- इजरायल-ईरान के बीच लड़ाई रुक-रुक कर फिर शुरू हो रही है, जिससे स्थायी शांति अभी दूर दिख रही है.
- अमेरिका दोनों देशों पर दबाव तो डाल सकता है पर उनकी सैन्य रणनीति पर कंट्रोल नहीं है. वो फैसले खुद ले रहे हैं.
- ट्रंप का प्रभाव सीमित दिख रहा है और हालात लगातार बिगड़ने से सवाल उठ रहा है कि उन्होंने कंट्रोल खो दिया है.
मध्य-पूर्व में ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका के युद्ध में शांति की उम्मीदें बार-बार टूट रही हैं और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गतिरोध बरकरार है. पिछले कुछ दिनों से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ये कह रहे हैं कि ईरान के साथ शांति प्रस्ताव पर बात चल रही है और जल्द ही समझौता होने वाला है लेकिन कभी ईरान तो कभी इजराइल सीजफायर को तोड़ते हुए दिख रहे हैं, ऐसे में मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीद हर कुछ दिनों में टूट जाती है. अस्थायी सीजफायर के बीच यह युद्ध अब 100 दिनों से ऊपर पहुंच चुका है. और इसे नहीं रोक पाने की स्थिति में अमेरिका, खासकर डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या ट्रंप वाकई इस युद्ध को कंट्रोल कर रहे हैं, या हालात उनके हाथ से निकल चुके हैं?

हिज्बुल्लाह लड़ाके
Photo Credit: AFP
ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध में क्या हो रहा है?
ताजा घटनाक्रम में सोमवार (8 जून 2026) को ईरान और इजराइल दोनों ने कहा था कि ट्रंप की अपील के बाद वो एक दूसरे पर हमला करना रोक देंगे लेकिन तेहरान ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इजराइल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले जारी रखे तो वो अपने हमले फिर शुरू कर देगा. लेकिन कुछ ही समय बाद ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिका के हालिया हमलों के जवाब में बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए, जबकि जॉर्डन ने ईरान से आई पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया.
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार (09 जून 2026) को बताया कि होर्मुज में गश्त कर रहे अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया है, और इस पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि हमले में हेलीकॉप्टर का चालक बच गया है. पर जवाबी कार्रवाई के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी. बाद में अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर बताया कि उसने होर्मुज के पास ईरान के एयर डिफेंस, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सर्विलांस रडार साइट्स पर हमले किए हैं. बताया गया कि ये हमले अमेरिकी नौसेना और एयरफोर्स ने किए हैं.
— U.S. Central Command (@CENTCOM) June 10, 2026
बीते कुछ दिनों से ईरान और इजराइल मध्य-पूर्व में मिसाइल और ड्रोन से हमले करते रहे हैं. इन हमलों ने मध्य-पूर्व में युद्ध को खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए शांति समझौते की कोशिशों को मुश्किलों में ला दिया है.
ये भी पढ़ें: अब्राहम अकॉर्ड्स क्या है? ट्रंप क्यों कर रहे हैं इसकी वापसी की कोशिश और मुश्किल क्यों दिख रहा उनका ये सपना

