विज्ञापन
This Article is From Mar 06, 2018

नौकरी देने से क्यों बचती है सरकार?

Ravish Kumar
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    मार्च 06, 2018 22:52 pm IST
    • Published On मार्च 06, 2018 22:52 pm IST
    • Last Updated On मार्च 06, 2018 22:52 pm IST
नौकरी सीरीज़ का 24वां अंक आप देख रहे हैं. झारखंड, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र के छात्र लगातर हमें भांति-भांति की परीक्षाओं में होने वाली देरी और धांधली के बारे में लिख रहे हैं. हमने कई बार कहा है कि हमारे पास संसाधनों की कमी है. बहुत सी परीक्षाओं को हम कवर भी नहीं कर पाए हैं, लेकिन कोशिश है कि सबका ज़िक्र हो जाए और नौकरी सीरीज़ एक ऐसा डेटा बैंक बन जाए जिसे देखते ही आपको भारत में नौकरियां देने वाले आयोगों की रिपोर्ट मिल जाए.

हमारी यह सीरीज़ ndtv.in यानी एनडीटीवी ख़बर की वेबसाइट पर मौजूद है. क्या आप जानते हैं कि रेलवे में कितने पद ख़ाली हैं. अलग-अलग सोर्स से आंकड़े आते रहते हैं मगर इस वक्त हमारे पास सरकारी आंकड़ा आ गया है. ख़ुद रेलवे ने लोकसभा में यह जानकारी दी है. 

पश्चिम बंगाल के मुशीर्दाबाद से सांसद सीपीएम सांसद मोहम्मद बदरुद्दोज़ा ख़ान और रायगंज से सीपीएम सांसद मोहम्मद सलीम ने 27 फरवरी को तारांकित प्रश्न पूछा था. इनके कई सवाल थे. पहला सवाल ये था कि पूरे देश में अनुसूचित जाति, जनजाति श्रेणी सहित रेलवे में सभी वर्ग समूहों में रिक्त पड़े पदों की ज़ोन-वार संख्या कितनी है? इस प्रकार से लंबे समय से रिक्त पड़े पदों का क्या कारण है? क्या रिक्तियों को भरने के लिए सरकार कोई विशेष भर्ती अभियान शुरू करने पर विचार कर रही है? यदि हां तो इसका ब्योरा क्या है और इसे कब तक शुरू किए जाने की संभावना है? नहीं तो इसके क्या कारण हैं? 

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लिखित जवाब दिया है. कायदे से यह जवाब सभी हिन्दी और अन्य अख़बारों के पहले पन्ने पर होना चाहिए था, जिसके लिए ग़रीब और बेरोज़गार भी अपनी मेहनत की कमाई से पैसे देते हैं और अख़बार खरीद कर पढ़ते हैं. क्या आपको पता है कि रेलवे के सभी ज़ोन में कुल मिलाकर 2 लाख 22 हज़ार 159 पद ख़ाली हैं. 1 अप्रैल 2017 तक का यह आंकड़ा है. दो लाख करोड़ के 2 जी घोटाले में कुछ साबित नहीं हुआ, मगर दो लाख पदों पर बहाली हो गई होती तो आज देश के कितने ही बेरोज़गारों के घर में खुशियां मन रही होती. 

रेल मंत्री ने लोकसभा में लिखकर दिया है कि रेलवे में ख़ाली पदों की संख्या 2 लाख 22 हज़ार 159 है. अब इसे आप ज़ोन वार देखिए. यह भी उसी जवाब में लोकसभा के पटल पर रखा गया है. हर ज़ोन के छात्र रेलवे की परीक्षा की तैयारी करते हैं इसलिए यह आंकड़ा उनके लिए भी महत्वपूर्ण है. 

