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मौलाना तौकीर रजा का दाहिना हाथ, व्हाट्स एप कॉल कर 1500 लोगों को बुलाया, बरेली उपद्रव में नए खुलासे
- Monday September 29, 2025
- Reported by: रवीश रंजन शुक्ला
बरेली प्रदर्शन मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने अब साजिशकर्ताओं पर शिकंजा करना शुरू कर दिया है. पुलिस ने तौकरी रजा के दाहिना हाथ माने जाने वाले नदीम खान को गिरफ्तार कर लिया है.
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अब नहीं लगाना पड़ेगा बैंक का चक्कर... घर बैठे अकाउंट बैलेंस जानने से लेकर लोन तक के लिए ऐसे करें अप्लाई
- Saturday August 24, 2024
- Edited by: अनिशा कुमारी
Banking Tips and Tricks: आज हम आपको एक ऐसा तरीका बता रहे हैं जिससे कि बैंक बैलेंस से लेकर बैंक स्टेटमेंट और अकाउंट से जुड़ी दूसरी डिटेल्स आप मिनटों में WhatsApp पर जान सकते हैं. यानी इस तरीके को जानने के बाद आपको अपने हर छोटे बड़े कामों के लिए बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
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WhatsApp पर फेवरेट चैट तक आसान होगी पहुंच, नए फीचर का परीक्षण जारी
- Saturday April 27, 2024
- Reported by: IANS, Edited by: विजय शंकर पांडेय
WhatsApp कथित तौर पर एक नए फीचर पर काम कर रहा है, जो यूजर्स को एंड्रॉयड पर स्टेटस अपडेट पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की अनुमति देगा.
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WhatsApp की प्राइवेसी सेटिंग्स में होंगे कई बड़े बदलाव...ग्रुप से निकलने पर जानें अब किसे पता चलेगा
- Wednesday August 17, 2022
- Edited by: वर्तिका
व्हाट्स एप (WhatsApp) के नए प्राइवेसी फीचर्स ( New Privacy Features) दुनिया भर में इसी महीने लागू किए जाएंगे. इनकी शुरुआत ब्रिटेन (UK) से की जाएगी. जनवरी में ईयू (EU) ने यूजर डेटा (User Data) के प्रयोग को लेकर व्हाट्सएप की औपचारिक जांच शुरू की थी. इससे पहले कई उपयोक्ता समूहों ने निजता से जुड़ी चिंताएं ज़ाहिर की थीं.
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कब तक गोदी मीडिया नाक कटाता रहेगा...
- Monday June 6, 2022
- रवीश कुमार
इस तरह के आपको अनगिनत उदाहरण दे सकता हूं. जब गोदी मीडिया के ज़रिए नफरत भरा जाता है.इसी नफरत को हाउसिंग सोसायटी के व्हाट्स एप ग्रुप और रिश्तेदारों के व्हाट्स एप ग्रुप में फैलाया जाता है.
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श्रीलंका में सिंहासन छोड़कर भागते नेता, जनता को गोली मारने के आदेश...
- Wednesday May 11, 2022
- रवीश कुमार
व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के देश में इस बात को नहीं समझा जा सकेगा लेकिन व्हाट्स एप के इस दौर में कहा जा रहा है कि किताब ही क्रांति का औज़ार है. श्रीलंका की हालत बहुत खराब है.वहां के पत्रकार लिख रहे हैं कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने संकट को अनदेखा किया है
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रवीश का ब्लॉग : ट्विटर तो ख़रीद लिया मस्क ने, बलिया के पत्रकारों सा हौसला कहां से लाएंगे?
- Wednesday April 27, 2022
- रवीश कुमार
जब कोई कंपनी आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ठेका लेने लगे और गारंटी देने लगे, तो थोड़ा सतर्क हो जाने में कोई बुराई नहीं है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडिट बटन की स्वतंत्रता देकर वाहवाही लूटने वाली वही कंपनियां अपने पास अलगोरिद्म का अधिकार रखती हैं, जिसकी मदद से किस सूचना या विचार को सब तक पहुंचाना है और गायब कर देना है, इसका खेल खेला जाता है. फेसबुक, व्हाट्स एप से लेकर हम ट्विटर के मामले में यह खेल देख चुके हैं. इलॉन मस्क ने ट्विटर को साबुन के भाव में खरीद लिया, इसे लेकर न तो आशंकित होने की ज़रूरत है और न उत्साहित, क्योंकि मौजूदा मालिकों के हाथ में सोशल मीडिया का यह प्लेटफार्म किस तरह से किसी का खाता बंद देते हैं, किसी के विचारों को पहुंचने नहीं देते हैं,आप देख कर अनदेखा कर भी चुके हैं.
