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OPINION
This Article is From Aug 28, 2019

कश्मीर का टॉनिक पीकर फार्म भरने में मदहोश हिन्दी प्रदेश का युवा

कश्मीर में 20 दिन से संचार व्यवस्था ठप होने को सही ठहराने के नशे में भूल गया है कि वही राज्य उसके साथ भी कश्मीर की तरह बर्ताव कर रहा है. परीक्षा की मामूली त्रुटियों की सुनवाई नहीं है. सब जगह जा रहा है, मगर कोई सुन नहीं रहा है. संचार व्यवस्था से खुद वंचित है. पहले इन्हें हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का कोर्स कराया गया और अब ये खुद भी उसी ज़ुबान में अपने हालात बयान करने लगे हैं.

हिन्दी प्रदेशों के अभिशप्त युवाओं, जो खुद को कश्मीर का एक्सपर्ट समझते हैं, को सरकारी शिक्षा और नौकरी ने जोकर बनाकर रख दिया है. कश्मीर में 20 दिन से संचार व्यवस्था ठप होने को सही ठहराने के नशे में भूल गया है कि वही राज्य उसके साथ भी कश्मीर की तरह बर्ताव कर रहा है. परीक्षा की मामूली त्रुटियों की सुनवाई नहीं है. सब जगह जा रहा है, मगर कोई सुन नहीं रहा है. संचार व्यवस्था से खुद वंचित है. पहले इन्हें हिन्दू-मुस्लिम नेशनल सिलेबस का कोर्स कराया गया और अब ये खुद भी उसी ज़ुबान में अपने हालात बयान करने लगे हैं.

बिहार के शिक्षकों की तरफ से आया यह मैसेज बता रहा है कि देश के युवाओं का घोर पतन हो चुका है. इनका एक ही इस्तेमाल रह गया है. कश्मीर की तरह सूचना तंत्र से काटकर प्रोपेगंडा में झोंक दो. चेतना और सूचनाविहीन नौजवानों के साथ हो रहे अन्याय पर क्या कहा जाए, ये उसी की बांहों में झूमना पसंद करते हैं, जो इनकी गर्दन पर तलवार चलाता है. हिन्दी प्रदेश के युवाओं को जो नेता जितना अंधकार में धकेलेगा, वह उतना ही सफल होगा. वह कश्मीर पर एक्सपर्ट है. वह 'गोदी मीडिया' का समर्थक है. लोकतंत्र की संस्थाओं के कुचले जाने का समर्थक है. बस, इस वक्त अपने लिए समर्थक ढूंढ रहा है. चुनाव में कहता है, रोज़गार मुद्दा नहीं, बस, चुनाव के बाद रोज़गार न मिलने पर बेचैन है.

दुःख हुआ इस मैसेज को देखकर. फिर दुःख नहीं हुआ, युवाओं को देखकर.

अगर आप मध्य / माध्यमिक विद्यालय में आवेदन करना चाहते हैं, तो उसका चरणबद्ध तरीका निम्न है...

  1. पहले अपनी स्वास्थ्य जांच करवा लें, क्योंकि शारीरिक और मानसिक रूप से आपका सशक्त होना अत्यावश्यक शर्त है.
  2. एक किट बैग खरीद लें.
  3. एक अच्छी बाइक (हो सके, तो नई ले लें) या एक स्कूटी (महिलाओं के लिए) खरीद लें.
  4. बाज़ार से कम से कम से 100 फॉर्म खरीद लें.
  5. सभी प्रमाणपत्रों की 100-100 ज़ेरॉक्स कॉपी करवा लें या प्रिंटर भी खरीद लें.
  6. 100 रंगीन पासपोर्ट साइज़ फोटो खिंचवा लें.
  7. सत्तू, चीनी, नमक, मिक्सचर, चूरा, एक छोटा-सा गैस स्टोव तथा दवाइयां (First Aid) खरीदकर अपने पास रख लें.
  8. ATM, आधार कार्ड रख लें.
  9. कैश भी ढेर सारा रख लें, क्योंकि यह पेट्रोल में खर्च होगा.
  10. वुडलैंड का एक नया जूता ले लें, क्योंकि पूरा बिहार जो घूमना है.
  11. अब आप आवेदन करने के लिए तैयार हैं. निकल पड़िए प्रखंड-टु-प्रखंड, माध्यमिक शिक्षक के लिए जिला परिषद-टु-जिला परिषद, नगर पंचायत-टु-नगर पंचायत, नगर परिषद-टु-नगर परिषद आवेदन करने के लिए. आपको हज़ारों किलोमीटर यात्रा करनी है.
  12. ORS का घोल भी साथ रखें.
  13. निराश न हों, फॉर्म ज़रूर भरें, चाहे सीट कम ही क्यों न हों. यह बिहार है, कभी भी बहार आ सकती है.

जय नैतिक पुरुष / जय बिहार सात साल से भटकते हुए माध्यमिक शिक्षक अभ्यर्थी

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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Ravish Kumar, Kashmir, Government Education
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