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'बेरोजगारी Unemployment' - 30 News Result(s)
  • 2216 पोस्ट और 25 हजार की भीड़.... मुंबई एयरपोर्ट पर धक्के खाते इन बेरोजगारों की आपबीती तो सुनिए

    2216 पोस्ट और 25 हजार की भीड़.... मुंबई एयरपोर्ट पर धक्के खाते इन बेरोजगारों की आपबीती तो सुनिए

    बीए की डिग्री रखने वाले उम्मीदवार ने कहा कि उसे नौकरी की सख्त जरूरत है. इंटरव्यू देने वालों में राजस्थान के अलवर से एमकॉम पास एक उम्मीदवार भी पहुंचा था. काफी पढ़े-लिखे होने के बाद भी उसने लोडर (Mumbai Airport Vacancy) की नौकरी के लिए आवेदन किया था.

  • Exclusive - बेरोजगारी पुरानी समस्या, मोदी सरकार ने जैसे कदम उठाए, उनका कोई सानी नहीं : राजनाथ सिंह

    Exclusive - बेरोजगारी पुरानी समस्या, मोदी सरकार ने जैसे कदम उठाए, उनका कोई सानी नहीं : राजनाथ सिंह

    Lok Sabha Elections 2024: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आज NDTV से कहा कि, देश में बेरोजगारी (Unemployment) कम करने के लिए मोदी सरकार ने जिस तरह के असरदार कदम उठाए हैं, वैसे पहले कभी नहीं उठाए गए. नरेंद्र मोदी (PM Modi) के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में बेरोजगारी कम हुई है. देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और इसे पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है. उन्होंने NDTV के सीनियर मैनेजिंग एडिटर निकुंज गर्ग से खास बातचीत में यह बात कही.

  • कांग्रेस ने 'महंगाई पर हल्ला बोल' रैली की तारीख बदली, कोरोना को लेकर टाला विरोध प्रदर्शन

    कांग्रेस ने 'महंगाई पर हल्ला बोल' रैली की तारीख बदली, कोरोना को लेकर टाला विरोध प्रदर्शन

    कांग्रेस (Congress) ने महंगाई (Inflation) और बेरोजगारी (Unemployment) के मुद्दों को लेकर आयोजित की जाने वाली अपनी रैली की तारीख आगे बढ़ा दी है.  कोविड-19 (COVID-19) के मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस की ओर से 28 अगस्त को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली 'महंगाई पर हल्ला बोल' रैली (Mehangai Par Halla Bol Rally) की तारीख आगे बढ़ा दी गई है. अब यह रैली 4 सितंबर को होगी.

  • बेरोजगारी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर बरसे मनमोहन सिंह, कहा- संकट 2016 में बगैर सोच-विचार...

    बेरोजगारी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर बरसे मनमोहन सिंह, कहा- संकट 2016 में बगैर सोच-विचार...

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि 2016 में मोदी सरकार (Modi Government) द्वारा बगैर सोच-विचार के लिए गए नोटबंदी (Demonetisation) के फैसले के चलते देश में बेरोजगारी (Unemployment in India) चरम पर है और अनौपचारिक क्षेत्र खस्ताहाल है.

  • राजस्थान: बेरोजगारी से परेशान 4 दोस्तों ने ट्रेन के आगे कूदकर की खुदकुशी

    राजस्थान: बेरोजगारी से परेशान 4 दोस्तों ने ट्रेन के आगे कूदकर की खुदकुशी

    राजस्थान (Rajasthan) के अलवर (Alwar) में बेरोजगारी (Unemployment) से परेशान चार युवा दोस्तों ने एक साथ ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली. चुनावी माहौल में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा व केंद्र की राजग सरकार को आड़े हाथ लिया है.

  • शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितने गंभीर हैं हम?  

    शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितने गंभीर हैं हम?  