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धर्म के नाम पर बेलगाम होते लोग
- Saturday April 9, 2022
- रवीश कुमार
महंत बजरंग मुनि दास की सारी बातें ऐसी हैं कि हमें सुनाने की इच्छा तक नहीं हो रही. वैसे आल्ट न्यूज़ के मोहम्मद ज़ुबेर के ट्विटर हैंडल पर सुना तो पूरा सुना भी नहीं गया. यह व्यक्ति जिस भाषा का इस्तमाल कर रहा है उसे सिर्फ वही लोग सुन सकते हैं जो ऐसे लोगों को चुपचाप फैमिली और हाउसिंग सोसायटी के व्हाट्स एप ग्रुप में फार्वर्ड करते हैं और समर्थन करते हैं.
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Ravish Kumar Prime Time: जब ऑक्सीजन की कमी से लोग नहीं मरे तो क्या अस्पतालों, अखबारों ने झूठ बोला? सुप्रीम कोर्ट ने फिर कमेटी क्यों बनाई थी? रवीश ने पूछा
- Thursday July 22, 2021
- Edited by: प्रमोद कुमार प्रवीण
Ravish Kumar Prime Time : रवीश ने तल्ख लहजे में कहा, "जब मरने वालों की संख्या 47 लाख से 4 लाख की जा सकती है तो इसका मतलब है कि अब फेक न्यूज़ का भी काम ख़त्म हो गया है. लगातार प्रोपेगैंडा से लोगों की यह हालत हो गई है. वे अब दूसरी सूचना स्वीकार ही नहीं कर पाएंगे. शॉर्ट सर्किट हो जाएगा. दिमाग़ वही स्वीकार करता है जो व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी कहती है. इसलिए अब आपको किसी न्यूज़ की ज़रूरत ही नहीं है.
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निजीकरण का विरोध हमेशा फ़ैसले के बाद क्यों होता है, अपनी-अपनी कंपनी का क्यों होता है?
- Thursday March 11, 2021
- रवीश कुमार
विरोध-प्रदर्शन से जब कृषि क़ानून वापस नहीं हुए तो सरकारी कंपनियों में काम करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि उनके आंदोलन पर मीडिया और राजनीति हंसेगी. ठठाकर हंसेगी. जब दूसरी कंपनियों को ख़त्म किया जा रहा था तब इस वर्ग के व्हाट्स एप ग्रुप में कुछ और चल रहा था.
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मौलाना तौकीर रजा का दाहिना हाथ, व्हाट्स एप कॉल कर 1500 लोगों को बुलाया, बरेली उपद्रव में नए खुलासे
- Monday September 29, 2025
- Reported by: रवीश रंजन शुक्ला
बरेली प्रदर्शन मामले में उत्तर प्रदेश की पुलिस ने अब साजिशकर्ताओं पर शिकंजा करना शुरू कर दिया है. पुलिस ने तौकरी रजा के दाहिना हाथ माने जाने वाले नदीम खान को गिरफ्तार कर लिया है.
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अब नहीं लगाना पड़ेगा बैंक का चक्कर... घर बैठे अकाउंट बैलेंस जानने से लेकर लोन तक के लिए ऐसे करें अप्लाई
- Saturday August 24, 2024
- Edited by: अनिशा कुमारी
Banking Tips and Tricks: आज हम आपको एक ऐसा तरीका बता रहे हैं जिससे कि बैंक बैलेंस से लेकर बैंक स्टेटमेंट और अकाउंट से जुड़ी दूसरी डिटेल्स आप मिनटों में WhatsApp पर जान सकते हैं. यानी इस तरीके को जानने के बाद आपको अपने हर छोटे बड़े कामों के लिए बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
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WhatsApp पर फेवरेट चैट तक आसान होगी पहुंच, नए फीचर का परीक्षण जारी
- Saturday April 27, 2024
- Reported by: IANS, Edited by: विजय शंकर पांडेय
WhatsApp कथित तौर पर एक नए फीचर पर काम कर रहा है, जो यूजर्स को एंड्रॉयड पर स्टेटस अपडेट पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की अनुमति देगा.
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- Wednesday August 17, 2022
- Edited by: वर्तिका
व्हाट्स एप (WhatsApp) के नए प्राइवेसी फीचर्स ( New Privacy Features) दुनिया भर में इसी महीने लागू किए जाएंगे. इनकी शुरुआत ब्रिटेन (UK) से की जाएगी. जनवरी में ईयू (EU) ने यूजर डेटा (User Data) के प्रयोग को लेकर व्हाट्सएप की औपचारिक जांच शुरू की थी. इससे पहले कई उपयोक्ता समूहों ने निजता से जुड़ी चिंताएं ज़ाहिर की थीं.
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कब तक गोदी मीडिया नाक कटाता रहेगा...
- Monday June 6, 2022
- रवीश कुमार
इस तरह के आपको अनगिनत उदाहरण दे सकता हूं. जब गोदी मीडिया के ज़रिए नफरत भरा जाता है.इसी नफरत को हाउसिंग सोसायटी के व्हाट्स एप ग्रुप और रिश्तेदारों के व्हाट्स एप ग्रुप में फैलाया जाता है.
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श्रीलंका में सिंहासन छोड़कर भागते नेता, जनता को गोली मारने के आदेश...
- Wednesday May 11, 2022
- रवीश कुमार
व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के देश में इस बात को नहीं समझा जा सकेगा लेकिन व्हाट्स एप के इस दौर में कहा जा रहा है कि किताब ही क्रांति का औज़ार है. श्रीलंका की हालत बहुत खराब है.वहां के पत्रकार लिख रहे हैं कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने संकट को अनदेखा किया है
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रवीश का ब्लॉग : ट्विटर तो ख़रीद लिया मस्क ने, बलिया के पत्रकारों सा हौसला कहां से लाएंगे?
- Wednesday April 27, 2022
- रवीश कुमार
जब कोई कंपनी आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ठेका लेने लगे और गारंटी देने लगे, तो थोड़ा सतर्क हो जाने में कोई बुराई नहीं है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडिट बटन की स्वतंत्रता देकर वाहवाही लूटने वाली वही कंपनियां अपने पास अलगोरिद्म का अधिकार रखती हैं, जिसकी मदद से किस सूचना या विचार को सब तक पहुंचाना है और गायब कर देना है, इसका खेल खेला जाता है. फेसबुक, व्हाट्स एप से लेकर हम ट्विटर के मामले में यह खेल देख चुके हैं. इलॉन मस्क ने ट्विटर को साबुन के भाव में खरीद लिया, इसे लेकर न तो आशंकित होने की ज़रूरत है और न उत्साहित, क्योंकि मौजूदा मालिकों के हाथ में सोशल मीडिया का यह प्लेटफार्म किस तरह से किसी का खाता बंद देते हैं, किसी के विचारों को पहुंचने नहीं देते हैं,आप देख कर अनदेखा कर भी चुके हैं.
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धर्म के नाम पर बेलगाम होते लोग
- Saturday April 9, 2022
- रवीश कुमार
महंत बजरंग मुनि दास की सारी बातें ऐसी हैं कि हमें सुनाने की इच्छा तक नहीं हो रही. वैसे आल्ट न्यूज़ के मोहम्मद ज़ुबेर के ट्विटर हैंडल पर सुना तो पूरा सुना भी नहीं गया. यह व्यक्ति जिस भाषा का इस्तमाल कर रहा है उसे सिर्फ वही लोग सुन सकते हैं जो ऐसे लोगों को चुपचाप फैमिली और हाउसिंग सोसायटी के व्हाट्स एप ग्रुप में फार्वर्ड करते हैं और समर्थन करते हैं.
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Ravish Kumar Prime Time: जब ऑक्सीजन की कमी से लोग नहीं मरे तो क्या अस्पतालों, अखबारों ने झूठ बोला? सुप्रीम कोर्ट ने फिर कमेटी क्यों बनाई थी? रवीश ने पूछा
- Thursday July 22, 2021
- Edited by: प्रमोद कुमार प्रवीण
Ravish Kumar Prime Time : रवीश ने तल्ख लहजे में कहा, "जब मरने वालों की संख्या 47 लाख से 4 लाख की जा सकती है तो इसका मतलब है कि अब फेक न्यूज़ का भी काम ख़त्म हो गया है. लगातार प्रोपेगैंडा से लोगों की यह हालत हो गई है. वे अब दूसरी सूचना स्वीकार ही नहीं कर पाएंगे. शॉर्ट सर्किट हो जाएगा. दिमाग़ वही स्वीकार करता है जो व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी कहती है. इसलिए अब आपको किसी न्यूज़ की ज़रूरत ही नहीं है.
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निजीकरण का विरोध हमेशा फ़ैसले के बाद क्यों होता है, अपनी-अपनी कंपनी का क्यों होता है?
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- रवीश कुमार
विरोध-प्रदर्शन से जब कृषि क़ानून वापस नहीं हुए तो सरकारी कंपनियों में काम करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि उनके आंदोलन पर मीडिया और राजनीति हंसेगी. ठठाकर हंसेगी. जब दूसरी कंपनियों को ख़त्म किया जा रहा था तब इस वर्ग के व्हाट्स एप ग्रुप में कुछ और चल रहा था.
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