Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत ने कहा है कि F&O ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों के नुकसान की बड़ी वजह टैक्स और ट्रांजैक्शन कॉस्ट हैं. उनके मुताबिक, टैक्स ट्रांजैक्शन पर नहीं, बल्कि सिर्फ इनकम पर लगना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि आम निवेशकों को हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और हेज फंड्स के मुकाबले बराबरी का मौका मिलना चाहिए.
ट्रेडर्स के नुकसान की वजह सिर्फ ट्रेडिंग नहीं
NDTV World Summit 2026 में निखिल कामत ने F&O ट्रेडिंग में रिटेल निवेशकों के नुकसान पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि अक्सर यह बताया जाता है कि 80% या 90% ट्रेडर्स को नुकसान होता है, लेकिन यह कम ही समझाया जाता है कि उनका पैसा आखिर जा कहां रहा है.
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कहां जा रहा निवेशकों का डूबा पैसा?
कामत के मुताबिक, नुकसान का बड़ा हिस्सा सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), ब्रोकरेज, ट्रांजैक्शन चार्ज, सेबी फीस, सेस और इम्पैक्ट कॉस्ट जैसे खर्चों में चला जाता है. उन्होंने कहा कि जिस ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को 100 रुपये पर खरीदा जाना चाहिए, वह कई बार 101, 102 या 103 रुपये पर मिलता है. इस तरह हर ट्रेड पर निवेशक का पैसा खर्च होता है.
ट्रांजैक्शन कॉस्ट पर नहीं, सिर्फ इनकम पर लगे टैक्स
निखिल कामत ने कहा कि ट्रेडर्स पर टैक्स लगाने के तरीके में बदलाव होना चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार को ट्रांजैक्शन पर लगने वाले खर्चों और टैक्स का बोझ कम करना चाहिए, ताकि रिटेल निवेशकों के लिए मुनाफा कमाना आसान हो सके.
हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को लेकर क्या बोले?
कामत ने कहा कि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और भारतीय व विदेशी हेज फंड्स पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. इनकी ट्रेडिंग की रफ्तार आम निवेशकों से काफी तेज हो सकती है.
को-लोकेशन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी राय में ऐसी सुविधा शायद नहीं होनी चाहिए. को-लोकेशन के जरिए कुछ ट्रेडर्स को एक्सचेंज के सिस्टम के करीब रहकर तेजी से ऑर्डर देने का फायदा मिल सकता है. उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि एल्गोरिदम से दिए जाने वाले ऑर्डर के बीच रिटेल निवेशकों के ऑर्डर भी शामिल किए जाएं, ताकि ऑटोमेटेड ट्रेडिंग को अलग फायदा न मिले.
भारत में बड़े शेयर बाजार की जरूरत
निखिल कामत ने कहा कि भारत में इक्विटी निवेशकों की पहुंच अभी 5% से भी कम है. देश को Zerodha और Groww जैसे सैकड़ों ब्रोकर्स की जरूरत है. इसके साथ ही ज्यादा ट्रेडर्स, निवेशक और स्पेकुलेटर्स भी होने चाहिए.
उन्होंने कहा कि बड़े शेयर बाजार विकसित अर्थव्यवस्थाओं की पहचान रहे हैं. ऐसे बाजारों में कंपनियों के लिए लिस्ट होना और कारोबार बढ़ाने के लिए पैसा जुटाना आसान होता है. कामत के मुताबिक, भारत को भी ऐसा बड़ा और मजबूत इक्विटी बाजार बनाना चाहिए, जहां कंपनियां आसानी से बड़ी रकम जुटा सकें. इसके लिए टैक्स और दूसरे खर्चों को इस तरह बदलने की जरूरत है कि वे बाजार की ग्रोथ में रुकावट न बनें.
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