    कई बार हमें लगता है कि किसी विश्वविद्यालय की समस्या इसलिए है क्योंकि वहां स्वायत्तता नहीं है इसलिए उसे स्वायत्तता दे दी जाए. जब भी उच्च शिक्षा की समस्याओं पर बात होती है, ऑटोनमी यानी स्वायत्तता को एंटी बायेटिक टैबलेट के रूप में पेश किया जाता है. लेकिन आप किसी भी विश्वविद्यालय को देखिए, चाहे वो प्राइवेट हो या पब्लिक यानी सरकारी क्या वहां सरकार या राजनीतिक प्रभाव से स्वायत्त होने की स्वतंत्रता है. सरकार ही क्यों हस्तक्षेप करती है, वो हस्तक्षेप करना बंद कर दे. कभी आपने सुना है कि वाइस चांसलर की नियुक्ति की प्रक्रिया बेहतर की जाएगी, उनका चयन राजनीतिक तौर पर नहीं होगा.

  • नौकरी के लिए इतना संघर्ष क्यों?

    नौकरी के लिए इतना संघर्ष क्यों?

    कई बार जवानों और किसानों की हालत देखकर लगता है कि हम सब ज़िद पर अड़े हैं कि इनकी तरफ देखना ही नहीं है. समस्या इतनी बड़ी है कि समाधान के नाम पर पुड़िया पेश कर दी जाती है जो मीडिया में हेडलाइन बनकर गायब हो जाती है. अनाज और आदमी दोनों छितराए हुए हैं. न तो दाम मिल रहा है न काम मिल रहा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए ये मुद्दे एक दूसरे की निंदा करने भर के लिए हैं मगर कोई भी ठोस प्रस्ताव जनता के बीच नहीं रखता है कि वाकई क्या करने वाला है, जो कर रहा है वो क्यों चूक जा रहा है. कई बार लगता है कि हमारे राजनेता, हमारे अर्थशास्त्री, सिस्टम में बैठे लोगों ने ज़िद कर ली है कि इन बुनियादी सवालों पर बात नहीं करना है, मीडिया को हर रात कोई न कोई थीम मिल जाता है, सब कुछ इसी थीम की तलाश के लिए हो रहा है. इसके बाद भी भारत के भीतर से तस्वीरें उथला कर सतह पर आ जा रही हैं.

  • प्राइम टाइम : चैनलों का भारत बनाम लोगों का भारत

    प्राइम टाइम : चैनलों का भारत बनाम लोगों का भारत

    मंत्री जी अपने फैन्स को चैलेंज दे रहे हैं कि पुशअप करें. फिट रहें. ज़रूरत यह भी है कि हम उन्हें चैलेंज करें ताकि सिस्टम फिट रहे. क्या आप दुनिया में एक भी ऐसा देश जानते हैं जहां परीक्षा पास करने, मेरिट में आने के बाद नौजवानों को दस महीने तक नियुक्ति पत्र नहीं मिलता हो.

  • नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    भारत में बेरोज़गारों की न तो संख्या किसी को मालूम है और न ही उनके जीवन के भीतर की कहानी. हमारे लिए बेरोज़गार हमेशा नाकाबिल नौजवान होता है जो मौके की तलाश में एक ही शहर और एक ही कमरे में कई साल तक पड़ा रहता है. कई बार तो लोग इसलिए भी बेकार कहते हैं कि वह सरकारी नौकरी की तलाश कर रहा है. सरकार चलाने के लिए नेता मारा मारी किए रहते हैं लेकिन जब कोई नौजवान उसी सरकार में अपने लिए संभावना की मांग करता है तो उसे फालतू समझा जाने लगता है. आप या हम हर शहर में बेरोज़गारों की रैली देखते हैं, नज़र घुमा लेते हैं. वे हफ्तों से धरने पर बैठे रहते हैं उनकी परवाह कोई नहीं करता है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    मुद्दों की मारामारी में आगरा से एक किसान का फोन आता है कि अक्तूबर के महीने में आलू के जो बीज बोए थे उनका उत्पादन काफी कम हुआ है. वे पहले से बर्बादी का सामना कर रहे थे मगर इस बार मार और पड़ गई है. टीवी का जो चरित्र हो गया है और दर्शकों की पसंद जिस तरह से बन गई है, उसके बीच आलू किसान की हालत पर आप चर्चा करेंगे तो किसकी दिलचस्पी होगी. क्या ऐसा हो सकता है कि अफरीदी और आलू को जोड़ कर चर्चा की जाए ताकि बहुत सारे प्रवक्ता ऑफिस के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो जाएं कि हम भी बोलेंगे हम भी बोलेंगे. इस समस्या का समाधान आखिर कब निकलेगा.

