सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लगातार संघर्ष जारी है. हूती सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, यमनी समूह ने रियाद में किंग खालिद एयरपोर्ट और राबिघ में अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाया. सऊदी अरब में आभा एयरपोर्ट, खमीस मुशैत एयरबेस और नज्रान व जाजान प्रांतों में स्थित ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने सऊदी अरब में कई जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की जिम्मेदारी ली है. इन हमलों में रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और राबिघ में अरामको रिफाइनरी भी शामिल हैं. सोमवार को टेलीग्राम पर जारी एक बयान में, हूची मिलिट्री के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने कहा कि विद्रोही गुट ने बड़ी तादाद में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल करके तीन खास मिलिट्री ऑपरेशन किए. सरी के मुताबिक, पहले ऑपरेशन में रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया.
सऊदी अरब ने यमनी सरकार को अपना 'पूर्ण राजनीतिक और सैन्य' समर्थन दोहराया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों से समर्थन देने का आह्वान किया.
यमन के कुछ इलाकों पर सऊदी गठबंधन का कब्जा
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं ने ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों से रणनीतिक रूप से अहम बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आस-पास के कई अहम इलाकों पर फिर से कब्जा कर लिया है. वहीं, यमन के पश्चिमी तट पर लड़ाई तेज़ होने के बीच हूती विद्रोहियों ने सऊदी तेल ठिकानों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है.
यमन के अधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सहयोगी सेनाओं ने स्ट्रेट के ठीक उत्तर में स्थित अहम शहर धुबाब पर फिर से कब्जा कर लिया है. यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक अहम समुद्री मार्ग है.
यमन के हूती विद्रोहियों से लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन का कहना है कि उसकी नौसेना ने होदेदाह प्रांत में एक सैन्य अभियान चलाया. हथियारों के गोदाम, विस्फोटक नावों के भंडार और समुद्री बारूदी सुरंगों को नष्ट कर दिया गया.
यह भी पढ़ें | सऊदी की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनी अरामको पर फिर हमले का दावा, जानिए कौन हैं हूती और क्यों कर रहे बार-बार हमले
जंग में इस्लामिक NATO की एंट्री!
तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने आपसी रक्षा समझौते के तहत 'रोकथाम के उपाय' लागू करने और यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों का मुकाबला करने के लिए खाड़ी देश में तेजी से सेना तैनात करने पर सहमति जताई है. रियाद में तीनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों की इमरजेंसी मीटिंग के बाद सोमवार को इस फैसले का ऐलान किया गया.
इसी साल 7 अगस्त को हुए समझौते के बाद से यह पहली बार है, जब 'मक्का अलायंस फॉर डिफ़ेंस' को एक्टिव किया गया है. इस समझौते में कहा गया है कि तीनों देशों में से किसी पर भी हमला होने पर उसे सभी पर हमला माना जाएगा. यह NATO की स्थापना संधि के मुख्य प्रावधान जैसा ही है, जिसमे 'इस्लामिक NATO' की कहा जाता है.
यह भी पढ़ें | सऊदी अरब का एयरस्पेस अब नागरिक विमानों के लिए खतरनाक है... हूतियों ने दी सभी एयरलाइन्स को चेतावनी
यूएस ने जारी किया सिक्योरिटी अलर्ट
सऊदी अरब के रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास ने सऊदी अरब में अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है. सऊदी में मौजूदा सुरक्षा हालात और हवाई ड्रोन या मिसाइल हमलों की आशंका को देखते हुए, अमेरिकी मिशन सभी अमेरिकी नागरिकों से सतर्क रहने और सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा जारी राष्ट्रीय अलर्ट के निर्देशों का पालन करने को कहा है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं