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इराक को पता ही नहीं था कि उसके रेगिस्तान में एक इजरायली सैन्य अड्डा है, जानिए फिर क्या हुआ

इराक ने संयुक्त राष्ट्र में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और हमले का आरोप अमेरिका पर लगाया. हालांकि, एक अमेरिकी अधिकारी ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि उस विशेष हमले में अमेरिका की कोई संलिप्तता नहीं थी.

इराक को पता ही नहीं था कि उसके रेगिस्तान में एक इजरायली सैन्य अड्डा है, जानिए फिर क्या हुआ
इजरायल की आर्मी सैन्य बेस बनाकर इराक से ऑपरेशन चलाती रही और इराक को पता ही नहीं चला.
  • इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध में सहायता के लिए इराक के रेगिस्तान में एक गुप्त सैन्य अड्डा स्थापित किया था
  • यह अड्डा इजरायली वायु सेना का रसद केंद्र था और विशेष बलों के साथ खोज और बचाव दल भी तैनात थे
  • इराकी सेना ने इस गुप्त अड्डे की जानकारी मिलने पर जांच की, लेकिन इजरायल ने उन्हें रोकने के लिए हवाई हमले किए

इराक में एक स्थानीय चरवाहे ने कुछ असामान्य देखा. हेलीकॉप्टर नीची उड़ान भर रहे थे. पश्चिमी रेगिस्तान के एक सुनसान इलाके में अजीबोगरीब हलचल मची हुई थी. उसे यह बिल्कुल भी पता नहीं था कि वह एक ऐसे गुप्त अड्डे पर पहुंच गया है जिसे इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपने युद्ध में सहायता के लिए बनाया था. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए, इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपने हवाई अभियान को समर्थन देने के लिए इराकी रेगिस्तान में एक सैन्य अड्डा स्थापित किया था. यह अड्डा संघर्ष शुरू होने से ठीक पहले बनाया गया था. अमेरिका को इसकी जानकारी थी, लेकिन इराक को नहीं.

इजरायल को क्यों जरूरत पड़ी

इस सैन्य अड्डे पर इजरायली विशेष बल तैनात थे और यह इजरायली वायु सेना के लिए रसद केंद्र के रूप में कार्य करता था. खोज और बचाव दल भी यहां तैनात थे, जो दुश्मन क्षेत्र में किसी भी इजरायली पायलट के मार गिराए जाने की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार थे. ईरान इजरायली क्षेत्र से लगभग 1,000 मील दूर स्थित है; इस अड्डे ने इस दूरी को काफी कम कर दिया, जिससे तेल अवीव के लिए लंबे समय तक हवाई अभियानों को जारी रखना आसान हो गया.

राज खुलने ही वाला था

मार्च की शुरुआत में, ऑपरेशन के उजागर होने का खतरा मंडरा रहा था. इराकी सरकारी मीडिया ने बताया कि एक चरवाहे ने इलाके में असामान्य सैन्य गतिविधि देखी थी. इराकी सेना ने जांच के लिए सैनिक भेजे. उन्हें घटनास्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए, इजरायल ने हवाई हमले किए, जिनमें एक सैनिक मारा गया और दो घायल हो गए. इराक ने इलाके की तलाशी के लिए दो और यूनिट भेजीं, और वे ऐसे सबूत लेकर लौटे, जिनसे पुष्टि हुई कि हाल ही में वहां कोई सैन्य बल मौजूद था.

एक गुप्त इजरायली अड्डे की पुष्टि होने के बाद, इराक के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल कैस अल-मुहम्मदावी (जो संयुक्त अभियान कमान के उप कमांडर हैं) ने इराकी सरकारी मीडिया को बताया, "यह अभियान बिना समन्वय या किसी आदेश के अंजाम दिया गया. ऐसा लगता है कि हमले से पहले ही जमीन पर एक विशेष बल मौजूद था, जिसे हवाई सहायता प्राप्त थी और जो हमारी इकाइयों की क्षमताओं से परे काम कर रहा था."

बाद में इराक ने संयुक्त राष्ट्र में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और हमले का आरोप अमेरिका पर लगाया. हालांकि, एक अमेरिकी अधिकारी ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि उस विशेष हमले में अमेरिका की कोई संलिप्तता नहीं थी. विशाल और लगभग निर्जन होने के कारण, पश्चिमी इराकी रेगिस्तान गुप्त सैन्य गतिविधियों के लिए एक आदर्श स्थान है. 1991 और 2003 में सद्दाम हुसैन के खिलाफ अभियानों के दौरान, अमेरिकी सेना ने भी इसी क्षेत्र का उपयोग किया था.

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