  • नौकरी देने से क्यों बचती है सरकार?

    नौकरी देने से क्यों बचती है सरकार?

    नौकरी सीरीज़ का 24वां अंक आप देख रहे हैं. झारखंड, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के छात्र लगातर हमें भांति-भांति की परीक्षाओं में होने वाली देरी और धांधली के बारे में लिख रहे हैं. हमने कई बार कहा है कि हमारे पास संसाधनों की कमी है. बहुत सी परीक्षाओं को हम कवर भी नहीं कर पाए हैं, लेकिन कोशिश है कि सबका ज़िक्र हो जाए और नौकरी सीरीज़ एक ऐसा डेटा बैंक बन जाए जिसे देखते ही आपको भारत में नौकरियां देने वाले आयोगों की रिपोर्ट मिल जाए.

  • नौजवानों के करियर से खेलते चयन आयोग

    नौजवानों के करियर से खेलते चयन आयोग

    हम नौकरी सीरीज़ के 23वें अंक पर आ गए हैं. यात्रा आगे भी जारी रहेगी. अगर सारे राज्यों से डेटा मंगाएं तो पता चलेगा कि लाख से ज़्यादा नौकरियां कोर्ट केस में फंसी हैं. ज़रूरी नहीं कि कोर्ट के कारण ही लंबित हों, कई बार जांच पूरी न होने के कारण भी ये नौकरियां फंसी हुई हैं.

  • नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?

    नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?

    नौकरी सीरीज़ का 22वां अंक आप देखने जा रहे हैं. सिस्टम के भीतर सड़न और मौसम नहीं बदलता है. सरकार बदलती है जो बादलों की तरह उड़ती हुई आती है और धूप छांव खेलती हुई चली जाती है. जिस सिस्टम के कमरों में बैठने के लिए नेता सारा ज़ोर लगा देते हैं वही अब पूछते हैं कि नौजवान सरकार की नौकरी के भरोसे क्यों बैठे हैं. सरकार यह नहीं कहती है कि हमारा भरोसा मत रखो, हम नौकरी नहीं देंगे, उल्टा भरोसा रखने वाले से ही पूछती है कि ये तो बताओ की तुम हम पर भरोसा क्यों करते हो. नौजवानों ने कभी पूछा नहीं कि तुम भी तो बताओ कि सरकार में जाने के लिए फिर क्यों दिन रात मरते हो. सवालों के दौर में इस राजनीति के पास कोई आइडिया नहीं बचा है. वह लगातार थीम की तलाश में है जिसपर बहस हो सके.

  • रेलवे में भर्ती : क्या रेलमंत्री पीयूष गोयल इन सवालों का जवाब देंगे?

    रेलवे में भर्ती : क्या रेलमंत्री पीयूष गोयल इन सवालों का जवाब देंगे?

    कुछ दिन पहले रेलवे में निकली भर्ती के नियमों में तीन बड़े बदलाव किये गए थे. कुछ पदों के लिए अधिकतम उम्र सीमा को को 30 से घटाकर 28 कर दिया गया था, जनरल कैंडिडेट के लिए परीक्षा शुल्‍क बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया था जबकि SC/ST कैंडिडेट के लिए 250 रखा गया था. तीसरा जो बदलाव था वह था कि कुछ पदों के लिए आईटीआई अनिवार्य कर दिया गया था.

  • सरकारी नौकरियां हैं कहां - भाग 13

    सरकारी नौकरियां हैं कहां - भाग 13

    रोज़गार के सवाल को पकौड़ा तलने का रूपक मिल जाए और रूपक गढ़ने वाले आर्कमिडिज़ का फार्मूला समझ कर उस पर कायम रहे तो रोज़गार को लेकर मारे मारे फिर रहे नौजवानों की चुनौतियां और बढ़ जाती हैं. वो अपने रोज़गार और उसे देने की सरकारी व्यवस्था को लेकर सवाल पूछ रहे हैं मगर पूछने से पहले उन्हें पकौड़े का फार्मूला थमा दिया जा रहा है.

