जेवर एयरपोर्ट का प्रधानमंत्री ने उद्घाटन कर दिया लेकिन आसपास के गांवों के क्या हालात बदले इसे जानने के लिए NDTV की टीम दयानतपुर गांव पहुंची…इस गांव की करीब 700 हेक्टेयर जमीन ज़ेवर एयरपोर्ट के अधिग्रहण में गई है…8000 की आबादी वाले इस गांव के ज्यादातर लोगों को मुआवजा एक करोड़ से ज्यादा का मिला है…यहां हम ललित शर्मा के घेर पर पहुंचे..आमतौर पर पश्चिमी उप्र में घेर का मतलब मवेशी, चारा और चौपाल के काम में आती है…लेकिन इस घेर में भैंस तो नहीं दिखा अलबत्ता काली रंग की SUV…जरुर खड़ी मिली…अंदर आते ही एक लॉन…पर लगा झूला…और AC लगे चार कमरों की एक आलीशान कोठी जरुर दिखी…जबकि ललित शर्मा का परिवार गांव के दूसरी जगह पर रहता है ये घेर केवल अपने दोस्तों के बैठक के तौर पर इस्तेमाल करते हैं..ललित कहते हैं कि कई साल पहले जब नोएडा में लोगों को मुआवजा मिला तब लोगों ने गाड़ी और मकान में लगाकर उसे खर्च कर दिया..आज वो गार्ड की नौकरी कर रहे हैं..उसे देखते हुए हम लोगों ने मुआवजे के पैसों को अपने काम में लगाया..वो बताते हैं कि उनकी चालीस बीघे जमीन अधिग्रहण में गई थी पाँच करोड़ से ज़्यादा का मुआवजा मिला..जिसको उन्होंने बुलंदशहर में खेत ख़रीदने में और अपने कंस्ट्रक्शन के काम में निवेश किया…आज ज़ेवर एयरपोर्ट की वजह से उनके कंस्ट्रक्शन का काम लगातार बढ रहा है..पास में खड़े उनके चाचा रघुनंदन ने बताया कि
कुछ साल पहले तक उनको जहां साइकिल ख़रीदने के लिए सोचना पड़ता था आज दो दो गाड़ियाँ उनके दरवाज़े पर खड़ी हैं..एक बेटा गाँव छोड़कर ग्रेटर नोएडा में में उसने कोठी बनाया है और वहीं वो अपना बिज़नेस कर रहा है..इसी तरह रघुनंदन बताते हैं कि गाँव के कुछ लोग टैक्सी चलाते थे लेकिन अब उनके पास दो दो गाड़ियाँ हैं..
गाँव के मकान ही नहीं कारोबार भी बदले…
दयानतपुर गांव में हमें जनरल स्टोर की बड़ी सी दुकान पर बैठे हरीश चंद्र गोयल मिले…इसी जगह पर अपनी छोटी सी दुकान दिखाते कहते हैं कि 1968 में गांव में एक छोटी सी परचून की दुकान खोली थी..तब तेल, मसाला और गुड़ बेचते थे…लेकिन ज़ेवर एयरपोर्ट आने के बाद गांव की आमदनी बढ़ी…वो कहते हैं कि अब कोल्ड ड्रिंक्स, चाकलेट समेत ऐसी कोई चीज नहीं है जिसे वो दुकान पर रखते नहीं है. गिरीश बताते हैं कि जब गांव वालों की डिमांड बढ़ी तब 2022-23 में उन्होंने पुरानी दुकान छोड़कर बड़ी दुकान ली…अब उनकी आमदनी लगातार बढ़ रही है क्योंकि ग्रामीणों का कारोबार बढ़ा है…
एक करोड़ पर 60 हजार रुपए महीना ब्याज मिलता है…
गांव से बाहर निकलते ही एक पुरानी सी साइकिल पर जा रहे योगेश्वर नाम के एक बुजुर्ग मिले…वो बोले कि गांव में करीब करीब सभी परिवारों को मुआवजा मिला है…जिसे लोगों ने या तो कारोबार बढ़ाने पर लगाया या उनको घर बैठे ब्याज मिल रहा है..जीवन अच्छे से चल रहा है…जब उनसे पूछा कि आपके आय का सहारा क्या है..तो वो बोले कुछ नहीं..फिर मैंने पूछा फिर खर्चा कैसे चलता है ? वो हँसकर बोले ब्याज आता है..फिर कहा कि साइकिल देखकर ये मत समझना कि मैं गरीब हूँ..एक करोड़ रुपए बैंक में जमा होने से साठ हज़ार मुझे ब्याज मिलता है बाकी कुछ खेती है जिसको मैं करता हूँ…
गांव में ही मुझे ब्रह्मदत्त मिले अपने पुराने घर को दिखाकर कहते हैं कि यहाँ ढाई सौ लोगों का परिवार रहता था..लेकिन जैसे जैसे लोगों की आमदनी बढ़ी लोगों ने अब नोएडा, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद में कोठियाँ बनवा ली…आज यहाँ सन्नाटा पसरा है…गाँव में हर तरफ जो नए मकान बने हैं वो तीन से चार साल पुराने हैं…बाकी कोई पुरानी हवेली के दरवाज़े पर ताले लगे हैं..
CSR फंड से गांवों में स्किल डेवलेपमेंट सेंटर और तालाब का जीर्णोद्धार
दयानतपुर के तालाब में HCL कंपनी को जीर्णोद्धार का बोर्ड लगा है…गांव के ही ब्रह्मदत्त बताते हैं कि दयानतपुर, रन्हेरा, नंगला शरीफ जैसे गाँवों के लोगों के लिये Skill Develoment के कई सेंटर बनाए गए हैं ताकि यहां के युवाओं को होटल, लोडिंग और कंप्यूटर का काम ज्यादा से ज्यादा मिल सके.. ख़ासतौर पर एयरपोर्ट परियोजना से जुड़ी कंपनियाँ का दावा है कि 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा का फंड CSR की योजनाओं में लगाया गया है…