के पीछे की वजह 'दुर्व्यवहार, ड्यूटी नहीं करने' पर मिला नोटिस तो नहीं?
- Wednesday September 11, 2019
- आईएएनएस
अब यह तथ्य सामने आया है कि आईएएस अधिकारी के इस्तीफा देने से पहले उन्हें आठ जुलाई को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों दमन एवं दीव और दादरा एवं नगर हवेली ने उनके मामले में गृह मंत्रालय को उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव भेजा था. केरल से एजीएमयूटी कैडर के 2012 बैच के अधिकारी को दादरा एवं नगर हवेली में बिजली एवं गैर पारंपरिक ऊर्जा विभाग के सचिव के रूप में तैनात किया गया था.
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कश्मीर का टॉनिक पीकर फार्म भरने में मदहोश हिन्दी प्रदेश का युवा
- Wednesday August 28, 2019
- रवीश कुमार
कश्मीर में 20 दिन से संचार व्यवस्था ठप होने को सही ठहराने के नशे में भूल गया है कि वही राज्य उसके साथ भी कश्मीर की तरह बर्ताव कर रहा है. परीक्षा की मामूली त्रुटियों की सुनवाई नहीं है. सब जगह जा रहा है, मगर कोई सुन नहीं रहा है. संचार व्यवस्था से खुद वंचित है. पहले इन्हें हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का कोर्स कराया गया और अब ये खुद भी उसी ज़ुबान में अपने हालात बयान करने लगे हैं.
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कफाला सिस्टम! खत्म हुई सऊदी अरब की गुलामी परंपरा, कैसे भारतीयों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
- Thursday October 23, 2025
- Written by: रिचा बाजपेयी
अब भारतीय मजदूरों को नौकरी बदलने या देश छोड़ने में अधिक स्वतंत्रता और सुरक्षा मिलेगी. शोषण और पासपोर्ट जब्त करने जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है. इससे भारतीय श्रमिकों के कामकाजी हालात और जीवन स्तर दोनों में सुधार संभव है.
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न जॉब, न इनकम... नेपाल में हिंसा भड़कने के पीछे कहीं बेरोजगारी तो नहीं?
- Thursday September 11, 2025
- Reported by: Dev Kumar, Edited by: श्वेता गुप्ता
ओडिशा सरकार ने ओडिशा स्पेशल अरमेंड पुलिस में भर्ती निकली है. इस सरकारी नौकरी के लिए 3000 से ज्यादा नेपाली छात्र झारसुगुड़ा पहुंचे हैं. हैरानी की बात यह है कि वेकेंसी सिर्फ 135 हैं. इससे नेपाल के युवाओं के हालात को आसानी से समझा जा सकता है.
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'युद्धग्रस्त इजराइल जाने के लिए ये लंबी-लंबी कतारें क्यों...." : प्रियंका ने PHOTO शेयर कर BJP से पूछा सवाल
- Tuesday January 30, 2024
- Reported by: भाषा
प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर कहीं पर युद्ध के हालात हैं तो सबसे पहले हम अपने नागरिकों को वहां से बचाकर, वापस अपने वतन लाते हैं, लेकिन बेरोजगारी ने आज ये हाल कर दिया है कि देश की सरकार हजारों असहाय और मजबूर युवाओं को युद्धग्रस्त इजराइल जाकर ये खतरा उठाने से भी बचा नहीं रही.
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राशन लेने के लिए नहीं यहां नौकरी के लिए हो रही धक्का-मुक्की, Walk-in Interview की भीड़ का ये Video देख पकड़ लेंगे सिर
- Saturday December 16, 2023
- Edited by: संज्ञा सिंह
एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात क्या हैं. वायरल वीडियो क्लिप में सैकड़ों नौकरी चाहने वाले एक कंपनी के वॉक-इन इंटरव्यू स्थल के बाहर जगह के लिए धक्का-मुक्की कर रहे हैं.
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महंगाई एक सच्चाई, नौकरी एक सपना, ऐसे कॉपी पेस्ट से बनेगा भारत विश्व गुरु?
- Tuesday April 5, 2022
- एनडीटीवी
सवाल यह भी है कि क्या सरकार के पास आर्थिक क्षमता बची है कि वह इन भर्तियों को पूरी करे? आखिर क्यों भर्तियों को लेकर इस तरह के हालात बने हुए हैं. अभी भी कई भर्तियां ऐसी हैं जिनकी सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है मगर महीनों से नियुक्ति पत्र नहीं मिल रहे हैं.
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पारिवारिक हालात के चलते नौकरी छोड़ने वाली महिलाओं के लिए राजस्थान सरकार लाई ‘बैक टू वर्क’ योजना
- Tuesday November 30, 2021
- Reported by: भाषा
जो महिलाएं कार्यस्थल पर जाने में सक्षम नहीं होंगी, उन्हें ''वर्क फ्रॉम होम'' (घर से काम)का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा. रोजगार से जुड़ने की इच्छुक महिलाओं को महिला अधिकारिता निदेशालय व सीएसआर संस्था के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए एकल खिड़ी प्रणाली की सुविधा विकसित की जाएगी.
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बचत का ब्याज निगेटिव, घट गई कमाई
- Thursday September 23, 2021
- रवीश कुमार
उन लोगों ने कभी कहा तो नहीं लेकिन उन्हें पता है कि उनका जीवन कैसे चल रहा है. रिश्तेदारों के व्हाट्सएप ग्रुप में बस यही पूछ लें कि बैंकों में बचत पर मिलने वाले ब्याज का क्या हाल है. वे प्याज़ का रोना रोने लगेंगे ताकि आपका ध्यान बंट जाए और इस सवाल का जवाब नहीं देना पड़े. ऐसे बहुत से लोग हैं जो बैंकों में बचत पर मिलने वाले ब्याज से अपना ख़र्च चलाते हैं. यह एक निश्चित सी कमाई होती है और ज़्यादातर मामलों में सीमित भी. अब अगर ये कमाई भी घटने लगे, माइनस में जाने लगे तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि गोदी मीडिया पर भारत को सुपर पावर बताने की होड़ क्यों मची है. इसीलिए ताकि आम लोगों की खस्ता आर्थिक हालात पर चर्चा न हो सके. जिस तरह से अच्छी नौकरी और अच्छी सैलरी के दिन चले गए उसी तरह से सुरक्षित बचत के भी दिन चले गए. या तो शेयर बाज़ार का खेल सीख लीजिए या फिर माइनस में जा रही कमाई को देखते रहिए. आपके पुराने सारे रास्ते बंद हो चुके हैं.
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दोस्तो, अच्छी सैलरी और अच्छी नौकरी के दिन चले गए
- Wednesday September 22, 2021
- रवीश कुमार
क्या आप जानते हैं कि कोरोना के इन पौने दो साल के दौरान स्कूल और कॉलेज की फीस कितनी बढ़ी है? हम भी नहीं जानते हैं. मान कर चला जा सकता है कि जो अमीर जनता सौ रुपये लीटर आराम से ख़रीद रही है वही अमीर जनता महंगी फीस भी आराम से ही दे रही होगी. जनता के बीच इतनी स्वीकृति है कि सरकार को अफसोस ही हो रहा होगा कि पेट्रोल का दाम 200 रुपये करना चाहिए था. हालात से हारी हुई जनता के बीच अगर न्यूज़ चैनलों के ऐंकर वीर रस में प्रदर्शन नहीं करते तो राष्ट्र आज कितना कमज़ोर लगता. इन एंकरों की बुलंद और बेशर्म आवाज़ ही इस वक्त हारे का सहारा है. एंकरों की ललकार न होती तो दर्शकों को ताकत की दवा न मिलती. बहुत दिनों के बाद बड़ों को कार्टून के रुप में न्यूज़ चैनल मिल गए हैं. जिस पर टॉम एंड जेरी का खेल चल रहा है . टॉम जेरी का पीछा कर रहा है और जेरी टॉम का. आप इस इंतज़ार में देखे जा रहे हैं कि टॉम को जेरी पकड़ेगा या जेरी को टॉम.
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सरकारी नौकरियों में भर्ती पर कोई प्रतिबंध नहीं, सर्कुलर के बाद केंद्र सरकार ने दी सफाई
- Saturday September 5, 2020
- Reported by: सुनील प्रभु, Translated by: सूर्यकांत पाठक
कोरोनो वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से उपजे आर्थिक संकट (Economic Crisis) के बीच व्यय विभाग ने सरकारी खर्च पर अंकुश लगाने के लिए शुक्रवार को सर्कुलर जारी किया. इसके एक दिन बाद केंद्र ने शनिवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात में सरकारी नौकरियों (Government Jobs) के लिए भर्ती (Recruitment) या इनमें कटौती नहीं हो सकती है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के ट्वीट के कुछ घंटों के बाद यह स्पष्टीकरण आया है.
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कभी साइन बोर्ड पेंट किया करते थे राहत इंदौरी, हालात से लड़कर शायरी में हासिल की बुलंदी..