'बेरोजगारी Unemployment' - 28 Video Result(s)
'बेरोजगारी Unemployment' - 30 News Result(s)
  • 2216 पोस्ट और 25 हजार की भीड़.... मुंबई एयरपोर्ट पर धक्के खाते इन बेरोजगारों की आपबीती तो सुनिए

    2216 पोस्ट और 25 हजार की भीड़.... मुंबई एयरपोर्ट पर धक्के खाते इन बेरोजगारों की आपबीती तो सुनिए

    बीए की डिग्री रखने वाले उम्मीदवार ने कहा कि उसे नौकरी की सख्त जरूरत है. इंटरव्यू देने वालों में राजस्थान के अलवर से एमकॉम पास एक उम्मीदवार भी पहुंचा था. काफी पढ़े-लिखे होने के बाद भी उसने लोडर (Mumbai Airport Vacancy) की नौकरी के लिए आवेदन किया था.

  • Exclusive - बेरोजगारी पुरानी समस्या, मोदी सरकार ने जैसे कदम उठाए, उनका कोई सानी नहीं : राजनाथ सिंह

    Exclusive - बेरोजगारी पुरानी समस्या, मोदी सरकार ने जैसे कदम उठाए, उनका कोई सानी नहीं : राजनाथ सिंह

    Lok Sabha Elections 2024: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आज NDTV से कहा कि, देश में बेरोजगारी (Unemployment) कम करने के लिए मोदी सरकार ने जिस तरह के असरदार कदम उठाए हैं, वैसे पहले कभी नहीं उठाए गए. नरेंद्र मोदी (PM Modi) के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में बेरोजगारी कम हुई है. देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और इसे पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है. उन्होंने NDTV के सीनियर मैनेजिंग एडिटर निकुंज गर्ग से खास बातचीत में यह बात कही.

  • कांग्रेस ने 'महंगाई पर हल्ला बोल' रैली की तारीख बदली, कोरोना को लेकर टाला विरोध प्रदर्शन

    कांग्रेस ने 'महंगाई पर हल्ला बोल' रैली की तारीख बदली, कोरोना को लेकर टाला विरोध प्रदर्शन

    कांग्रेस (Congress) ने महंगाई (Inflation) और बेरोजगारी (Unemployment) के मुद्दों को लेकर आयोजित की जाने वाली अपनी रैली की तारीख आगे बढ़ा दी है.  कोविड-19 (COVID-19) के मौजूदा हालात को देखते हुए कांग्रेस की ओर से 28 अगस्त को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली 'महंगाई पर हल्ला बोल' रैली (Mehangai Par Halla Bol Rally) की तारीख आगे बढ़ा दी गई है. अब यह रैली 4 सितंबर को होगी.

  • बेरोजगारी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर बरसे मनमोहन सिंह, कहा- संकट 2016 में बगैर सोच-विचार...

    बेरोजगारी के मामले को लेकर मोदी सरकार पर बरसे मनमोहन सिंह, कहा- संकट 2016 में बगैर सोच-विचार...

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि 2016 में मोदी सरकार (Modi Government) द्वारा बगैर सोच-विचार के लिए गए नोटबंदी (Demonetisation) के फैसले के चलते देश में बेरोजगारी (Unemployment in India) चरम पर है और अनौपचारिक क्षेत्र खस्ताहाल है.

  • राजस्थान: बेरोजगारी से परेशान 4 दोस्तों ने ट्रेन के आगे कूदकर की खुदकुशी

    राजस्थान: बेरोजगारी से परेशान 4 दोस्तों ने ट्रेन के आगे कूदकर की खुदकुशी

    राजस्थान (Rajasthan) के अलवर (Alwar) में बेरोजगारी (Unemployment) से परेशान चार युवा दोस्तों ने एक साथ ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली. चुनावी माहौल में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा व केंद्र की राजग सरकार को आड़े हाथ लिया है.

  • शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितने गंभीर हैं हम?  

    शिक्षा व्यवस्था को लेकर कितने गंभीर हैं हम?  

    कई बार हमें लगता है कि किसी विश्वविद्यालय की समस्या इसलिए है क्योंकि वहां स्वायत्तता नहीं है इसलिए उसे स्वायत्तता दे दी जाए. जब भी उच्च शिक्षा की समस्याओं पर बात होती है, ऑटोनमी यानी स्वायत्तता को एंटी बायेटिक टैबलेट के रूप में पेश किया जाता है. लेकिन आप किसी भी विश्वविद्यालय को देखिए, चाहे वो प्राइवेट हो या पब्लिक यानी सरकारी क्या वहां सरकार या राजनीतिक प्रभाव से स्वायत्त होने की स्वतंत्रता है. सरकार ही क्यों हस्तक्षेप करती है, वो हस्तक्षेप करना बंद कर दे. कभी आपने सुना है कि वाइस चांसलर की नियुक्ति की प्रक्रिया बेहतर की जाएगी, उनका चयन राजनीतिक तौर पर नहीं होगा.

  • नौकरी के लिए इतना संघर्ष क्यों?

    नौकरी के लिए इतना संघर्ष क्यों?

    कई बार जवानों और किसानों की हालत देखकर लगता है कि हम सब ज़िद पर अड़े हैं कि इनकी तरफ देखना ही नहीं है. समस्या इतनी बड़ी है कि समाधान के नाम पर पुड़िया पेश कर दी जाती है जो मीडिया में हेडलाइन बनकर गायब हो जाती है. अनाज और आदमी दोनों छितराए हुए हैं. न तो दाम मिल रहा है न काम मिल रहा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए ये मुद्दे एक दूसरे की निंदा करने भर के लिए हैं मगर कोई भी ठोस प्रस्ताव जनता के बीच नहीं रखता है कि वाकई क्या करने वाला है, जो कर रहा है वो क्यों चूक जा रहा है. कई बार लगता है कि हमारे राजनेता, हमारे अर्थशास्त्री, सिस्टम में बैठे लोगों ने ज़िद कर ली है कि इन बुनियादी सवालों पर बात नहीं करना है, मीडिया को हर रात कोई न कोई थीम मिल जाता है, सब कुछ इसी थीम की तलाश के लिए हो रहा है. इसके बाद भी भारत के भीतर से तस्वीरें उथला कर सतह पर आ जा रही हैं.

  • प्राइम टाइम : चैनलों का भारत बनाम लोगों का भारत

    प्राइम टाइम : चैनलों का भारत बनाम लोगों का भारत

    मंत्री जी अपने फैन्स को चैलेंज दे रहे हैं कि पुशअप करें. फिट रहें. ज़रूरत यह भी है कि हम उन्हें चैलेंज करें ताकि सिस्टम फिट रहे. क्या आप दुनिया में एक भी ऐसा देश जानते हैं जहां परीक्षा पास करने, मेरिट में आने के बाद नौजवानों को दस महीने तक नियुक्ति पत्र नहीं मिलता हो.

  • नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    नौकरी सीरीज का 32वां भाग : बेरोजगारों का दर्द आखिर कौन समझेगा ? 

    भारत में बेरोज़गारों की न तो संख्या किसी को मालूम है और न ही उनके जीवन के भीतर की कहानी. हमारे लिए बेरोज़गार हमेशा नाकाबिल नौजवान होता है जो मौके की तलाश में एक ही शहर और एक ही कमरे में कई साल तक पड़ा रहता है. कई बार तो लोग इसलिए भी बेकार कहते हैं कि वह सरकारी नौकरी की तलाश कर रहा है. सरकार चलाने के लिए नेता मारा मारी किए रहते हैं लेकिन जब कोई नौजवान उसी सरकार में अपने लिए संभावना की मांग करता है तो उसे फालतू समझा जाने लगता है. आप या हम हर शहर में बेरोज़गारों की रैली देखते हैं, नज़र घुमा लेते हैं. वे हफ्तों से धरने पर बैठे रहते हैं उनकी परवाह कोई नहीं करता है.

  • प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    प्राइम टाइम इंट्रो : देश का किसान और जवान है परेशान 

    मुद्दों की मारामारी में आगरा से एक किसान का फोन आता है कि अक्तूबर के महीने में आलू के जो बीज बोए थे उनका उत्पादन काफी कम हुआ है. वे पहले से बर्बादी का सामना कर रहे थे मगर इस बार मार और पड़ गई है. टीवी का जो चरित्र हो गया है और दर्शकों की पसंद जिस तरह से बन गई है, उसके बीच आलू किसान की हालत पर आप चर्चा करेंगे तो किसकी दिलचस्पी होगी. क्या ऐसा हो सकता है कि अफरीदी और आलू को जोड़ कर चर्चा की जाए ताकि बहुत सारे प्रवक्ता ऑफिस के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो जाएं कि हम भी बोलेंगे हम भी बोलेंगे. इस समस्या का समाधान आखिर कब निकलेगा.

