- ईरान ने अमेरिका के स्थायी शांति प्रस्ताव का जवाब पाकिस्तान के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका को भेज दिया है
- ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा है
- ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने अमेरिकी जहाजों पर किसी भी आक्रमण का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है
अमेरिका की तरफ से स्थायी शांति के लिए भेजी गई शर्तों पर ईरान ने आज जवाब दिया. ईरान ने कहा कि अमेरिका के प्रस्ताव का जवाब आज ही पाकिस्तान के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका को भेज दिया गया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पहले कहा था कि समीक्षा और अंतिम संकलन पूरा होने के बाद अमेरिकी प्रस्तावों के संबंध में ईरान के विचार और सुझाव भेजे जाएंगे. प्रस्तावित योजना के अनुसार, इस चरण में वार्ता क्षेत्र में युद्ध की समाप्ति के मुद्दे पर केंद्रित होगी.
ईरान के राष्ट्रपति ने क्या संकेत दिया
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक्स पर ट्वीट कर कहा, "हम कभी भी दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाएंगे, और अगर बातचीत या समझौता करने की बात उठती है, तो इसका मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है. बल्कि, हमारा लक्ष्य ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को कायम रखना और दृढ़ शक्ति के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है."
هرگز در برابر دشمن سر خم نخواهیم کرد و اگر سخنی از گفتوگو یا مذاکره مطرح میشود، معنای آن تسلیم یا عقبنشینی نیست. بلکه هدف، احقاق حقوق ملت ایران و دفاع مقتدرانه از منافع ملی است.
— Masoud Pezeshkian (@drpezeshkian) May 10, 2026
वहीं ईरानी संसद की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई का कहना है कि आज से तेहरान का संयम समाप्त हो गया है. उन्होंने भी एक्स पर लिखा, “हमारे जहाजों पर किसी भी प्रकार की आक्रामकता का ईरान द्वारा अमेरिकी जहाजों और ठिकानों के विरुद्ध कठोर और निर्णायक जवाब दिया जाएगा. अमेरिकियों के हित में समय तेजी से बीत रहा है; उनके लिए मूर्खतापूर्ण कार्य न करना और खुद को उस दलदल में और अधिक न धकेलना ही बेहतर है, जिसमें वे फंस चुके हैं. सबसे अच्छा रास्ता आत्मसमर्पण करना और रियायतें देना है. आपको नई क्षेत्रीय व्यवस्था के अनुरूप ढलना होगा.”
तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रवक्ता की ये टिप्पणियां ईरानी सैन्य प्रवक्ता अकरमी निया द्वारा आज सुबह दी गई चेतावनी के बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने वाले किसी भी देश को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में निश्चित रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.
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