5 अक्टूबर से चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज पॉलिसी दरों का ऐलान करेगा. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे MPC मीटिंग खत्म होने के बाद लिए गए फैसलों की जानकारी देंगे. SBI रिसर्च समेत ज्यादातर एजेंसी और एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है.
अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा. ये करीब साढ़े तीन साल बाद RBI की पहली दर बढ़ोतरी होगी. इससे पहले फरवरी 2023 में RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 6.50% किया था.
महंगाई का दबाव
रेपो रेट बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह महंगाई का दबाव माना जा रहा है. भारत की खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई, जबकि जुलाई में ये 4.45% थी.
सरकार ने RBI को CPI आधारित खुदरा महंगाई को 4% के लक्ष्य के आसपास रखने की जिम्मेदारी दी है, जिसमें 2% ऊपर या नीचे की गुंजाइश है.
इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊंची कच्चे तेल की कीमतें भी महंगाई के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं. महंगा क्रूड भारत की महंगाई पर दबाव डालने के साथ चालू खाते के घाटे को भी प्रभावित कर सकता है.
2025 में हुई थी 125 bps की कटौती
रेपो रेट में बढ़ोतरी RBI की मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव का संकेत होगी. केंद्रीय बैंक ने 2025 में कुल 125 बेसिस पॉइंट की चार कटौतियां की थीं. इसके बाद लंबे समय तक दरों को स्थिर रखा गया.
फिलहाल पॉलिसी रेपो रेट 5.25% है. PTI के पोल में ज्यादातर प्रतिभागियों ने 25 bps की बढ़ोतरी और अपेक्षाकृत सख्त यानी हॉकिश रुख की उम्मीद जताई है. हालांकि, इस बात पर राय बंटी हुई है कि RBI अपने पॉलिसी स्टांस में बदलाव करेगा या नहीं.
बाजार की नजर सिर्फ रेट पर नहीं
HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेलवन राधाकृष्णन के मुताबिक 25 bps की बढ़ोतरी बाजार में काफी हद तक पहले ही शामिल हो चुकी है. इसलिए RBI की लिक्विडिटी और आगे की दरों को लेकर गाइडेंस ज्यादा महत्वपूर्ण होगी.
उनके मुताबिक अगर RBI डेटा के आधार पर संतुलित रुख अपनाता है तो बैंक और रेट-सेंसिटिव सेक्टर को सपोर्ट मिल सकता है. वहीं लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति के संकेत बाजार में हालिया रिकवरी को प्रभावित कर सकते हैं.
Geojit इन्वेस्टमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार ने भी 25 bps की बढ़ोतरी को लगभग तय माना है. उनके मुताबिक बाजार पहले ही इस बढ़ोतरी को डिस्काउंट कर चुका है. इसलिए निवेशकों की नजर RBI के पॉलिसी स्टांस और ग्रोथ-इन्फ्लेशन अनुमान पर रहेगी.
बैंकिंग शेयरों पर क्या असर?
विजयकुमार के मुताबिक ब्याज दर बढ़ने से बैंकों के मार्जिन को फायदा हो सकता है, क्योंकि फ्लोटिंग रेट बढ़ने से ब्याज आय बढ़ सकती है. उन्होंने मजबूत डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ को वित्तीय क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताया.
वहीं Ventura के हेड ऑफ रिसर्च विनीत बोलिंजकर के मुताबिक इस हफ्ते बाजार में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है. रुपया, क्रूड ऑयल और RBI का रेट स्टांस बाजार की दिशा तय करने वाले अहम फैक्टर होंगे.
रेट-सेंसिटिव सेक्टरों में बैंक, ऑटो और रियल्टी पर खास नजर रहेगी. दूसरी ओर IT शेयरों में 8 अक्टूबर से शुरू होने वाले Q2 अर्निंग सीजन और TCS के नतीजों व कमेंट्री का असर दिख सकता है.
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