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'नीरज चोपड़ा की तरह दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनना...' 13 साल की गोल्फर ओजस्वनी सारस्वत ने दिया बड़ा बयान

13 साल की ओजस्वनी सारस्वत ने 'विमेंस इंडियन ओपन' में 'कट' हासिल करके इतिहास रच दिया है. 13 साल की यह गोल्फर नीरज चोपड़ा की तरह दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनना चाहती हैं.

'नीरज चोपड़ा की तरह दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनना...' 13 साल की गोल्फर ओजस्वनी सारस्वत ने दिया बड़ा बयान
13 साल की गोल्फर ओजस्वनी सारस्वत ने दिया बड़ा बयान

13 साल की ओजस्वनी सारस्वत ने लेडीज यूरोपियन टूर इवेंट, 'विमेंस इंडियन ओपन' में 'कट' हासिल करके इतिहास रच दिया है. वह ऐसा करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला गोल्फर बन गई हैं. लेकिन इस युवा गोल्फर का लक्ष्य इससे भी बड़ा है- अपने आदर्श नीरज चोपड़ा की तरह दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनना और ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना. ओजस्वनी, महिला गोल्फ के इतिहास में LET इवेंट में 'कट' हासिल करने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं. उनसे पहले आर्या जुतानुगार्न ने 2008 में 12 साल की उम्र में 'फिनएयर मास्टर्स' में 'कट' हासिल किया था.

रविवार सुबह डीएलएफ गोल्फ एंड कंट्री क्लब में न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए ओजस्वनी ने कहा,"मैं कट हासिल करने से बहुत खुश हं. यह तो बस शुरुआत है. मेरा लक्ष्य भारत में और फिर पूरी दुनिया में सबसे बेहतरीन खिलाड़ी बनना है. मैं एक दिन दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनना चाहती हूं. मैं भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं और अपने देश के लिए ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना चाहती हूं. यह मेरा सबसे बड़ा सपना है."

उन्होंने कहा,"मैं नीरज चोपड़ा से प्रेरित हूं क्योंकि वह ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं और मैंने उनकी मानसिकता को देखा है. मुझे लगता है कि सभी खेल काफी हद तक एक जैसे होते हैं, इसलिए खिलाड़ियों की मानसिकता भी लगभग एक जैसी ही होती है. जब उन्होंने जीत हासिल की, तो मैं उनसे बहुत प्रेरित हुई."

उन्होंने आगे कहा,"हीरो विमेंस इंडियन ओपन का निमंत्रण मिलना मेरे लिए बहुत रोमांचक था, क्योंकि मैं पहली बार डीएलएफ में खेल रही थी. मैंने पिछले साल यह टूर्नामेंट देखा था और अब मैं इसमें खेल रही हूं, जो मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. 'कट' हासिल करना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा है."

जब उनसे पूछा गया कि दुनिया के सबसे मुश्किल और चुनौतीपूर्ण गोल्फ कोर्स में से एक पर 'कट' हासिल करके उन्होंने कैसे इतिहास रचा, तो ओजस्वनी ने इसका श्रेय अपने 'स्विंग' (गोल्फ शॉट मारने के तरीके) में किए गए बदलावों को दिया.

उन्होंने कहा,"मुझे लगता है कि मेरा दूसरा राउंड काफी अच्छा रहा और मुझे सात 'बर्डी' (गोल्फ में एक अच्छा स्कोर) मिलीं, जिससे बहुत बड़ा फर्क पड़ा. यहां अगर आप कोई गलती करते हैं, तो गेंद 'रफ' (मुश्किल इलाके) में चली जाती है. मैंने अपने 'स्विंग' में कुछ बदलाव किए, ज्यादा नहीं सोचा, और चीजें अपने आप सही होती गईं." 

जब उनसे पूछा गया कि 13 साल की उम्र में उन्होंने बिना किसी दबाव या उम्मीद के कैसे खेला, तो ओजस्वनी ने कहा,"मुझे लगता है कि सबसे छोटी होने के नाते, मुझसे खुद भी कोई खास उम्मीदें नहीं थीं. मैंने बस इसी बात को ध्यान में रखा और खुलकर खेला." "मुझे रोज़ाना 5 से 6 घंटे गोल्फ़ खेलना पसंद है, और मुझे इस खेल से बहुत लगाव है. शायद यही वजह है कि मैं हर दिन वापस आती हूं. बस गेंद को उड़ते हुए देखकर ही मुझे खुशी मिल जाती है."

अपनी खूबियों के बारे में उन्होंने कहा,"मुझे लगता है कि मेरी 'पुटिंग' और 'ड्राइवर' (शॉट्स) मेरी ताकत हैं, लेकिन कुल मिलाकर मैं हर तरह के शॉट्स में अच्छी हूं. यह कोर्स काफी चुनौतीपूर्ण और मुश्किल है, क्योंकि बड़े-बड़े चैंपियन भी कह चुके हैं कि यहां अपने खेल को बनाए रखना बहुत कठिन होता है."

जब उनसे पूछा गया कि वह लगातार 'फेयरवे' पर गेंद कैसे पहुंचा लेती हैं, तो ओजस्वनी ने कहा,"मुझे लगता है कि यह सब तकनीक और माइंडसेट का खेल है. अगर हम फेयरवे को एक खास कोण से देखें, तो वे काफी चौड़े लगते हैं, लेकिन अगर हम उनके आस-पास के हिस्सों को देखें, तो वे बहुत तंग लगने लगते हैं. बस फेयरवे और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने से काम आसान हो जाता है."

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