- Tuesday August 11, 2020
- Reported by: भाषा
उर्दू में ऊंची तालीम लेने के बाद इंदौरी एक स्थानीय कॉलेज में इस जुबान के प्रोफेसर बन गये थे. लेकिन बाद में उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और वह अपना पूरा वक्त शायरी और मंचीय काव्य पाठ को देने लगे थे.अपने 70 साल के जीवन में इंदौरी पिछले साढ़े चार दशक से अलग-अलग मंचों पर शायरी पढ़ रहे थे. उन्होंने कुछ हिन्दी फिल्मों के लिए गीत भी लिखे थे. लेकिन बाद में फिल्मी गीत लेखन से उनका मोहभंग हो गया.
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अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस की मार, IIT के ग्रेजुएटों के जॉब ऑफर ठंडे बस्ते में गए
- Wednesday April 22, 2020
- Written by: जे. सैम डेनियल स्टालिन, माया शर्मा, Translated by: सूर्यकांत पाठक
Coronavirus: अत्यधिक संक्रामक कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में 25 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया है. इसका दुनिया की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ा है. विकास दर कम हो गई है, लाखों लोगों की नौकरी चली गई है. अब सामान्य खुशहाल हालात में लाए गए प्रस्तावों पर पुनर्विचार किया जा रहा है. संक्रामक बीमारी ने भारत के प्रमुख संस्थानों - जैसे IIT और IIM के स्नातकों को भी नहीं बख्शा है. इन संस्थानों के ग्रेजुएटों को उच्च वेतन वाली नौकरियां मिलने की गारंटी होती है.
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एक करोड़ का पैकेज भी होता होगा, लेकिन IIT वालों के लिए ज़मीनी हकीकत कुछ और है...
- Monday December 30, 2019
- अनुराग मेहरा
मीडिया में इस तरह के हालात की कुछ ख़बरें दिखती हैं, लेकिन सब छिप जाती हैं, जब एक करोड़ से ज़्यादा तनख्वाह वाली कोई नौकरी किसी को मिल जाती है. इस रिपोर्ट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के उस विद्यार्थी की बात की जाती है, जो कोर क्षेत्र में नौकरी करना चाहता था, लेकिन माता-पिता के ज़ोरदार दबाव में उसने बैंकिंग की नौकरी कबूल कर ली. एक और विद्यार्थी ने 30 लाख रुपये की पेशकश मिलने पर कहा, "लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझसे एक करोड़ रुपये वाले पैकेजों के बारे में कहा था, जिनके बारे में उन्होंने पढ़ा है..."
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कश्मीर की झूठी तस्वीर पेश कर रही मोदी सरकार, सब कुछ ठीक तो फिर कर्फ्यू क्यों : दिग्विजय सिंह
- Friday September 13, 2019
- Reported by: IANS, Edited by: सूर्यकांत पाठक
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि कश्मीर में स्थिति सामान्य है, लेकिन यदि सब कुछ सामान्य होता तो वहां कर्फ्यू जैसे हालात नहीं होते. गोवर्धन परिक्रमा करने आए दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, "कश्मीर अतिसंवेदनशील मुद्दा है. इसका समाधान वाजपेयी के फार्मूले पर ही होना चाहिए. कश्मीर पर सरकार झूठी तस्वीर पेश कर रही है. वहां अगर सब कुछ सामान्य होता तो कर्फ्यू क्यों लगता."
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जम्मू-कश्मीर के हालात पर नौकरी छोड़ने वाले IAS के इस्तीफे के पीछे की वजह 'दुर्व्यवहार, ड्यूटी नहीं करने' पर मिला नोटिस तो नहीं?
- Wednesday September 11, 2019
- आईएएनएस
अब यह तथ्य सामने आया है कि आईएएस अधिकारी के इस्तीफा देने से पहले उन्हें आठ जुलाई को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों दमन एवं दीव और दादरा एवं नगर हवेली ने उनके मामले में गृह मंत्रालय को उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव भेजा था. केरल से एजीएमयूटी कैडर के 2012 बैच के अधिकारी को दादरा एवं नगर हवेली में बिजली एवं गैर पारंपरिक ऊर्जा विभाग के सचिव के रूप में तैनात किया गया था.
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कश्मीर का टॉनिक पीकर फार्म भरने में मदहोश हिन्दी प्रदेश का युवा
- Wednesday August 28, 2019
- रवीश कुमार
कश्मीर में 20 दिन से संचार व्यवस्था ठप होने को सही ठहराने के नशे में भूल गया है कि वही राज्य उसके साथ भी कश्मीर की तरह बर्ताव कर रहा है. परीक्षा की मामूली त्रुटियों की सुनवाई नहीं है. सब जगह जा रहा है, मगर कोई सुन नहीं रहा है. संचार व्यवस्था से खुद वंचित है. पहले इन्हें हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का कोर्स कराया गया और अब ये खुद भी उसी ज़ुबान में अपने हालात बयान करने लगे हैं.
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