- पाकिस्तान ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें 40-55% बढ़ाने के 24 घंटे के भीतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फ्री किया.
- ईरान युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही बाधित होने के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया.
- IMF के दबाव और आर्थिक संकट के बीच सरकार राहत और सख्ती दोनों रास्तों पर चलने को मजबूर.
पाकिस्तान में देर रात पेट्रोल की कीमतें बेतहाशा बढ़ाए जाने के बाद आज पब्लिक ट्रांसपोर्ट को एक महीने के लिए फ्री करने का एलान किया गया. अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि राजधानी इस्लामाबाद और सबसे बड़े प्रांत पंजाब में अगले 30 दिनों के लिए सरकारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह फ्री रहेंगे. यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब देश में ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा की कीमतें पूरे विश्व में लगभग 50 फीसद तक बढ़ चुकी हैं.
सरकार ने बीती रात पेट्रोल की कीमतों में 42.7 फीसद जबकि डीजल के दाम 54.9 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं. इस फैसले ने लोगों की जेब पर सीधा हमला किया और देखते ही देखते सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. लाहौर समेत कई शहरों में लोगों ने इसे 'पेट्रोल बम' कह रहे हैं तो प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता अब इस झटके को सहन नहीं कर सकती.

पाकिस्तान में पेट्रोल पंप पर लगी भीड़
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30 दिन मुफ्त रहेंगे सार्वजनिक परिवहन
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने बताया कि इस्लामाबाद में एक महीने तक सभी सरकारी बसें मुफ्त चलेंगी. इस फैसले का बोझ सरकार पर करीब 350 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का पड़ेगा.
पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने भी इसी तरह का कदम उठाते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट फ्री करने और ट्रकों-बसों के लिए टार्गेटेड सब्सिडी देने की घोषणा की. कराची समेत सिंध प्रांत में भी मोटरसाइकिल चालकों और छोटे किसानों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया गया है.
ईरान-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है. खाड़ी में चल रहे इस युद्ध के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल वाहक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. यह वही रास्ता है जहां से दुनिया की करीब 20 फीसद ऊर्जा सप्लाई गुजरती है. ऐसे में उन देशों में तेल की कीमतों में उछाल आना तय था जो आयात पर निर्भर हैं.

हॉर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया भर की करीब 20 फीसद तेल वाहक जहाजों की आवाजाही होती है जो लगभग ठप हो गई है
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आर्थिक दबाव और IMF की शर्तें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ (International Monetary Fund) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन की दिक्कतों का दोहरा दबाव पड़ेगा. पाकिस्तान में 25 फीसद आबादी गरीबी रेखा के नीचे जी रही है. पाकिस्तान पहले ही आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. हाल ही में IMF ने 1.2 अरब डॉलर के एक नए पैकेज पर सहमति दी है लेकिन इसके साथ कड़े आर्थिक फैसले भी जुड़े हुए हैं.
बचत के लिए सख्त कदम
सरकार ने सिर्फ ट्रांसपोर्ट फ्री करने तक ही सीमित नहीं रखा. ईंधन बचाने के लिए कई और फैसले भी किए गए हैं. पाकिस्तान सरकार ने सरकारी दफ्तरों में 4 दिन का वर्क वीक किया है तो स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाई गई हैं. साथ ही कई क्लासेज को ऑनलाइन किया गया है. इन कदमों का मकसद कम से कम ईंधन की खपत और ज्यादा से ज्यादा बचत करना है.
जनता का गुस्सा और सरकार की चुनौती
लाहौर में प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार ने रातों-रात जनता पर महंगाई का बम गिरा दिया. उनका आरोप है कि यह फैसला IMF के दबाव में लिया गया है, न कि युद्ध की वजह से. सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब यह है कि वह राहत और सख्ती के बीच संतुलन कैसे बनाए. क्योंकि एक तरफ अर्थव्यवस्था को संभालना जरूरी है, तो दूसरी तरफ जनता का गुस्सा भी लगातार बढ़ रहा है.
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