Success Story: जब 26 साल की उम्र में बैंक बैलेंस करोड़ों में हो, तो अक्सर लोग फरारी और रोलेक्स के सपने देखते हैं, लेकिन स्टार्टअप किंग अमन गोयल ने कुछ ऐसा किया जिसने इंटरनेट पर सबको हैरान कर दिया. दौलत मिलने के बाद उन्होंने 'शो-ऑफ' नहीं बल्कि 'सुकून' को चुना. आखिर क्या है उनकी इस 'सादगी वाली अमीरी' का राज? चलिए जानते हैं.
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नवंबर 2021 में जब अमन गोयल ने अपना स्टार्टअप करोड़ों डॉलर में बेचा, तो उनके पास ऐशो-आराम की हर चीज खरीदने की ताकत थी, लेकिन उन्होंने चमक-धमक वाली जिंदगी के बजाय एक ऐसा रास्ता चुना, जिसकी चर्चा आज हर तरफ हो रही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी कहानी साझा करते हुए अमन ने बताया कि पैसा आने के बाद उन्होंने महंगी घड़ियां या स्पोर्ट्स कारें नहीं खरीदीं, बल्कि अपनी जिंदगी को 'रीसेट' किया. अमन गोयल की कहानी एक आईना है उन लोगों के लिए जो अमीरी का मतलब सिर्फ दिखावा समझते हैं. उनके लिए असली अपग्रेड महंगी गाड़ियां नहीं, बल्कि माता-पिता की मुस्कान और अच्छी सेहत है.
In November 2021, I sold my startup to a larger company for millions of dollars. I was 26 years old when this happened.
— Aman Goel (@amangoeliitb) March 22, 2026
Most people that age would have splurged on flashy cars, watches, or a lifestyle designed to impress. I went a different way.
I chose to upgrade my life with… https://t.co/ign188f5EM pic.twitter.com/dxesoDKSD4
परिवार और सेहत को दी सबसे पहली तरजीह (Family and Health over Luxury Cars)
अमन का मानना है कि कामयाबी का असली मजा तब है, जब आप उसे अपनों के साथ बांट सकें. उन्होंने सबसे पहला काम मुंबई में अपने माता-पिता को अपने साथ शिफ्ट करने का किया. इसके साथ ही, स्टार्टअप की भागदौड़ में खराब हुई सेहत पर ध्यान दिया. उन्होंने 15 किलो वजन कम किया, पर्सनल फिटनेस कोच रखा और अपनी पत्नी के साथ रेगुलर हेल्थ चेकअप को रूटीन बनाया. उनके मुताबिक, शरीर ही वह असली संपत्ति है जिसकी सुरक्षा सबसे जरूरी है.
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किराए का घर VS अपना सुकून (Stability Over Financial Optimization)
आमतौर पर फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स रेंट पर रहने की सलाह देते हैं, लेकिन अमन ने 2022 में अपना घर खरीदा. उन्होंने कहा कि कागज पर रेंट शायद बेहतर लगे, लेकिन घर खरीदने से जो सुरक्षा उनके माता-पिता को महसूस होती है, उसकी कोई कीमत नहीं है. उन्होंने अपनी लाइफ को आसान बनाने के लिए कुक और हेल्पर जैसे 'सपोर्ट सिस्टम' में निवेश किया, ताकि वह और उनकी पत्नी अपने काम पर बेहतर फोकस कर सकें और उन्हें फालतू के कामों में दिमागी थकान न हो.
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घूमने का शौक पर दिखावे से तौबा (Travel for Peace, Not for Social Media)
अमन और उनकी पत्नी साल में कुछ बार विदेश यात्रा पर भी जाते हैं, लेकिन उनका मकसद महंगे होटलों की फोटो डालना नहीं, बल्कि 'रिचार्ज' होना होता है. वे ऐसी जगहों को चुनते हैं जहां शांति मिले. अमन की यह कहानी हमें सिखाती है कि पैसा सिर्फ चीजें खरीदने के लिए नहीं, बल्कि वक्त और सुकून खरीदने के लिए होता है.
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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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