ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट हाथ में आते ही हम में से अधिकतर लोगों की नजर सबसे पहले हीमोग्लोबिन के आंकड़े पर जाती है. अगर इसका रिपोर्ट नॉर्मल होता है, तो हम मान लेते हैं कि पूरा रिपोर्ट भी नॉर्मल है. लेकिन कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) इससे कहीं ज्यादा जानकारी देता है. इसमें कई अहम जानकारियां होती हैं, जिसमें रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स भी शामिल हैं.
इस विषय को लेकर सीके बिड़ला हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल कुमार जैन का कहना है कि CBC की रिपोर्ट को समझना बहुत ही जरूरी होता है, क्योंकि इससे न सिर्फ खून की कमी का पता लगता है बल्कि ये इंफेक्शन और कुछ ब्लड संबधी असामान्यताओं को भी बताता है. यहां जानते हैं सीबीसी ब्लड रिपोर्ट में किन-किन चीजों को देखना चाहिए-
सबसे पहले देखें हीमोग्लोबिन
हीमोग्लोबिन हमारे शरीर के रेड ब्लड सेल्स में मौजूद वह प्रोटीन है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. इसका स्तर कम होने पर एनीमिया हो सकता है. ऐसे में थकान, कमजोरी, सांस फूलना, चक्कर आना या धड़कन तेज महसूस होना जैसे लक्षण हो सकते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि आपको ये समझने की जरूरत है कि कम हीमोग्लोबिन का मतलब हमेशा सिर्फ आयरन की कमी नहीं होता. आयरन की कमी के अलावा विटामिन B12 या फोलेट की कमी, ब्लीडिंग, क्रोनिक डिजीज और अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं. इसलिए सिर्प हीमोग्लोबिन देखकर खुद से आयरन की गोलियां शुरू करना सही तरीका नहीं है.
आरबीसी और उससे जुड़े संकेतक क्यों हैं जरूरी?
डॉ. अंशुल बताते हैं कि सीबीसी रिपोर्ट में आरबीसी यानी रेड ब्लड सेल्स काउंट के साथ-साथ MCV, MCH और MCHC जैसे पैरामीटर भी दिए जाते हैं. ये रेड ब्लड सेल्स के आकार और उनमें मौजूद हीमोग्लोबिन से जुड़ी जानकारी देते हैं.
उदाहरण के लिए समझें तो MCV कम होने पर आयरन की कमी जैसे कारणों पर ध्यान दिया जाता है. वहीं, MCV बढ़ा हुआ होने पर विटामिन B12 या फोलेट की कमी जैसी स्थितियों की जांच की जरूरत पड़ सकती है.
WBC बढ़ना हमेशा गंभीर बीमारी नहीं
डॉक्टर कहते हैं कि व्हाइट ब्लड सेल्स यानि WBC शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है. संक्रमण या सूजन जैसी स्थितियों में इसकी संख्या बढ़ सकती है. दूसरी ओर कुछ परिस्थितियों में WBC कम भी हो सकता है.
यह एक आम मिथक है कि WBC बढ़ने का मतलब निश्चित रूप से कोई गंभीर बीमारी है. ऐसा नहीं है. सामान्य इंफेक्शन, स्ट्रेस, कुछ दवाएं और कई अन्य कारणों से भी WBC में बदलाव हो सकता है. इसलिए केवल एक संख्या देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है.
CBC में न्यूट्रोफिल्स, लिम्फोसाइट्स, इओसिनोफिल्स और अन्य व्हाइट ब्लड सेल टाइप्स भी होता है. रिपोर्ट में इनका पैटर्न डॉक्टर को संभावित संक्रमण या अन्य कारणों को समझने में मदद करता है.
प्लेटलेट्स काउंट्स को न करें इग्नोर
डॉक्टर कहते हैं कि प्लेटलेट्स ब्लड का थक्का बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनकी संख्या बहुत कम होने पर ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ सकता है. वहीं, कुछ स्थितियों में बहुत अधिक प्लेटलेट्स भी समस्या बढ़ा सकता है. लेकिन एक बार प्लेटलेट्स सामान्य सीमा से थोड़ा ऊपर या नीचे आने का मतलब ये नहीं है कि व्यक्ति को कोई गंभीर ब्लड से जुड़ी बीमारी है.
क्या CBC से दिल की बीमारी का पता चलता है?
डॉक्टर कहते हैं कि ये एक महत्वपूर्ण सवाल है. CBC अपने आप में हार्ट डिजीज की जांच नहीं है. इससे ये पता बिल्कुल भी नहीं चल सकता है कि व्यक्ति को कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज है या नहीं. हालांकि, CBC कुछ ऐसी स्थितियों की पहचान में मदद कर सकता है, जो हार्ट हेल्थ को प्रभावित कर सकता है.
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