रक्षाबंधन त्योहार को लेकर अलग ही क्रेज होता है. वैसे तो देशभर में इस त्योहार का चलन है. लेकिन उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार इस साल प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों को बड़ा सौगात दिया. सीएम ने ऐलान किया था कि महिलाएं उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की सभी कैटेगरी की बसों में तीन दिनों के लिए निशुल्क बस यात्रा कर सकेंगे. ये सीएम योगी का रक्षा बंधन गिफ्ट था.
इस फैसले का प्रभाव पूरे प्रदेश में व्यापक और अभूतपूर्व तरीके से देखने को मिला. भाई-बहन के इस त्योहार पर सुरक्षा, सेवा और सम्मान के संगम की एक अनोखी तस्वीर उभरकर सामने आई.
आंकड़ों के अनुसार, निशुल्क यात्रा के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही लगभग 60 लाख महिलाओं और उनके सहयात्रियों ने परिवहन निगम की बसों में सफर कर इस राज्यव्यापी सुविधा का भरपूर लाभ उठाया. बस अड्डों और मुख्य मार्गों पर यात्रियों का भारी जमावड़ा रहा, लेकिन उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस महकमे की पूर्व-तैयारियों के कारण यह विशाल यातायात सुचारु और अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संचालित हुआ. हर जिले, कस्बे और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से महिलाएं बिना किसी आर्थिक या व्यावहारिक चिंता के अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने आसानी से आ-जा सकीं.
योगी ने दी सुरक्षा की दी गारंटी
इस पूरे अभियान और उत्सव की सबसे अभूतपूर्व और खास बात जो सामने आई, वह थी यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की संपूर्ण सुरक्षा. अक्सर त्योहारों के मौके पर जब सार्वजनिक परिवहन में लाखों की भारी भीड़ उमड़ती है, तब झपटमारी, चेन स्नेचिंग, चोरी, पॉकेटमारी, सामान गायब होने या महिलाओं के साथ छेड़खानी और अभद्रता जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं. लेकिन, उत्तर प्रदेश की परिवहन बसों और बस अड्डों से इन दो-तीन दिनों के दौरान अपराध की एक भी अप्रिय घटना सामने नहीं आई. इतने विशाल आबादी के बीच एक भी आपराधिक वारदात का न होना ये दिखाता है कि योगी आदित्यनाथ के निर्देशों को लेकर प्रशासन कितनी चुस्त दुरुस्त थी.
अराजक तत्वों में शासन-प्रशासन का खौफ
बसों और बस अड्डों में जीरो क्राइम की यह उपलब्धि किसी संयोग का नतीजा नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश में स्थापित हुए योगी सरकार के 'क्राइम पर जीरो टॉलरेंस मॉडल' की प्रत्यक्ष सफलता को दिखाती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने कानून व्यवस्था के क्षेत्र में जो नए मानक तय किए हैं, यह घटनाक्रम उसी का जीवंत प्रमाण है.
राज्य सरकार ने यह साफ संदेश दिया है कि प्रदेश की बेटियों, महिलाओं और नागरिक की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसी नीति का खौफ असामाजिक तत्वों और अपराधियों के मन में इस कदर बैठा हुआ है कि भीड़भाड़ वाले संवेदनशील मौकों पर भी कोई अपराध करने का दुस्साहस नहीं कर पाता.
तैनात रहा अभेद्य सुरक्षा चक्र
इस दौरान प्रदेश भर के प्रमुख बस टर्मिनलों, डिपो और महत्वपूर्ण चौराहों पर पुलिस प्रशासन, महिला पुलिस बल (पिंक पैंथर्स/मिशन शक्ति की टीमें) और परिवहन विभाग के अधिकारियों का एक अभेद्य सुरक्षा चक्र तैनात रहा. तकनीक का आधुनिक इस्तेमाल, सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी, इंटेलिजेंस इनपुट और बस अड्डों से लेकर यात्रा के रास्तों पर निरंतर गश्त ने अपराधियों के मन में डर और आम यात्रियों के मन में सुरक्षा की भावना पैदा की.
महिला यात्रियों ने बिना किसी भय के देर रात तक सुरक्षित यात्रा की और सरकार की इस सशक्त व्यवस्था पर संतोष जताया. यह भी एक तथ्य है कि अनगिनत महिलाओं ने भयमुक्त होकर बिना किसी सहयात्री के बस सेवा का लाभ उठाया.
अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय
रक्षाबंधन के इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि जब नीयत साफ हो, नीति स्पष्ट हो और प्रशासनिक तंत्र चुस्त-दुरुस्त हो, तो किसी भी विशाल आयोजन को बिना किसी विघ्न और अपराध के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है.
करीब 60 लाख से अधिक महिलाओं का सुगम, सम्मानजनक और पूरी तरह से भयमुक्त सफर उत्तर प्रदेश के सुशासन का नया प्रतीक बन चुका है. योगी सरकार का यह सुरक्षा और सेवा मॉडल आज न केवल प्रदेश के नागरिकों के मन में अपनी सरकार के प्रति गहरा विश्वास पैदा कर रहा है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी जनसेवा, नारी सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए सीखने योग्य मिसाल पेश कर रहा है.