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बचपन का सपना हुआ पूरा..." IMA से अफसर बनीं शनन और श्रीति ने बयां की दिल की बात

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के 94 साल के इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट्स पुरुषों के साथ 'अंतिम पग' पार कर भारतीय सेना में अफसर बनीं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में रच गया इतिहास. पढ़ें एनडीटीवी से बातचीत में क्या बोलीं महिला अफसर शनन ढाका और श्रीति दक्ष.

बचपन का सपना हुआ पूरा..." IMA से अफसर बनीं शनन और श्रीति ने बयां की दिल की बात
IMA के 94 साल के इतिहास में नया अध्याय: पहली बार 9 महिला कैडेट्स ने पुरुष साथियों संग पार किया 'अंतिम पग'

भारतीय सैन्य अकादमी यानी आईएमए की पासिंग आउट परेड इस बार हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है. क्योंकि आई एम ए (indian military academy) के 94 साल के इतिहास में पहली बार 09 महिला कैडेट्स ने पुरुष कैडेटों के साथ "अंतिम पग" पार कर भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी बनीं. यूं तो भारतीय सेना या फिर भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना में महिलाओं की भागीदारी कोई नई बात नहीं है लेकिन, भारतीय सैन्य अकादमी के एक लंबे सैन्य इतिहास में 13 जून 2026 का दिन उस बात का साक्षी बना जब चेटवुड बिल्डिंग (chetwode Building) के आगे महिला कैडेट पुरुष कैडेट के साथ ड्रिल स्क्वायर में कदमताल किया.

बचपन का सपना हुआ पूरा:  शनन ढाका

इस मौके पर 9 महिला कैडिडेट्स में शामिल शनन ढाका और श्रीति दक्ष ने एनडीटीवी से बातचीत की. शनन ने बताया कि उनका बचपन से सपना था भारतीय सेना में जाने का और आज उनका सपना साकार हो गया. अब भारतीय सेना में रहकर देश की हिफाजत करने के लिए वो तैयार हैं. 

परिवार की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया: श्रीति दक्ष

वहीं, श्रीति दक्ष ने भी कहा कि उनका भी सेना में शामिल होने का बचपन का सपना था. 12वीं पढ़ाई पूरी करके वह सैन्या सेवा में शामिल हुई हैं. युवा महिला सैन्य अधिकारी श्रीति दक्ष ने आगे कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग करने के दौरान उन्होंने अनुशासन, वीरता और विवेक का क्या मतलब होता है, इसके बारे में सिखा.  साथ ही श्रीति ने कहा कि उन्होंने अपने पिता की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज एक सैन्य अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में शामिल हुई हैं. जो उनके लिए गर्व का पल है. बता दें कि श्रीति दक्ष ने आर्मी एविएशन कोर ज्वाइन किया है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ली परेड की सलामी

आईएमए की इस पासिंग आउट परेड (POP) में इस बार 481 भारतीय और 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स पास आउट हुए. इस खास मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने परेड की सलामी ली.

परेड को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, "यह सिर्फ इस अकादमी के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक और गौरव का पल है. 9 महिला ऑफिसर कैडेट्स के पास आउट होने का सीधा संदेश है कि भारत में महिलाओं को पुरुषों के बराबर हक और सम्मान दिया जाता है। देश की सुरक्षा और तरक्की में महिलाएं अब पुरुषों से कंधा मिलाकर चल रही हैं." 

3 साल की कड़ी ट्रेनिंक का है फल

दरअसल अगस्त 2022 में एनडीए में महिला कैडेट्स के पहले बैच ने प्रवेश लिया और 3 साल की कड़ी ट्रेनिंग के बाद साल 2025 के मई महीने में 18 महिला कैडेट्स ग्रेजुएट हुईं. जिसमें से 9 महिला कैडेट्स ने इंडियन आर्मी में ज्वाइन होने का फैसला लिया और देहरादून के इंडियन मिलिट्री अकादमी में करीब 1 साल की कड़ी ट्रेनिंग ली.

क्या है सेना में महिलाओं का इतिहास?

साल 1992 में पहली बार महिलाओं को चिकित्सा सेवाओं के अतिरिक्त अन्य शाखाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से अधिकारी बनने का अवसर मिला था. इसके अलावा सेना में महिलाओं की भागीदारी का इतिहास पुराना है. लेकिन इस बार IMA से उनका सैन्य अधिकारी बनकर पास आउट होना एक बहुत बड़ा बदलाव है इससे पहले महिलाएं मुख्य रूप से चेन्नई स्थित ओटीए यानी ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी,आर्म्स फोर्स मेडिकल सर्विस, मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के जरिए भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रही हैं.

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) का गौरवशाली इतिहास

भारतीय सैन्य अकादमी का गठन 1 अक्टूबर 1932 को हुआ था तब से लेकर आज तक लगभग 9 दशक तक  पुरुष कैडेट्स सैन्य अधिकारी बनकर देश की सेवा करते रहे हैं करीबन 65 हजार से ज्यादा भारतीय सैन्य अकादमी ने भारतीय सेना को जांबाज सैन्य अधिकारी दिए. भारतीय सैन्य अकादमी सिर्फ देश में नहीं बल्कि दुनिया में अपनी ट्रेनिंग के लिए जानी जाती है यहां न सिर्फ देश के युवाओं को सैन्य अधिकारी बनने की ट्रेनिंग मिलती है बल्कि मित्र देशों के जवानों को भी यहां भारतीय युवाओं के साथ सैन्य अधिकारी बनने की ट्रेनिंग मिलती है.

यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं, बल्कि बदलते भारतीय समाज और भारतीय सेना में महिलाओं की सशक्त होती भूमिका का एक बड़ा प्रतीक है.

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