- शहबाज शरीफ ने 14 अगस्त को भारत को धमकी दी, लेकिन पीएम मोदी ने उनकी बात का कोई जवाब नहीं दिया
- पाकिस्तान ने अपनी स्वतंत्रता दिवस की तारीख 15 अगस्त से 14 अगस्त पर इसलिए बदल दी ताकि भारत से अलग दिख सके
- भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं और विकास पर जोर दिया गया, जबकि पाकिस्तान ने धमकी भरे भाषण दिए
पाकिस्तान हर बात के लिए भारत की तरफ देखता है. 14 अगस्त को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को लेकर अनाप-शनाप बातें की. अपनी आवाम को ये बताने की कोशिश की कि वो बहुत मजबूत नेता और भारत को धमकी दे सकते हैं. उन्हें उम्मीद थी कि भारत की तरफ पीएम मोदी उन्हें 15 अगस्त को लाल किले से जवाब देंगे. मगर पीएम मोदी ने उनकी बात का लोड ही नहीं लिया. अब पाकिस्तान की आवाम और मीडिया ही सवाल पूछ रही है कि क्या आजादी का दिन अपने पड़ोसियों को धमकी देने के लिए होता है?
आजादी का दिन कौन सा-इस पर बहस
पाकिस्तानी यूट्यूबर आरजू काजमी ने पूछा कि भारत और पाकिस्तान जब एक ही देश थे और बंटवारे से अलग हुए तो दोनों की आजादी के डेट अलग क्यों? इस पर पत्रकार वसीम अल्ताफ ने कहा कि आजादी तो एक ही समय में मिली थी. 3 जून के बंटवारे वाले प्लान में भी डेट 15 अगस्त ही है. पाकिस्तान जब बना तो कुछ डाक टिकट जारी किए गए, उस पर भी 15 अगस्त तारीख लिखी हुई है. 1948 में पाकिस्तान में 15 अगस्त को ही आजादी मनाई गई. फिर उसी साल कैबिनेट की मीटिंग हुई. उसमें बात उठी कि भारत भी 15 अगस्त को आजादी मनाता है और हम भी मनाते हैं तो इसको 14 अगस्त कर दिया जाए. तो भारत से अलग दिखने के लिए पाकिस्तान ने अलग तारीख कर दी.

स्वतंत्रता दिवस फौजी इवेंट बना
आरजू काजमी ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने सिर्फ और सिर्फ अपने भाषण में भारत और अफगानिस्तान पर फोकस किया. उन्हें धमकियां दीं. क्या ये सही मौका है? वसीम अल्ताफ ने कहा कि इस समारोह में सिर्फ फौजी इवेंट बना दिया. हमारे लोगों ने तो आजादी की लड़ाई ही नहीं लड़ी. वो तो कांग्रेस ने लड़ी. हम तो आजादी मिलने के बाद अलग हुए. भारत के स्वतंत्रता दिवस में युवाओं पर फोकस दिखा. विकसित भारत 2047 की बात हुई. इस बार वंदे मातरम को भी शामिल किया गया. तो उनका फोकस फ्यूचर और डेवलपमेंट के ऊपर था. वहां जंगी बातें नहीं हुईं. जैसे हमारे यहां हुआ.
एक अलग न्यूज चैनल पर इस बात पर बहस हुई कि पीएम मोदी खुद नीचे झुक गए लेकिन अपने देश की बेटी को नहीं झुकने दिया. दरअसल, पीएम मोदी अपने भाषण के बाद बच्चों से मिलते हैं. इस बार भी बच्चों से जब वो मिल रहे थे तो एक बच्ची का कैप जमीन पर गिर गया. बच्ची उठाने के लिए नीचे झुकने लगी, मगर पीएम मोदी ने उसे रोककर खुद जमीन से कैप उठाई और बच्ची को पहना दिया. कई चैनलों पर पीएम मोदी की सुरक्षा और उनके पहनावे पर भी चर्चा हुई. इसके साथ ही फ्री कोचिंग वाले ऐलान की भी पाकिस्तान में काफी चर्चा हुई. यहां तक की स्वतंत्रता दिवस की बधाई देने के लिए किन-किन विदेशी नेताओं ने भारत को दी इस पर भी चर्चा हुई. सबसे ज्यादा चर्चा इजरायल के पीएम नेतन्याहू को लेकर हुई. पाकिस्तानी पत्रकारों का मानना है कि भारत-इजरायल कुछ बड़ा करने की तैयारी में हैं.

वंदे मातरम और आर्थिक ताकत की गूंज
पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट कमर चीमा ने भारत के सरकारी कार्यक्रमों में वंदे वातरम गाना अनिवार्य किए जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि क्या मोदी चुनाव की तैयारी कर रहे हैं? पाकिस्तान के लिए ये महत्वपूर्ण इसलिए है कि हमें पता है कि मोदी के रहते भारत-पाकिस्तान के रिश्ते नहीं सुधरने वाले. इसके उलट क्विक शॉट्स नाम के यूट्यूब चैनल पर फायजा नाम की लड़की ने कहा कि भारत-पाकिस्तान में बहुत अंतर है. हम उनसे बहुत पीछे हैं. उनकी दुनिया में चौथी-पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. उनके दूसरे देशों से रिश्ते अच्छे हैं. हम भी कर रहे हैं, पर हम कर्ज में हैं. यही कारण है कि यहां महंगाई बहुत है. वो भी हमारे तरह ही हैं. अगर संबंध अच्छे हो जाएं तो बहुत अच्छी बात हो जाए. इसी तरह एक शख्स ने कहा कि हमारे पास बहुत सारे अवसर थे, पर हमने उसका लाभ नहीं उठाया. भारत का 1 रुपया पाकिस्तान में 3-4 रुपये का है. उनकी इंडस्ट्री और एजुकेशन इतनी अच्छी है.
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