John Caudwell billionaire lifestyle: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिस पिता के पास 36,000 करोड़ से ज्यादा की दौलत हो, उसके बच्चे आम लोगों की तरह लंबी कतारों में लगकर बजट एयरलाइंस में सफर करते हों? मोबाइल किंग जॉन कॉडवेल अपने बच्चों को 'अमीरजादा' नहीं बल्कि 'इंसान' बनाना चाहते हैं.लग्जरी लाइफ के बजाय उन्होंने बच्चों के लिए 'फटी पुरानी' नहीं, बल्कि सादगी वाली जिंदगी चुनी है. आइए जानते हैं इस दिलचस्प परवरिश की पूरी कहानी.
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अमीरी का समंदर...पर सादगी का किनारा (Billionaire parenting tips)
ब्रिटेन के मशहूर बिजनेसमैन और 'Phones 4u' के फाउंडर जॉन कॉडवेल इन दिनों अपनी पेरेंटिंग स्टाइल को लेकर इंटरनेट पर छाए हुए हैं. फोर्ब्स के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति लगभग $4.3 बिलियन (करीब 36,000 करोड़ रुपये) है, लेकिन कहानी में ट्विस्ट ये है कि इतनी दौलत होने के बावजूद उनके छोटे बच्चे बिजनेस क्लास में नहीं, बल्कि अपनी मां के साथ इकोनॉमी क्लास में सफर करते हैं. कॉडवेल का मानना है कि बच्चों को 'नॉर्मल लाइफ' का अहसास होना बहुत जरूरी है.
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बच्चों के लिए सादा जीवन (Simple Living for Kids)
जॉन का जन्म एक साधारण मिडिल क्लास परिवार में हुआ था. वह कहते हैं, 'मैं स्टोके-ऑन-ट्रेंट के एक छोटे से घर में पला-बढ़ा, जहां मेरे पास कुछ नहीं था. मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चों के पास कुछ न हो, लेकिन मैं उन्हें बिगाड़ना भी नहीं चाहता.' इसी वजह से उनके बच्चे डिजाइनर कपड़ों के बजाय हाई-स्ट्रीट ब्रांड्स (सस्ते कपड़े) पहनते हैं. उनका मानना है कि महंगे ब्रांड्स खुशी नहीं, बल्कि घमंड पैदा करते हैं.
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दौलत नहीं, संस्कार की अहमियत (Values Over Wealth)
हैरानी की बात तो ये है कि रेस्टोरेंट में खाना खाते वक्त भी इनके बच्चे फिजूलखर्ची नहीं करते. वे अक्सर बेसिक मील ऑर्डर करते हैं और खाना बर्बाद न हो, इसलिए उसे शेयर करके खाते हैं. जॉन ने बताया कि पहले वह क्रिसमस पर बच्चों को ढेरों तोहफे देते थे, लेकिन अब उन्होंने इसे सीमित कर दिया है. वह सिर्फ बच्चों की पढ़ाई और उनकी मेहनत पर पैसा खर्च करना पसंद करते हैं, न कि उनके ऐशो-आराम पर.
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प्यार और अनुशासन का मेल (Balance of Love and Discipline)
कॉडवेल के आठ बच्चे हैं और सभी अपनी मेहनत से करियर बना रहे हैं. कोई बैंकिंग में है तो कोई म्यूजिक में. जॉन का कहना है कि वह बच्चों को डांटते भी हैं, लेकिन उसके तुरंत बाद उन्हें गले लगाकर ये जरूर कहते हैं कि 'बेटा, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, लेकिन तुम्हें एक काबिल इंसान बनाने के लिए अनुशासन जरूरी है.' उनके लिए कामयाबी का मतलब बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि बच्चों की खुशी और समाज के प्रति उनका योगदान है. जॉन कॉडवेल की यह कहानी हमें सिखाती है कि असली अमीरी बैंक अकाउंट में नहीं, बल्कि बच्चों को दिए गए संस्कारों में होती है. अपनी बेपनाह दौलत के बावजूद, उन्होंने जिस तरह से अपने बच्चों के पैर जमीन पर रखे हैं, वह आज के दौर के हर माता-पिता के लिए एक मिसाल है.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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