- जब हॉर्मुज जाम हुआ तो कराची चमक उठा. पाकिस्तान ने लगाया बड़ा दांव.
- ईरान-अमेरिका युद्ध में पाकिस्तान की जबरदस्त चाल.
- ईद में भी काम किया, 24 घंटे ऑपरेशन चलाया और कराची बन गया युद्ध का सबसे बड़ा विजेता.
दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइनों में से एक हॉर्मुज स्ट्रेट जब 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान vs इजरायल-अमेरिका युद्ध के बाद जाम हो गया पूरी ग्लोबल सप्लाई चेन हिल गई. ईरान ने खुद हॉर्मुज का रास्ता बंद कर दिया, जो दुनिया के करीब एक चौथाई तेल व्यापार का रास्ता माना जाता है. नतीजा यह हुआ कि खाड़ी देशों के साथ उसका लगभग 42 अरब डॉलर का व्यापार अचानक संकट में आ गया. लेकिन इस संकट ने एक नया खिलाड़ी भी सामने ला दिया है. पाकिस्तान. और खासतौर पर उसका कराची पोर्ट. यही वह जगह है जहां से अब एक नया गेम खेला जा रहा है, जिसे समझना बेहद जरूरी है.
हॉर्मुज बंद हुआ तो कराची बना नया ट्रांजिट हब
ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि उसका व्यापार कैसे जारी रखा जाए. खाड़ी देशों के साथ उसका जो व्यापार था, वह हॉर्मुज के जरिए ही होता था. लेकिन जब वही रास्ता बंद हो गया, तो मजबूरी में उसे वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़े. यहीं पाकिस्तान का कराची पोर्ट सामने आया.
अचानक से कराची एक ट्रांजिट हब बन गया. वहां बड़ी संख्या में कंटेनर उतरने लगे. फिर उन्हें दूसरी जहाजों के जरिए आगे भेजा जाने लगा.

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डेटा बताते हैं कि इस दौरान मार्च के महीने के केवल 24 दिनों में कराची पोर्ट पर 8313 कंटेनर ट्रांसशिपमेंट के लिए उतारे गए. ये आंकड़े 2025 के दौरान कुल ट्रांसशिपमेंट से ज्यादा है. यानी जो काम एक साल में होता था, वह अब कुछ हफ्तों में हो रहा है. इस दौरान यहां 133 जहाजों ने अपने लंगर डाले.
डॉन अखबार के मुताबिक आधिकारिक डेटा के अनुसार, इस दौरान अकेले पोर्ट कासिम में डीपी वर्ल्ड के संचालित कासिम इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल ने 4328 ट्रांसशिपमेंट कंटेनर संभाले जो फरवरी की तुलना में 2302 फीसद की बढ़ोतरी है.
इस अचानक बढ़ी जहाजों की भीड़ से हालात ये हो गए कि कराची पोर्ट और पोर्ट कासिम के पास लंगर के एरिया में कच्चे तेल, पाम ऑयल, कोयला और अन्य कार्गो के 17 शिपमेंट को कुछ दिनों का इंतजार भी करना पड़ा.
रोजाना कार्गो हैंडलिंग में भी रिकॉर्ड?
कराची पोर्ट पर, 31 मार्च को रोजाना कार्गो हैंडलिंग 168,850 टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल की इतनी ही अवधि के दौरान यह 57,198 टन थी. कराची पोर्ट ट्रस्ट (KPT) के डेटा के अनुसार, यह यहां गतिविधियों में अचानक आई तेजी का संकेत है.
अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर कंटेनर वाला कार्गो ले जाने वाले जहाजों को खाड़ी के बड़े ट्रांसशिपमेंट हब संयुक्त अरब अमीरात के जेबेल अली, फुजैराह और खोर फक्कन, और ओमान के सलालाह से यहां भेजा जा रहा है.
कराची पोर्ट ट्रस्ट के प्रवक्ता शारिक अमीन फारूकी ने अरब न्यूज से बताया कि बड़ी संख्या में ट्रांसशिपमेंट कार्गो को खाड़ी देशों के बंदरगाहों से कराची पोर्ट भेजा जा रहा है.
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क्यों कराची? क्या है इसकी ताकत
कराची पोर्ट पाकिस्तान का सबसे बड़ा समुद्री गेटवे है. यह देश के कुल आयात और निर्यात का बड़ा हिस्सा संभालता है. यहां पर कई आधुनिक टर्मिनल हैं, जिनमें से एक है पाकिस्तान इंटरनेशनल कंटेनर जो पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड इकलौती पोर्ट ऑपरेटर है और सालाना 7.5 लाख 20 फीट वाले कंटेनर हैंडल करने की क्षमता रखती रही है.
इसके मुताबिक कराची पोर्ट की कुल क्षमता 60 लाख कंटेनर सालाना तक पहुंच सकती है. यानी इस समय कराची पोर्ट जितने कंटेनर हैंडल कर रहा है उससे कहीं अधिक क्षमता इसके पास मौजूद है.

जहाज कराची की ओर क्यों मुड़ रहे हैं?
ईरान-अमेरिका तनाव के चलते हॉर्मुज और खाड़ी के आसपास के इलाकों में जहाजों के लिए खतरा बढ़ गया. बीमा कंपनियों ने प्रीमियम बढ़ा दिए थे. कई शिपिंग कंपनियों ने इन रास्तों से दूरी बनानी शुरू कर दी थी.
