Spanish Flu 1918 : देश के कई हिस्सों में H1N1 इंफ्लूएंजा के मामले सामने आने के बीच एक बार फिर ये वायरस काफी ज्यादा चर्चा में आ गया है. हम में से कई लोग H1N1 को स्वाइन फ्लू के नाम से भी जानते हैं, लेकिन ये कोई आज का वायरस नहीं है बल्कि इसका इतिहास एक सदी से भी पुराना है. सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास मित्तल का कहना है कि H1N1 वायरस का कनेक्शन 1918 की उस वैश्विक महामारी से है, जिसे दुनिया ने स्पैनिश फ्लू के रूप में देखा था. ये महामारी इतिहास की सबसे घातक स्वास्थ्य से जुड़ी आपदाओं में गिनी जाती है और ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इससे दुनिया भर में करीब 5 करोड़ लोगों की मौत हुई थी. यहां जानते हैं H1N1 का पूरा इतिहास-
H1N1 ने 1918 में मचाई थी तबाही
1918 में फैला स्पैनिश फ्लू H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण हुआ था. प्रथम विश्व युद्ध के अंतिम दौर में आई, इस महामारी ने दुनिया के लगभग हर देश को प्रभावित किया था. उस समय मेडिकल सुविधाएं काफी सीमित थीं और वायरस की पहचान और कंट्रोल के लिए आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे. इसी वजह से ये संक्रमण काफी तेजी से फैला और करोड़ों लोगों की जान चली गई.

एक्सपर्ट का कहना है कि उस समय स्पैनिश फ्लू ने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था को चुनौती दी थी, बल्कि कई देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को भी काफी ज्यादा प्रभावित किया था. आज भी इसे आधुनिक इतिहास की सबसे विनाशकारी महामारियों में से एक माना जाता है.
समय के साथ बदला वायरस, लेकिन खतरा बरकरार
समय के साथ H1N1 वायरस में कई जेनेटिक बदलाव हुए हैं, लेकिन इसका मूल स्वरूप अब भी मौसमी फ्लू और स्वाइन फ्लू के कई मामलों में देखा जाता है. साल 2009 में H1N1 वायरस का एक नया स्वरूप सामने आया था, जिसने दुनियाभर में स्वाइन फ्लू महामारी का रूप ले लिया था. इसके बाद वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने निगरानी, वैक्सीनेशन और ट्रीटमेंट व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया.
डॉक्टर विकास मित्तल का कहना है कि समय के साथ वायरस से अपना स्वरूप बदल लिया है. ये आज भी एक चिंता का विषय बना हुआ है. ऐसे में हमें विशेष ध्यान रखने की जरूरत है, साथ ही इसकी शुरुआती पहचान, वैक्सीनेशन भी काफी जरूरी माना जाता है.
H1N1 के लक्षण क्या हैं?
इस वायरस के लक्षण सामान्य फ्लू की तरह नजर आते हैं, जैसे- तेज बुखार, खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ इत्यादि. वहीं, कुछ लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती हैं, जिसकी वजह से उल्टी, मतली जैसे लक्षण भी दिखते हैं.

H1N1 से कैसे रहें सुरक्षित?
डॉ. मित्तल का कहना है कि H1N1 से बचाव के लिए नियमित रूप से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकना तथा बीमार लोगों से दूरी बनाए रखना जरूरी है. इसके अलावा फ्लू वैक्सीन भी संक्रमण के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाती है.
सतर्कता ही सबसे बड़ा इलाज
डॉ. विकास बताते हैं कि करीब 100 साल पहले दुनिया को झकझोर देने वाला H1N1 वायरस आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. ऐसे में इसे लेकर जागरूकता, सतर्कता और नियमित वैक्सीनेशन ही बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है. लोगों को इतिहास से सबक लेते हुए संक्रमण के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.
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