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बर्थडे पर 90 घंटे भूखे रहे मुंबई के CEO, फिर शरीर और दिमाग में दिखे ये बड़े बदलाव

मुंबई के एक एंटरप्रेन्योर ने अपने जन्मदिन के मौके पर 90 घंटे भूखे रहने का चैलेंज लिया, जिसके बाद उनके शरीर में कई तरह के बदलाव नजर आए. अपने इस एक्सपीरियंस को उन्होनें Linkedln पर शेयर किया. यहां जानते हैं इस बारे में-

बर्थडे पर 90 घंटे भूखे रहे मुंबई के CEO, फिर शरीर और दिमाग में दिखे ये बड़े बदलाव
Mumbai CEO fasting challenge : मुंबई के एक सीईओ ने 90 घंटे तक फास्टिंग का लिया चैलेंज

भागती-दौड़ती जिंदगी में अगर कुछ घंटे बिना खाए पिए रहे, तो काफी मुश्किल हो जाता है. लेकिन मुंबई के एक एंटरप्रेन्योर ने अपने जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए एक ऐसा चैलेंज चुना, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया. दरअसल, मुंबई में रहने वाले CreditVidya के CEO अभिषेक अग्रवाल ने अपने बर्थडे पर लगातार 90 घंटे यानी लगभग 4 दिन तक फास्टिंग रखी और फिर उन्होंने बाद में बताया कि इस दौरान उनके शरीर और दिमाग में क्या बदलाव आए. यहां जानते हैं उनके इस अनोखे चैंलेंज के बारे में-

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जन्मदिन पर लिया अनोखा चैलेंज

सीईओ अभिषेक अग्रवाल ने LinkedIn पर अपने एक्सपीरियंस को शेयर करते हुए बताया कि वे हर साल अपने जन्मदिन पर खुद को कोई कठिन चैलेंज देते हैं. इस बार उन्होंने 90 घंटे तक बिना खाना खाए रहने का फैसला किया. उन्होंने लिखा कि ये सिर्फ भूखे रहने का कोई प्रयोग नहीं था, बल्कि मैंने अपनी मेंटल और फिजिकल हेल्थ की लिमिट को परखने की कोशिश की थी. 

पहले दिन सब कुछ नॉर्मल लगा

अग्रवाल ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए लिखा की फास्टिंग का पहला दिन अपेक्षाकृत आसान रहा. उन्हें ज्यादा परेशानी महसूस नहीं हुई और एक समय तो उन्हें लगा कि यह चुनौती उतनी कठिन नहीं है, जितनी उन्होंने सोची थी.

दूसरे दिन शुरू हुई असली परीक्षा
दूसरे दिन में स्थिति पहले दिन की स्थिति से बदलने लगी. उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके मन में बार-बार ये सवाल आया कि आखिर उन्होंने ऐसा चैलेंज लेने का फैसला क्यों किया. भूख और इच्छा-शक्ति के बीच संघर्ष शुरू हो चुका था.

तीसरे दिन महसूस हुई खामोशी

अग्रवाल ने तीसरे दिन के अनुभव को सिर्फ एक शब्द में बयान किया, साइलेंस यानी खामोशी. उनका कहना था कि इस स्टेप में शरीर और दिमाग एक अलग अवस्था में पहुंचते हुए महसूस हुए.

चौथे दिन मिला मानसिक स्पष्टता का एहसास

सबसे अनोखा बदलाव चौथे दिन देखने को मिला, जो उनका जन्मदिन भी था. अग्रवाल ने दावा किया कि उस दिन उनका दिमाग पिछले कई महीनों की तुलना में सबसे ज्यादा स्पष्ट और शांत महसूस कर रहा था. उन्होंने इस पूरे अनुभव को 'Hunger vs Willpower' यानी भूख और इच्छाशक्ति की लड़ाई बताया.

क्यों किया 90 घंटे का फास्ट?

अग्रवाल का मानना है कि आज के समय में लोग हर सुविधा तुरंत चाहते हैं. खाना कुछ ही मिनटों में घर पहुंच जाता है और लोग घंटों तक मोबाइल पर स्क्रॉल करते रहते हैं. ऐसे माहौल में वे ये जानना चाहते थए कि इंसान वास्तव में कितनी असुविधा सह सकता है. उन्होंने कहा कि ये प्रयोग उन्हें समझाने में सफल रहा कि इंसान की क्षमता उसकी सोच से कहीं ज्यादा होती है.

क्या लंबे समय तक फास्टिंग रखना है सुरक्षित?

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक फास्टिंग हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होती. डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, प्रेग्नेंसी, किडनी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसा प्रयोग नहीं करना चाहिए. लंबे उपवास से कमजोरी, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

अग्रवाल की पोस्ट पर कई लोगों ने उनकी इच्छाशक्ति की तारीफ की. कुछ लोगों ने इसे आत्म-अनुशासन का बेहतरीन उदाहरण बताया. वहीं, कुछ ने इसे काफी कठिन और रिस्क भरा प्रयोग कहा.

कुल मिलाकर ये 90 घंटे का फास्ट सिर्फ एक जन्मदिन चैलेंज नहीं था, बल्कि खुद की सीमाओं को समझने और मानसिक मजबूती को परखने की कोशिश भी थी. हालांकि ऐसे किसी भी लंबे उपवास को अपनाने से पहले स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को समझना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.

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