विज्ञापन

ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या और बढ़ेगा रक्षा बजट? आम बजट से क्या कुछ हैं उम्मीदें, जान लीजिए 

पिछले साल रक्षा मंत्रालय को बजट में करीब 6.81 लाख करोड़ रुपये मिले थे. यह रकम पहले ही काफी बड़ी थी, लेकिन अब सरकार इसे और बढ़ाने की योजना बना रही है. कहा जा रहा कि इस बार रक्षा मंत्रालय के बजट में 10 फीसदी या उससे अधिक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्या और बढ़ेगा रक्षा बजट? आम बजट से क्या कुछ हैं उम्मीदें, जान लीजिए 
बजट में रक्षा सेक्टर को भी है बड़ी उम्मीदें
NDTV
  • केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फरवरी में 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा बजट का प्रस्ताव पेश करेंगी
  • रक्षा मंत्रालय के कैपिटल बजट को दो लाख करोड़ रुपये से ऊपर बढ़ाने की योजना भारत के इतिहास का सबसे बड़ा होगा
  • बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और तीन तरफ से विदेशी दबाव के कारण रक्षा बजट में दस प्रतिशत या उससे अधिक वृद्धि संभव है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी. यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बजट होगा. माना जा रहा है कि ऑपेरशन सिंदूर की सफलता के बाद सरकार सेनाओं के लिये अब  कुछ बड़ा करने वाली हैं. सूत्रों के मुताबिक इस बार रक्षा मंत्रालय का कुल बजट 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है. खासतौर पर हथियार, सैन्य उपकरण और आधुनिक तकनीक की खरीद के लिए अलग से रखे जाने वाले कैपिटल बजट को 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर ले जाने की तैयारी है. अगर ऐसा होता है तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट होगा. ऑपेरशन सिंदूर में ही सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकाने पर हमला कर पाक को घुटने टेकने में मजबूर कर दिया .

पिछले साल रक्षा मंत्रालय को बजट में करीब 6.81 लाख करोड़ रुपये मिले थे. यह रकम पहले ही काफी बड़ी थी, लेकिन अब सरकार इसे और बढ़ाने की योजना बना रही है. कहा जा रहा कि इस बार रक्षा मंत्रालय के बजट में 10 फीसदी या उससे अधिक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इसकी एक बड़ी वजह हाल के सालों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां हैं. पाकिस्तान और चीन का गठजोड़ तो है ही,  उसपर से चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां यानी भारत तीन तरफ से विदेशी चुनौतियों का सामना कर पड़ा रहा हैं . 

Latest and Breaking News on NDTV

ऐसे में रक्षा मामलों से जुड़े जानकार कहते है कि आने वाले समय में भारत पाकिस्तान के बीच फिर से किसी तरह के टकराव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हैं . इसमें चीन भी बड़ी भूमिका अदा कर सकता है . ऐसी चुनौती का सामना करने के लिए भारत को अभी से खुद को तैयार करना होगा . इस हालात में सेनाओं का जोर शोर से आधुनिकीकरण होना जरूरी है.

सुरक्षा जानकारों का यह भी कहना है कि आने वाले समय में खतरे सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे.अब हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों में भी चुनौतियां बढ़ेंगी. इसलिए सेनाओं को ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत है. इसी सोच के चलते बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए कम से कम 10 फीसदी या उससे ज्यादा की बढ़ोतरी पूरी तरह संभव है. 

सेना दिवस से पहले 13 जनवरी 2026 को सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑर्म्ड फोर्सेज को उम्मीद है कि डिफेंस सेक्टर के बजट में बढ़ोतरी की जाएगी , जिससे स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री को और ज्यादा काम मिले और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके . जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि पैसों की कोई कमी नहीं है . उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से साफ संदेश है कि अगर सेना को खर्च करना है, तो धन की कमी नहीं होने दी जाएगी .  

इस बजट का बड़ा हिस्सा नये हथियार, फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम, रडार और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरण खरीदने पर खर्च होगा. वैसे पिछले बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये था, जो कुल रक्षा बजट का लगभग एक चौथाई हिस्सा था. 2026 के बजट में इसके 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जाने की उम्मीद है.

 आपको बता दे कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये रहा था जो कि 2023-24 के मुकाबले 9.5 फीसदी ज्यादा था . भारत अपने डिफेंस सेक्टर पर जीडीपी का 1.9 प्रतिशत ही खर्च करता है जो कि बेहद कम है जबकि 2020-21 में 2.1 फीसदी खर्च किया गया था . सुरक्षा विशेषज्ञों की मानें तो हाल के सालों में भारत को जिस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है उसमें भारत को जीडीपी का 3 से 4 फीसदी रक्षा पर खर्च करना चाहिए .

Latest and Breaking News on NDTV

रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने भी जीडीपी का 3 फीसदी खर्च करने का सुझाव दिया है . वैसे भी रक्षा बजट के कुल आवंटन का 46 फीसदी सैलेरी पर खर्च हो जाता है . 24 फीसदी पेंशन पर और केवल 26 फीसदी ही रकम सेनाओं के आधुनिकरण और जरूरतों पर खर्च किया जाता है . रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार अब ऐसे सिस्टम पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जो कम समय में सेनाओं की ताकत कई गुना बढ़ा सकें , ताकि वह आने वाली चुनातियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com