ऐसे में कराची एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा. यह उन खतरनाक समुद्री संकरे रास्ते से बाहर है, जहां ड्रोन हमले या सैन्य टकराव का खतरा ज्यादा है. इसी वजह से बड़े-बड़े शिपिंग लाइन उस दौरान अपने जहाज कराची की तरफ मोड़ रहे थे.
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ईद में भी चालू, फीस में कटौती, 24 घंटे ऑपरेशन
पाकिस्तान सरकार ने भी इस मौके की नजाकत को समझते हुए उसे कैश करने की पूरी कोशिश की. मार्च में सरकार ने पोर्ट फीस में 60 प्रतिशत तक की छूट दी. जहाजों के लिए कराची पोर्ट पर रुकने के लिए ली जाने वाली फीस भी कम किए गए. इससे शिपिंग कंपनियों को कराची आना और सस्ता पड़ने लगा.
इतना ही नहीं, 138 साल के इतिहास में पहली बार कराची पोर्ट को ईद के दिन भी चालू रखा गया. मकसद साफ था कि किसी भी हालात में व्यापार रुकने नहीं चाहिए.
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ पाकिस्तान या ईरान तक सीमित नहीं है. इसका असर दुबई के जेबेल अली और ओमान के सलालाह जैसे बड़े ट्रांजिट हब्स पर भी पड़ा है. अरब न्यूज की रिपोर्ट बताती है कि शिपिंग कंपनियां जेबेल अली और सालालाह पोर्ट जैसे बंदरगाहों को अस्थायी तौर पर छोड़ने लगीं.
मार्च में कराची समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण हब बन गया, जहां जहाज अपना माल उतारते और फिर दूसरे जहाजों के जरिए उसे आगे भेजा जाता.
ग्वादर और कराची: पाकिस्तान का डबल गेम
कराची के अलावा ग्वादर पोर्ट भी इस पूरे खेल में अहम हो सकता है. दोनों पोर्ट हॉर्मुज जैसे संकरे और संवेदनशील रास्तों से बाहर हैं. पाकिस्तान अब खुद को एक वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर पेश कर रहा है. खासकर तेल और LPG के व्यापार के लिए.
यह सिर्फ एक अस्थायी स्थिति नहीं है. अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहा, तो पाकिस्तान दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट के बीच एक स्थायी ट्रांजिट हब बन सकता है.
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कराची पोर्ट का बांग्लादेश कनेक्शन
बीते वर्ष अक्टूबर के महीने में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को एक बड़ा ऑफर दिया था. उसने कहा था कि वह कराची पोर्ट के जरिए जूट और अन्य समानों के निर्यात में उसकी मदद करेगा.
यह वो समय था जब भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव अपने चरम पर था. इस वजह से समूचा व्यापार ठप्प पड़ा हुआ था. पाकिस्तान के यह कदम दिखाता है कि वो न केवल मौजूदा संकट का फायदा उठा रहा, बल्कि लॉन्ग टर्म ट्रेड नेटवर्क बनाने की कोशिश में भी लगा है.
क्या यह बदलाव स्थायी है?
अब एक बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बदलाव सिर्फ युद्ध तक सीमित रहेगा या लंबे समय तक चलेगा. जानकारों की मानें तो ईरान के साथ अमेरिका ने भले ही दो हफ्ते के लिए सीजफायर का एलान कर दिया है लेकिन युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है.
अगर यह युद्ध आज खत्म भी हो जाए तो शिपिंग रूट्स को सामान्य होने में कम से कम तीन महीने का वक्त लगेगा. ऐसे में पाकिस्तान को एक शिपिंग ट्रांजिट के रूप में खुद को स्थापित करने का मौका मिल जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी कहती है कि 2026 में वैश्विक व्यापार की ग्रोथ घटकर 1.5 से 2.5 प्रतिशत रह सकती है. ऐसे में जो देश सप्लाई चेन को संभाल पाएंगे, वही आगे बढ़ेंगे.
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भारत के लिए क्या मायने?
भारत के लिए यह एक रणनीतिक चुनौती भी है. अगर कराची और ग्वादर मजबूत ट्रांजिट हब बनते हैं, तो इसका असर भारत के पश्चिमी तट के पोर्ट्स पर पड़ सकता है. साथ ही, यह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भी एक नया बूस्ट हो सकता है.
ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान पैदा हुए इस अवसर को पाकिस्तान ने पहचाना और कराची पोर्ट के जरिए खुद को एक नए ट्रांजिट हब के रूप में पेश किया.
तो भारत लॉजिस्टिक में क्या कर रहा है?
भारत में भी इस सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी जैसी सरकारी पहलें इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बना रही हैं और लागत कम कर रही हैं.
भारत में इस सेक्टर ने 2.2 करोड़ से अधिक लोग काम करते हैं. साथ ही यह लाखों नई नौकरियां भी पैदा कर रहा है.
बता दें कि इनलैंड वॉटरवेज ने 2024-25 के लिए 145.5 मिलियन टन के रिकॉर्ड कार्गो की रिपोर्ट दी है, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है.
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