- प्रीति कुमारी ने छह माह की बेटी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की
- पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास की, बाद में दूसरी कोशिश में उपखंड अधिकारी बनने का मुकाम हासिल किया
- प्रीति ने जवाहर नवोदय विद्यालय से 12वीं और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री प्राप्त की है
Success Story Bihar: सुबह नौ से शाम पांच बजे तक की नौकरी, छह माह की बेटी और परिवार की जिम्मेदारी; इन सबके बावजूद अफसर बनने का ख्वाब नहीं भूलीं और न ही मेहनत करना छोड़ा. नतीजा यह रहा कि इसी साल जून में बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा पास करके सरकारी शिक्षिका से उपखंड अधिकारी बन गईं. यह कहानी बिहार के नवादा की बेटी और मुजफ्फरपुर की बहू प्रीति कुमारी की है.
प्रीति ने बीपीएससी में पूरे राज्य में 166वीं रैंक हासिल की है. खास बात यह है कि पहले प्रयास में प्रीति प्रारंभिक परीक्षा के बाद आगे के चरण पास नहीं कर पाई थीं. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और फिर कोशिश की. दूसरे प्रयास में एसडीएम बनने का सपना पूरा हो गया. प्रीति की कहानी सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा में सफलता की कहानी नहीं, बल्कि शुरुआती असफलता के बाद शानदार कमबैक और नौकरी के साथ-साथ अफसर बनने की तैयारी, मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच ख्वाब पूरा करने का एक मिसाल है.

Success Story Bihar bpsc-70th topper priti kumari sdm rank 166
जवाहर नवोदय विद्यालय से JNU तक का सफर
बता दें कि प्रीति ने 12वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, दरभंगा से पूरी की. भुवनेश्वर के रीजनल कॉलेज से बीएससी और बीएड की डिग्री ली. इसके बाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से लाइफ साइंस में एमएससी की पढ़ाई की. करीब तीन वर्षों तक वह नवोदय विद्यालय और दिल्ली में सरकारी शिक्षिका के रूप में कार्यरत रहीं.
बदली रणनीति और पाया मुकाम
शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ गईं. ऐसे में प्रतियोगी परीक्षा के लिए घंटों एक जगह बैठकर पढ़ना आसान नहीं था. उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदला. जब जितना समय मिला, उतने समय में ही पढ़ाई की. प्रीति का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में सिर्फ लंबे समय तक पढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उपलब्ध समय का सही इस्तेमाल, निरंतरता और अपनी कमजोरियों पर काम करना भी उतना ही जरूरी है. यही रणनीति उनकी दूसरी कोशिश में काम आई.
शादी के बाद नई पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद प्रीति ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी. वह बताती हैं कि पति और परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो नौकरी और बेटी की जिम्मेदारी के साथ तैयारी करना काफी मुश्किल होता. इसलिए उनकी सफलता में उनकी मेहनत के साथ-साथ परिवार के भरोसे की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
परिवार में शिक्षा का माहौल, भाई-बहन भी कर रहे बेहतर
प्रीति की मां अनिता कुमारी गृहिणी हैं. तीन भाई-बहनों में प्रीति सबसे बड़ी हैं. उनकी छोटी बहन यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं, जबकि उनके भाई ने नीट परीक्षा पास की है. प्रीति का मायका नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड के भोरमबाग में है.
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