Real life success story: हर साल लाखों छात्र JEE परीक्षा पास कर IIT में दाखिला लेने का सपना देखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामकोटी (V. Kamakoti) कभी JEE परीक्षा में असफल हो गए थे? उन्होंने केमिस्ट्री में बहुत खराब स्कोर किया था. उनकी सफलता की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो किसी परीक्षा में असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं.
प्रोफेसर वी. कामकोटी
प्रोफेसर वी. कामकोटी ने साल 1985 में JEE परीक्षा दी थी. तब केमिस्ट्री विषय में उन्हें 100 में से केवल 10 अंक मिले थे. खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें IIT में बीटेक प्रवेश नहीं मिल सका था. हालांकि इस असफलता से वे घबराए नहीं और पढ़ाई जारी रखी.
बाद में IIT मद्रास से एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की. इसके बाद वे संस्थान में प्रोफेसर बने और वर्षों की मेहनत के बाद 2022 में IIT मद्रास के डायरेक्टर नियुक्त किए गए. दिलचस्प बात यह है कि जिस JEE परीक्षा में वे कभी सफल नहीं हो पाए थे, उसी परीक्षा के चेयरमैन बनने का अवसर भी उन्हें मिला.
परीक्षा के रिजल्ट से निराश ना हों
IIT मद्रास के डायरेक्टर का कहना है कि कई बार छात्र किसी एक परीक्षा या रिजल्ट को अपनी पूरी जिंदगी मान लेते हैं. इससे मानसिक दबाव बढ़ता है. उनके अनुसार, हर छात्र की प्रतिभा अलग होती है और सफलता पाने के रास्ते भी अलग-अलग हो सकते हैं. इसलिए किसी परीक्षा में असफल होने पर खुद को कमतर नहीं समझना चाहिए.
उनकी कहानी से क्या सीखें
उनकी कहानी यह साबित करती है कि एक परीक्षा में मिली असफलता भविष्य का फैसला नहीं करती. मेहनत, धैर्य और लगातार सीखने की इच्छा इंसान को उन ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है, जहां कभी पहुंचने की उसने केवल कल्पना की थी. JEE में असफल होने वाला छात्र एक दिन उसी परीक्षा का चेयरमैन और देश के शीर्ष IIT का डायरेक्टर बन सकता है- प्रोफेसर वी. कामकोटी, इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं