इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त यानी शुक्रवार को मनाया जाएगा, जिसमें बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र यानी राखी बांधकर उनके लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं और भाई जीवनभर उनकी रक्षा का वचन देते हैं. रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते का उत्सव है. वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले भगवान शिव और अन्य देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा सनातन धर्म में बेहद खास मानी गई है. प्रयागराज की ज्योतिषी शिप्रा सचदेव से जानिए रक्षाबंधन के मुहूर्त और शुभ संयोग.
रक्षाबंधन का शुभ समय
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा और इस दिन अधिकांश समय शुभ रहेगा. पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को प्रारंभ हो रही है, लेकिन इसकी समाप्ति 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर होगी. इसी कारण उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाना शुभ माना जा रहा है.
भद्रा का नहीं रहेगा कोई प्रभाव
ज्योतिषी शिप्रा सचदेव के मुताबिक, भद्रा 27 अगस्त को ही प्रारंभ होकर उसी दिन समाप्त हो जाएगी. इसलिए 28 अगस्त को भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा और बहनें बिना किसी चिंता के अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी.
चंद्र ग्रहण को लेकर क्या है स्थिति?
28 अगस्त को एक चंद्र ग्रहण लग रहा है, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, उसका सूतक काल मान्य नहीं होता. इसलिए भारत में रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण का कोई प्रत्यक्ष धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा. हालांकि, ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है. इसलिए कुछ विद्वानों का मानना है कि ग्रहण का सूक्ष्म प्रभाव मानसिक ऊर्जा पर पड़ सकता है. इसी कारण विशेष सावधानी और शुभता के लिए कुछ उपाय बताए जाते हैं.
VIDEO | Astrologer Shipra Sachdev from Prayagraj shares about Raksha Bandhan 'muhurat'.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 26, 2026
She says, "This year, Raksha Bandhan will be celebrated on August 28, people can celebrate during the whole day, Puranmashi is starting from August 27, but it will be over by 9.28 am, so… pic.twitter.com/qv6Sgpkp7z
भाई से पहले शिवजी को ही राखी क्यों?
ज्योतिषी शिप्रा सचदेव ने बताया कि इस बार सावन का अंतिम दिन भी है. ऐसे में बहनों को सबसे पहले भगवान शिव को राखी अर्पित करनी चाहिए. इसके बाद भगवान विष्णु को राखी अर्पित करें. फिर अपने गुरु या गुरु के स्वरूप का सम्मान करें. अंत में अपने भाई की कलाई पर राखी बांधें. मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मक एनर्जी दूर होती है और भाई के जीवन में सुख, शांति, मानसिक संतुलन तथा आर्थिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
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