देश के कई राज्यों में H1N1 फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. वयस्कों के साथ-साथ बच्चे भी इस संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं. बच्चों को जब फीवर काफी तेज जैसे- 103, 104 हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में कई बार पैरासिटामोल जैसी दवाएं बुखार तोड़ नहीं पाती हैं. इस स्थिति में अक्सर माता-पिता घबरा जाते हैं और तरह-तरह की दवाएं बुखार तोड़ने के लिए देने लग जाते हैं, जो कुछ स्थितियों में घातक साबित हो सकता है.
दिल्ली स्थित BLK-मैक्स के प्रिंसिपल डायरेक्टर और HOD - पल्मोनोलॉजी डॉ. संदीप नायर का कहना है कि H1N1 फ्लू में कई बार बुखार काफी तेज होता है और सिर्फ पैरासिटामोल से कंट्रोल नहीं हो पाता. ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार दूसरी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, बच्चों को कोई भी दवा बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं देनी चाहिए. डॉक्टर की सलाह पर ही उन्हें दवाएं दें.
पैरासिटामोल काम नहीं कर रहा है, तो कौन सी दवा दें
डॉक्टर का कहना है कि अगर बच्चे का फीवर नहीं उतर रहा है, तो आप उन्हें डॉक्टर की सलाह पर एसीटोसीनोफीन और ब्रूफेन दे सकते हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बुखार उतारने के लिए बच्चों को एस्पिरिन देने की गलती बिल्कुल भी न करें. इससे बच्चों को नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है.
एस्पिरिन देने की गलती पड़ सकती है भारी
डॉक्टर बताते हैं कि फ्लू से बुखार को तोड़ने के लिए बच्चों को एस्पिरिन बिल्कुल भी नहीं देनी चाहिए. अगर आप ऐसी गलती करते हैं, तो इससे बच्चों को रेय सिंड्रोम (Reye's Syndrome) नामक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी का खतरा है. ये सिंड्रोम मुख्य रूप से वायरल संक्रमण के बाद बच्चों में देखा जाता है और इसका कनेक्शन एस्पिरिन के इस्तेमाल से माना जाता है.
रेय सिंड्रोम की स्थिति में बच्चों को ब्रेन और लिवर में सूजन आने का खतरा रहता है. हालांकि, ऐसे मामले काफी दुर्लभ है. लेकिन फिर भी माता-पिता या पेरेंट्स को कभी भी एस्पिरिन देने की गलती नहीं करनी चाहिए. रेय सिंड्रोम की स्थिति में बच्चे को लगातार उल्टी, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, भ्रम, दौरे पड़ना और गंभीर मामलों में बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
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बच्चों को बुखार आए, तो क्या करें?
अगर बच्चे को बुखार आए, तो सबसे पहले उन्हें पैरासिटामोल की डोज उनकी उम्र के हिसाब से दें. अगर दवा देने के बाद भी फीवर नहीं उतर रहा है, तो गीली पट्टी दें. इससे शरीर के तापमान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. ध्यान रखें कि गीली पट्टी हमेशा नॉर्मल पानी से ही दें. कभी भी काफी ठंडे पानी से गीली पट्टी न दें. वहीं, सबसे पहले पैरों पर पट्टी लगाएं, फिर माथे पर गीली पट्टी लगाएं.
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