इजरायल ने लेबनान में हमला जारी रखा
Photo Credit: AFP
गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक टकराव के बाद ट्रंप ने दोनों पक्षों से हमले रोकने की अपील की. कुछ समय के लिए इस पर रोक तो दिखी पर यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
डोनाल्ड ट्रंप लगातार दाव करते रहे कि इजराइल और ईरान दोनों शांति चाहते हैं और जल्द ही एक सीजफायर की घोषणा की जाएगी, इसे लेकर बातचीत अपने अंतिम दौर में है. हालांकि, बीच में उन्होंने यह दावा भी कर दिया कि फैसले वो ही लेते हैं.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने इजराइल से कहा कि उसे अमेरिका की शर्तों के हिसाब से सीजफायर मानना ही होगा. बताया जा रहा है कि बातें यहीं से बिगड़ गईं क्योंकि इजराइल और ईरान दोनों देश अपने फैसले खुद ही कर रहा है.
अमेरिकी न्यूज एक्सियोस की इनसाइड रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप ने नेतन्याहू को कई बार संयम बरतने के लिए कॉल किया, लेकिन इजराइल ने इसके बाद भी हमले जारी रखे. उसके निशाने पर लेबनान में हिज्बुल्लाह और ईरान से जुड़े ठिकाने रहे. यानी ये स्पष्ट है कि ट्रंप दबाव तो बना सकते हैं लेकिन इजराइल को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं.
iran is using hezbollah
— ian bremmer (@ianbremmer) June 8, 2026
to complicate the ceasefire.
more actors. more fronts.
more ways for diplomacy to fail.@gzeromedia pic.twitter.com/Gfd5GaOAPL
कंट्रोल किसके हाथ में है, एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
अमेरिकी राजनीति के एक्सपर्ट और यूरेशिया ग्रुप के प्रमुख इयान ब्रेमर ने कहा कि मध्य-पूर्व अब कई मोर्चे पर चल रहे संघर्ष में बदल चुका है और अमेरिका वहां वैश्विक पुलिस की भूमिका में नहीं रहा. मध्य-पूर्व की क्षेत्रीय ताकत वहां खुद फैसले ले रहे हैं. वो कहते हैं, "ईरान सीजफायर में देरी करना चाहता है क्योंकि वह मानता है कि वह मजबूत स्थिति में है. वे कहते हैं कि हिज्बुल्लाह ईरान को कंट्रोल कर रहा है. साथ ही वे यह भी कहते हैं कि ईरान जानबूझ कर हिज्बुल्लाह को इजराइल में मिसाइल दागने के लिए कह रहा है क्योंकि वो जानता है कि इजराइल इस पर प्रतिक्रिया देगा."
"अब ट्रंप ने इजराइल को यह सार्वजनिक रूप से कहा है कि वो ईरान के किसी भी हमले की प्रतिक्रिया न दे, लेकिन इजराइल ने उनकी एक नहीं सुनी. उसने ईरान पर जवाबी हमले किए, तो ईरान को मौका मिल गया और उसने कई मिसाइलें चला दीं. ऐसे में ट्रंप के सीजफायर की कोशिशें फिलहाल दूर दिखती हैं."
अमेरिका में नीति निर्माताओं को रणनीतियों से जुड़े शोध मुहैया कराने वाली रिसर्च एजेंसी ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन का कहना है कि इस तरह के संघर्ष में बाहरी ताकतें केवल हमले कम कर सकती हैं लेकिन रोक नहीं सकतीं क्योंकि दोनों देश अपने अस्तित्व की रणनीतियों के मुताबिक चलते हैं. ऐसे में अमेरिका यहां बेशक मैनेजर की हैसियत से है पर वह इन दोनों देशों को पूरी तरह कंट्रोल नहीं कर सकता है.
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक ऐंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) का मानना है कि एक बार अगर लड़ाई फिर शुरू हो गई तो उसे रोकना बेहद मुश्किल होगा.
काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन के एक्सपर्ट का मानना है कि इस संघर्ष में शामिल सभी देश अपने-अपने फायदे के हिसाब से सीजफायर तोड़ भी सकते हैं और मान भी सकते हैं.
ये भी पढ़ें: बड़बोले ट्रंप के ईरान पर भाषण में बड़े-बड़े दावे गलत, फैक्ट चेक में सामने आया सच
28 फरवरी से शुरू हुई जंग यहां तक कैसे पहुंची?
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 से हुई जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े हमले किए. ईरान ने जवाब में मिसाइल और ड्रोन हमले किए. और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव फैल गया. इसके बाद पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ीं, जिसमें एशिया सबसे अधिक प्रभावित रहा.
फिर आई सीजफायर की बात और कभी पूरी तरह युद्ध को रोकने की बात हुई तो कभी आंशिक समझौते की बात और फिर कुछ न कुछ कारण बता कर एक-दूसरे पर मिसाइल, ड्रोन से हमले हुए. यही पैटर्न अब स्थायी रूप से अस्थिरता का कारण बन चुका है. बताया जा रहा है कि खुद ट्रंप भी अब सतर्कता बरत रहे हैं.
द वाल स्ट्रीट जरनल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने अपने सहालकारों से कहा है कि जब तक किसी अमेरिकी सैनिक सीधे तौर पर हताहत नहीं होते, वो यु्द्ध में नहीं जाएंगे. इसका मतलब स्पष्ट है कि अमेरिका अब इस संघर्ष को और बढ़ाने से बच रहा है और कूटनीति को वरीयता दे रहा है. पर यह स्थिति इस पूरे मामले को और भी अप्रत्याशित बना रही है.
ये भी पढ़ें: अमेरिका ने ईरान पर किया हमला, धमाकों से दहले होर्मुज से लगे शहर, तेहरान का भी काउंटर अटैक

होर्मुज स्ट्रेट
Photo Credit: NDTV
तेल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ग्लोबल असर
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं. शिपिंग रूट्स पर लगातार दबाव बना हुआ है, अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की निगरानी कर रहा है और इस वक्त इस समुद्री मार्ग से टैंकर ले जाना सबसे अधिक खतरे का काम बन गया है. ऐसे में काउंसिल फॉर फॉरेन रिलेशन के मुताबिक अगर यह स्थिति आने वाले कुछ महीने तक भी बरकरार रही तो यह एक बड़े वैश्विक तेल संकट का कारण बन सकता है.
तो क्या ट्रंप ने कंट्रोल खो दिया है?
कई कोशिशों और ट्रंप के दावों के बीच अमेरिका स्थायी सीजफायर करवाने में अब तक नाकाम रहा है. तो अगर पूरी तरह मध्य-पूर्व की स्थिति पर नियंत्रण की बात करें तो 'हां', ट्रंप कंट्रोल खो रहे हैं.
इजराइल अपनी मर्जी से सैन्य कार्रवाई कर रहा है, तो ईरान जवाबी रणनीति अपना रहा है. और यह अस्थायी सीजफायर बार-बार टूट रहा है.
बेशक कूटनीति के लिहाज से ट्रंप अब भी अहम हैं. इन दोनों देशों के हर हमले के बाद ट्रंप सीधे हस्तक्षेप कर रहे हैं. सीजफायर को लागू करने की लगातार कोशिशें चल रही हैं. पर कुल मिलाकर जानकार यह मानते हैं कि यह युद्ध अब भी चल रहा है और कोई भी इसे पूरी तरह कंट्रोल नहीं कर पा रहा. मध्य-पूर्व में ट्रंप की अस्थायी कूटनीति प्रभावी है पर स्थिति पूरी तरह उनके नियंत्रण में नहीं है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं