- वित्त मंत्री सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026‑27 पेश करेंगी, जिसमें रक्षा और बुनियादी ढांचे पर जोर होगा
- पिछले एक दशक में केंद्र सरकार का बजट आकार बढ़कर 17.95 लाख करोड़ से 50.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है
- सरकार ने कोविड काल में राजकोषीय घाटा घटाकर वित्त वर्ष 2025‑26 में अनुमानित 4.04 प्रतिशत तक लाने में सफलता पाई
देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट 2026‑27 पेश करेंगी. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इस बार बजट में रक्षा, बुनियादी ढांचा, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स), बिजली और किफायती आवास पर खासा जोर देखने को मिल सकता है. गौर करने वाली बात ये है कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार के बजट का आकार लगातार बढ़ा है. जहां 2014‑15 में कुल बजट 17.95 लाख करोड़ रुपये था, वहीं साल 2025‑26 में यह बढ़कर 50.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार की प्राथमिकताओं में निवेश‑आधारित विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को लगातार बढ़ावा मिला है.
मोदी सरकार में देश का बजट
- 2014‑15 – 17.95 लाख करोड़
- 2015‑16 – 17.77 लाख करोड़
- 2016‑17 – 19.78 लाख करोड़
- 2017‑18 – 21.47 लाख करोड़
- 2018‑19 – 24.42 लाख करोड़
- 2019‑20 – 27.86 लाख करोड़
- 2020‑21 – 30.42 लाख करोड़
- 2021‑22 – 34.83 लाख करोड़
- 2022‑23 – 39.45 लाख करोड़
- 2023‑24 – 45.03 लाख करोड़
- 2024‑25 – 48.21 लाख करोड़ (जुलाई पूर्ण बजट)
- 2025‑26 – 50.65 लाख करोड़
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विकास बनाम राजकोषीय अनुशासन
नीति‑निर्धारकों के सामने इस बजट में भी आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने और राजकोषीय घाटे को काबू में रखने की दोहरी चुनौती होगी, खासकर तब जब वैश्विक आर्थिक और भू‑राजनीतिक हालात अनिश्चित बने हुए हैं. सरकार कोविड काल में 9.2 प्रतिशत तक पहुंचे राजकोषीय घाटे को घटाकर वित्त वर्ष 2025‑26 में अनुमानित 4.4 प्रतिशत तक लाने में सफल रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026‑27 में भी सरकार वित्तीय अनुशासन से पीछे हटने का जोखिम नहीं लेगी और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के रास्ते पर बनी रहेगी.
टैक्स राहत से आगे कैपेक्स पर फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025‑26 का बजट मध्यम वर्ग की खपत बढ़ाने के लिए टैक्स राहत पर ज्यादा फोकस था. वहीं बजट 2026‑27 में खपत बढ़ाने के उपाय ज्यादा सीमित और चुनिंदा हो सकते हैं. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस बार पूंजीगत खर्च को तवज्जो दे सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जो मौजूदा वैश्विक हालात के चलते रणनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं. डीबीएस बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों की नजर सरकार की उधारी, कर्ज और राजकोषीय घाटे के आंकड़ों पर टिकी रहेगी, क्योंकि बॉन्ड बाजार के लिए उधारी का आकार बेहद अहम होगा.
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आर्थिक सर्वे और शेयर बाजार की नजर बजट पर
इकोनॉमिक सर्वे 2025‑26 में वित्त वर्ष 2026‑27 के लिए 6.8 से 7.2 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया गया है. यह मौजूदा वर्ष की 7.4 प्रतिशत की दर से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन बाजार के अनुमानों से बेहतर माना जा रहा है. खास बात यह है कि 1 फरवरी को रविवार होने के बावजूद शेयर बाजार खुले रहेंगे और बजट के दिन सामान्य ट्रेडिंग सेशन होगा. बजट से पहले बीते हफ्ते बाजार में करीब 1 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली, हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकेतों के कारण उतार‑चढ़ाव बना रहा.
8वें वेतन आयोग पर टिकी निगाहें
केंद्रीय बजट 2026‑27 से पहले 1.1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक 8वें वेतन आयोग को लेकर किसी बड़े संकेत की उम्मीद लगाए बैठे हैं. हालांकि, संकेत यही हैं कि वित्त वर्ष 2026‑27 में वेतन और पेंशन बढ़ोतरी का पूर्ण लागू होना मुश्किल है. बजट के दिन 8वें वेतन आयोग के गठन को सिर्फ तीन महीने ही पूरे होंगे, जबकि आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. फिलहाल आयोग की रिपोर्ट की संभावित अंतिम समयसीमा मई 2027 मानी जा रही है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर बजट में वेतन‑पेंशन से जुड़े संभावित खर्च के लिए अलग से प्रावधान का संकेत मिलता है, तो इसे प्रक्रिया तेज होने के संकेत के तौर पर देखा जाएगा. फिलहाल डीए‑डीआर की दर 58 प्रतिशत है. 7वें वेतन आयोग का सरकार पर कुल खर्च करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये था, जबकि 8वें वेतन आयोग का असर 2.4 लाख करोड़ से 3.2 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है.
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