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IIT दिल्ली का पासआउट लड़का जब पहुंच गया जापान, भारत से क्या चीज अलग पाई?

IIT दिल्ली के ग्रेजुएट ने जापान के टोक्यो में नौकरी, वर्क कल्चर और बढ़ते खर्चों को लेकर अपने अनुभव शेयर किए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

IIT दिल्ली का पासआउट लड़का जब पहुंच गया जापान, भारत से क्या चीज अलग पाई?
IIT दिल्ली से जापान तक का सफर

विदेश में पढ़ाई और नौकरी करने का सपना देखने वालों के लिए एक भारतीय इंजीनियर का अनुभव सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. IIT दिल्ली के ग्रेजुएट श्रेष्ट सोम्या, जो बिहार से हैं और फिलहाल जापान के टोक्यो में काम कर रहे हैं, ने वहां की ज़िंदगी, कामकाज और बढ़ते खर्चों को लेकर खुलकर बात की है. यह वीडियो टोक्यो में रहने वाली भारतीय महिला सुनाक्षी शर्मा ने शेयर किया है, जिसमें वह श्रेष्ट से उनकी प्रोफेशनल जर्नी और जापान में रोज़मर्रा की जिंदगी को लेकर सवाल करती नजर आती हैं.

कैंपस प्लेसमेंट से टोक्यो तक नौकरी कैसे मिली?

वीडियो की शुरुआत में जब सुनाक्षी शर्मा श्रेष्ट से उनका परिचय पूछती हैं, तो वह बताते हैं- मैं श्रेष्ट सोम्या हूं, बिहार से हूं और फिलहाल जापान में रह रहा हूं. इसके बाद नौकरी के बारे में सवाल पर वह कहते हैं कि उन्हें यह मौका IIT दिल्ली के कैंपस प्लेसमेंट के जरिए मिला. श्रेष्ट बताते हैं, मैंने IIT दिल्ली से पढ़ाई की है. वहां होंडा कंपनी प्लेसमेंट के लिए आई थी. वहीं से मुझे ऑफर मिला और मैं पिछले साल जापान शिफ्ट हो गया.

देखें Video:

टोक्यो में रहना आसान नहीं, खर्च ने बढ़ाई चिंता

टोक्यो की रोज़मर्रा की जिंदगी को लेकर श्रेष्ट कहते हैं कि वहां रहना रोमांचक तो है, लेकिन महंगा भी है. उनके मुताबिक, यहां हर दिन कुछ नया देखने और सीखने को मिलता है. हालांकि, खर्चों को लेकर वह ईमानदारी से कहते हैं कि शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कत हुई. जब मैं टोक्यो आया, तो मेरा खर्च 1 लाख येन से बढ़कर 1.5 लाख येन हो गया. मैं सिर्फ दोपहर का खाना बाहर खाता हूं और रात का खाना खुद बनाता हूं, फिर भी खर्च कम नहीं हो रहा. राहत की बात यह है कि उनकी कंपनी उनका किराया खुद देती है, जिससे रहने का बोझ कुछ हद तक कम हो जाता है.

जापान के वर्क कल्चर पर क्या बोले IIT ग्रेजुएट?

जापान की वर्क कल्चर को अक्सर सख्त और दबाव भरा माना जाता है, लेकिन श्रेष्ट का अनुभव इससे अलग है. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी टॉक्सिक माहौल महसूस किया, तो उन्होंने साफ कहा- नहीं, मेरी टीम में कभी भी टॉक्सिक वातावरण नहीं रहा. उनके मुताबिक, वहां का कामकाजी माहौल पेशेवर, सहयोगी और सम्मानजनक है, जो नए लोगों को सहज महसूस कराता है.

भारतीय युवाओं के लिए क्या संदेश?

श्रेष्ट सोम्या का अनुभव उन हजारों भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो विदेश में करियर बनाने का सपना देखते हैं. नई संस्कृति, ऊंचे खर्च और अलग कामकाजी माहौल के बावजूद, उनका कहना है कि हर दिन कुछ नया सीखने का मौका मिलता है, जो इस सफर को खास बनाता है.

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