- वित्त मंत्री सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी, जिसमें कई क्षेत्रों पर ध्यान होगा.
- नौकरीपेशा वर्ग इनकम टैक्स स्लैब विस्तार और स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने सहित टैक्स बोझ कम करने की मांग कर रहा है.
- किसानों की मुख्य मांग प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि बढ़ाने और खेती में लागत घटाने के लिए उपाय करने की है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करने जा रही हैं. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस बार बजट में रक्षा, बुनियादी ढांचा, पूंजीगत खर्च (कैपेक्स), बिजली क्षेत्र और किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) के विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा. इसके साथ ही सामाजिक कल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश होगी.
इधर, केंद्रीय बजट 2026 से पहले समाज के विभिन्न वर्गों की उम्मीदें और मांगें हैं. नौकरीपेशा से लेकर किसानों और छात्रों तक, हर कोई अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार की आस लगाए बैठा है.
नौकरीपेशा लोगों की क्या मांग?
नौकरीपेशा लोगों की सबसे बड़ी मांग इनकम टैक्स स्लैब के दायरे को बढ़ाने और टैक्स के बोझ को कम करने की है. यह वर्ग चाहता है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन को वर्तमान सीमा से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया जाए. साथ ही, धारा 80C (निवेश) और 80D (हेल्थ इंश्योरेंस) के तहत मिलने वाली कटौती की सीमा में वृद्धि की मांग की जा रही है, ताकि बचत और स्वास्थ्य सुरक्षा को अधिक प्रोत्साहन मिल सके.
किसानों की क्या हैं मांग?
किसानों की प्राथमिकता खेती की लागत कम करने और आर्थिक सुरक्षा पर है. उनकी मुख्य मांग प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि को बढ़ाकर सालाना 12 हजार रुपये करने की है. इसके अतिरिक्त, कृषि में उपयोग होने वाले डीजल और खाद के दामों में कटौती तथा बिजली की दरों को सस्ता करने की मांग उठाई गई है, ताकि खेती को मुनाफे का सौदा बनाया जा सके.
मिडिल क्लास: महंगाई पर लगाम की उम्मीद
मध्यम वर्ग के लिए रसोई का बजट और दैनिक खर्च सबसे बड़ी चिंता है. इस वर्ग की मांग है कि LPG सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की जाए. साथ ही, आम जरूरत की चीजें जैसे राशन, सब्जी और खाद्य तेल को सस्ता करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. मिडिल क्लास भी इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव और रोजगार के नए अवसरों की ओर टकटकी लगाए बैठा है.
छात्र: सस्ती शिक्षा और बेहतर अवसर
देश के भविष्य यानी छात्रों की मांग डिजिटल क्रांति और सस्ती शिक्षा के इर्द-गिर्द है. वे एजुकेशन लोन पर ब्याज दरों में कटौती और हायर एजुकेशन की फीस कम करने की अपेक्षा रखते हैं. साथ ही, लैपटॉप और कंप्यूटर के दाम घटाने, डिजिटल साक्षरता के लिए नीति बनाने और ई-बुक्स पर GST कम करने की मांग की जा रही है ताकि 'डिजिटल इंडिया' का सपना हर छात्र के लिए सुलभ हो सके.
सीनियर सिटीजन: सुरक्षा और सम्मान
वरिष्ठ नागरिकों की मांगें उनकी सेवानिवृत्ति के बाद की वित्तीय सुरक्षा पर केंद्रित हैं. उनकी मुख्य मांग एफडी (FD) पर मिलने वाली ब्याज दरों को बढ़ाने और इनकम टैक्स छूट की सीमा में विस्तार की है. इसके अलावा, वे बढ़ते चिकित्सा खर्चों पर टैक्स कटौती और एक राष्ट्रीय स्तर की सामाजिक पेंशन योजना की मांग कर रहे हैं, ताकि बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जी सकें.
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