- कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए करीब 40 सीटों पर उम्मीदवार तय कर लिए हैं, जिसमें गौरव गोगोई भी शामिल हैं
- गौरव गोगोई को जोरहाट से विधानसभा चुनाव लड़ाने की योजना है, जहां उनके पिता तरुण गोगोई की राजनीतिक विरासत है
- कांग्रेस CM हिमंता के खिलाफ गौरव गोगोई को जालुकबारी सीट से भी चुनाव लड़वाना चाहती है, लेकिन गौरव तैयार नहीं
असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने करीब चालीस सीटों पर उम्मीदवार तय कर लिए हैं. शुक्रवार शाम हुई कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की ऑनलाइन बैठक में उम्मीदवारों के नाम तय किए गए. असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. पार्टी उन्हें दो सीटों से चुनाव लड़ाने की योजना बना रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई के बीच दिलचस्प भिड़ंत देखने को मिल सकती है.
इतिहास दोहराना चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, गौरव गोगोई जोरहाट सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं. गौरव फिलहाल ऊपरी असम की जोरहाट लोकसभा सीट से ही सांसद हैं. उनके पिता और तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई ने अपनी राजनीति की शुरुआत जोरहाट नगर निगम से ही की थी और बाद में यहां से सांसद भी चुने गए. 2024 लोकसभा चुनाव में गौरव गोगोई को सीट बदलनी पड़ी थी. इससे पहले वो दो बार कलियाबोर सीट से चुनाव जीत चुके थे. लेकिन परिसीमन में बदलाव के बाद उन्हें जोरहाट से लड़ना पड़ा. उनके लिए लड़ाई आसान नहीं थी, लेकिन पिता की विरासत और सहानुभूति का फायदा गौरव गोगोई को लोकसभा चुनाव में मिला था. अब उसी कहानी को विधानसभा चुनाव में दुहराने की रणनीति बनाई जा रही है. बीते दो चुनाव से जोरहाट विधानसभा सीट बीजेपी जीत रही है.

Photo Credit: X/@GauravGogoiAsm
जालुकबारी से पीछे हट रहे गौरव गोगोई!
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को सीएम हेमंता बिस्वा सरमा के सामने जालुकबारी से भी उतारना चाहती है. हालांकि, खुद गौरव इसके लिए तैयार नहीं हैं. सीएम हिमंत इस सीट से लगातार पांच बार से (तीन बार कांग्रेस और दो बार बीजेपी ) जीत रहे हैं और हर बार उनकी जीत का अंतर बढ़ रहा है. पिछली बार हिमंता बिस्वा सरमा ने एक लाख से अधिक अंतर से जीत दर्ज की थी. गौरव गोगोई कांग्रेस के अघोषित सीएम उम्मीदवार हैं. वैसे भी असम में इस बार मुकाबला हिमंता बनाम गौरव ही है. अगर गौरव सीएम की सीट से लड़ जाते हैं तो इससे पूरे राज्य में बड़ा संदेश जाएगा. हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
असम में तेलंगाना मॉडल अपना रही कांग्रेस
करीब ढाई साल पहले तेलंगाना में कांग्रेस ने यही मॉडल अपनाया था. तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और सीएम के चंद्रशेखर राव को उनकी सीट से भी सीधी चुनौती दी थी. इससे बने माहौल से तेलंगाना में कांग्रेस को ऐसी जीत मिली, जो पहले असंभव लग रही थी. वैसे ही हालत असम के भी हैं.
कांग्रेस क्यों चाहती है सीएम हिमंत Vs गौरव गोगोई
कांग्रेस असम चुनाव को दो वजह से हिमंता बिस्वा सरमा बनाम गौरव गोगोई की लड़ाई में बदलना चाहती है. पहला इससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की का कम असर होगा. दूसरा कांग्रेस को लगता है कि गौरव गोगोई द्वारा सीएम को उनके घर में सीधी टक्कर देने से अहोम समुदाय की सहानुभूति कांग्रेस को मिलेगी. गौरव गोगोई अहोम समुदाय से आते हैं और इस समुदाय का ऊपरी असम में अच्छा ख़ासा प्रभाव है. बीते दो विधानसभा चुनाव से इन इलाकों की ज्यादातर सीटें बीजेपी ने जीती हैं. कांग्रेस यहीं सेंध लगाना चाह रही है.

तिताबोर सीट से गौरव गोगोई का खास लगाव
पहले माना जा रहा था कि गौरव गोगोई अपने पिता की सीट तिताबोर से चुनाव लड़ सकते हैं, जो जोरहाट जिले में ही आती है. 2001 में सांसद रहते हुए तरुण गोगोई को असम के सीएम पद की ज़िम्मेदारी मिली थी. इसके बाद वो जोरहाट के तिताबोर सीट से विधायक बने. तब से तरुण गोगोई अपनी अंतिम सांस तक इसी सीट से विधायक रहे. 2021 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नवंबर 2020 में उनका निधन हो गया. 2021 विधानसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के ही भाष्कर ज्योति बरुआ विधायक बने. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक बरुआ बीजेपी के संपर्क में हैं. माना जा रहा था कि ऐसी स्थिति में गौरव गोगोई अपनी पिता की पुरानी से मैदान में उतर सकते हैं. लेकिन एक कांग्रेस नेता ने बताया कि गौरव गोगोई के चुनाव लड़ने का मकसद अपनी सीट जीतना नहीं कांग्रेस को ज़्यादा सीटों पर जिताना है. शहरी सीट ज़ोरहाट लड़ने से गौरव के लड़ने का फ़ायदा कांग्रेस को आसपास के जिलों में मिलने की उम्मीद है.
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बहरहाल कांग्रेस ने करीब 40 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम जरूर तय कर लिए हैं लेकिन पहली सूची जारी तत्काल जारी नहीं होगी. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधानसभा चुनाव के एलान होने का इंतजार कर रही है. इसके बाद ही उम्मीदवारों की पहली सूची जारी हो सकती है. ज्यादातर मौजूदा विधायकों को फिर से मौक़ा मिल सकता है. पिछली बार कांग्रेस ने 29 सीटें जीती थीं लेकिन अब उसके पास केवल 21–22 विधायक बचे हैं. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी असम चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति बना रही हैं. उन्हें यहाँ की स्क्रीनिंग कमेटी की ज़िम्मेदारी दी गई है.
असम में विधानसभा की 126 सीटें हैं. कांग्रेस छोटे दलों के लिए कुछ सीटें छोड़ सकती है. हालांकि अभी तक गठबंधन का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है. पिछली बार कांग्रेस ने बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.
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