  • नौकरी देने से क्यों बचती है सरकार?

    नौकरी देने से क्यों बचती है सरकार?

    नौकरी सीरीज़ का 24वां अंक आप देख रहे हैं. झारखंड, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के छात्र लगातर हमें भांति-भांति की परीक्षाओं में होने वाली देरी और धांधली के बारे में लिख रहे हैं. हमने कई बार कहा है कि हमारे पास संसाधनों की कमी है. बहुत सी परीक्षाओं को हम कवर भी नहीं कर पाए हैं, लेकिन कोशिश है कि सबका ज़िक्र हो जाए और नौकरी सीरीज़ एक ऐसा डेटा बैंक बन जाए जिसे देखते ही आपको भारत में नौकरियां देने वाले आयोगों की रिपोर्ट मिल जाए.

  • नौजवानों के करियर से खेलते चयन आयोग

    नौजवानों के करियर से खेलते चयन आयोग

    हम नौकरी सीरीज़ के 23वें अंक पर आ गए हैं. यात्रा आगे भी जारी रहेगी. अगर सारे राज्यों से डेटा मंगाएं तो पता चलेगा कि लाख से ज़्यादा नौकरियां कोर्ट केस में फंसी हैं. ज़रूरी नहीं कि कोर्ट के कारण ही लंबित हों, कई बार जांच पूरी न होने के कारण भी ये नौकरियां फंसी हुई हैं.

  • नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?

    नौकरी सीरीज का 22वां अंक : सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की सुस्ती टूटी?

    नौकरी सीरीज़ का 22वां अंक आप देखने जा रहे हैं. सिस्टम के भीतर सड़न और मौसम नहीं बदलता है. सरकार बदलती है जो बादलों की तरह उड़ती हुई आती है और धूप छांव खेलती हुई चली जाती है. जिस सिस्टम के कमरों में बैठने के लिए नेता सारा ज़ोर लगा देते हैं वही अब पूछते हैं कि नौजवान सरकार की नौकरी के भरोसे क्यों बैठे हैं. सरकार यह नहीं कहती है कि हमारा भरोसा मत रखो, हम नौकरी नहीं देंगे, उल्टा भरोसा रखने वाले से ही पूछती है कि ये तो बताओ की तुम हम पर भरोसा क्यों करते हो. नौजवानों ने कभी पूछा नहीं कि तुम भी तो बताओ कि सरकार में जाने के लिए फिर क्यों दिन रात मरते हो. सवालों के दौर में इस राजनीति के पास कोई आइडिया नहीं बचा है. वह लगातार थीम की तलाश में है जिसपर बहस हो सके.

  • रेलवे में भर्ती : क्या रेलमंत्री पीयूष गोयल इन सवालों का जवाब देंगे?

    रेलवे में भर्ती : क्या रेलमंत्री पीयूष गोयल इन सवालों का जवाब देंगे?

    कुछ दिन पहले रेलवे में निकली भर्ती के नियमों में तीन बड़े बदलाव किये गए थे. कुछ पदों के लिए अधिकतम उम्र सीमा को को 30 से घटाकर 28 कर दिया गया था, जनरल कैंडिडेट के लिए परीक्षा शुल्‍क बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया था जबकि SC/ST कैंडिडेट के लिए 250 रखा गया था. तीसरा जो बदलाव था वह था कि कुछ पदों के लिए आईटीआई अनिवार्य कर दिया गया था.

  • सरकारी नौकरियां हैं कहां - भाग 13

    सरकारी नौकरियां हैं कहां - भाग 13

    रोज़गार के सवाल को पकौड़ा तलने का रूपक मिल जाए और रूपक गढ़ने वाले आर्कमिडिज़ का फार्मूला समझ कर उस पर कायम रहे तो रोज़गार को लेकर मारे मारे फिर रहे नौजवानों की चुनौतियां और बढ़ जाती हैं. वो अपने रोज़गार और उसे देने की सरकारी व्यवस्था को लेकर सवाल पूछ रहे हैं मगर पूछने से पहले उन्हें पकौड़े का फार्मूला थमा दिया जा रहा है.

'बेरोजगारी Unemployment' - 28 Video Result(s)