उत्तर रेलवे मे 27, 537 पद ख़ाली हैं
मध्य रेलवे में 19,651 पद ख़ाली हैं
पूर्व मध्य में 17, 065 पद ख़ाली हैं
पश्चिम रेलवे में 16, 520 पद खाली हैं. 
उत्तर मध्य में 15,930 पद ख़ाली हैं
उत्तर पश्चिम रेलवे में 13, 532 पद ख़ाली हैं
दक्षिण पूर्व में 13, 212 पद ख़ाली हैं
पूर्वोत्तर रेलवे में 12, 670 पद ख़ाली हैं. 
पूर्वोत्तर सीमा रेलवे में 11,044 पद ख़ाली हैं. 
दक्षिण रेलवे में 10,827 पद ख़ाली हैं
पश्चिम मध्य रेलवे में 10,626 पद ख़ाली हैं. 
उत्तर रेलवे में 8, 95 पद ख़ाली हैं. 
पूर्व तट रेलवे में 6,878 पद ख़ाली हैं. 
दक्षिण पश्चिम रेलवे में 5, 211 पद ख़ाली हैं. 
मेट्रो में 898 पद ख़ाली हैं

1 अप्रैल 2017 तक खाली पड़े पदों की संख्या 2 लाख 21 हज़ार 159 है. इस साल रेल मंत्री का दावा है कि 90,000 के करीब भर्तियां निकली हैं. अगर सभी 2 लाख पर भर्तियां निकल गईं होती तो बेरोज़गार नौजवानों के लिए अवसरों का विस्तार हो जाता. मोहम्मद सलीम और मोहम्मद बदरुद्दोजा ख़ान का एक और सवाल था कि अनुसूचित जाति और जनजाति के कितने पद ख़ाली हैं तो रेल मंत्रालय ने बताया है कि 1 अप्रैल 2017 तक इन दो श्रेणियों में 41, 128 पद ख़ाली हैं

क्या आप जानते हैं कि रेलवे में भर्ती प्रक्रिया को पूरा होने में कितना वक्त लगता है? रेलवे के आप किसी भी ज़ोन से पता कीजिए. इसका औसत वो बताएंगे कम से कम 2 साल और अधिक से अधिक तीन साल. कई मामलों में 4 साल भी लग जाते हैं. एक परीक्षा की हेडलाइन देखकर खुश होने से पहले यह भी समझ लें कि इसे पूरा होने में 2 साल तीन साल लेगा. यानी भर्ती निकली तो है 2018 में, क्या पता पूरा होते होते 2019 बीत जाए, 2020 आ जाए. रेलवे की परीक्षा देने वाला छात्र ही बेहतर बता सकते हैं. 7 फरवरी को लोकसभा में सासंद पीवी मिदून रेड्डी ने भी तारांकित प्रश्न किया है. पीवी मिदुन रेड्डी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं, आंध्रप्रदेश के राजमपेट से. 

सासंद रेड्डी के इस सवाल में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि रेलवे स्टाफ की भारी कमी का सामना नहीं कर रहा है. आपने देखा. दो सांसदों के जवाब में रेल मंत्रालय कहता है कि 2 लाख से अधिक पद ख़ाली हैं. रेड्डी साहब के जवाब में रेल मंत्रालय कहता है कि रेलवे स्टाफ की भारी कमी का सामना नहीं कर रहा है. रेल मंत्रालय ने अपने लिखित जवाब में यह ज़रूर कहा है कि यह सही नहीं है कि 2014 के बाद से कोई भर्ती अभियान नहीं चला है. लेकिन यह आंकड़ा दिलचस्प है. पहले जवाब हु ब हू पढ़ लेते हैं.

2014 से रेलवे भर्ती बोर्डों और रेलवे भर्ती सेलों द्वारा क्रमश: ग्रुप- सी में 79,600 और ग्रुप-डी में 90,534 उम्मीदवार पैनलबद्ध किए गए हैं. जवाब में लिखा है 2014 से 2014, 2015, 2016, 2017 यानी चार साल में रेलवे की कितनी भर्तियां निकलीं ये हिसाब कीजिए और इस साल जो निकली है उसे सामने रखिए तो पता चलेगा कि इस दौरान रेलवे की परीक्षा की तैयारी में करोड़ों नौजवानों का इंतज़ार कितना लंबा रहा होगा.

2014 से लेकर 2017 तक ग्रुप-सी और ग्रुड की कुल भर्तियां निकलीं 1 लाख 70 हज़ाकर 134. इसे आप चार साल में बांट दें तो 2014 से हर साल निकलने वाली भर्तियों की संख्या होती 42, 533. 2018 में जो भर्तियां निकली हैं उनकी संख्या 90,000 बताई जा रही हैं. यानी इसी साल भर्ती पिछले चार साल के औसत की तुलना में डबल निकली है. काश रेल मंत्री इन भर्तियों को छह महीने में पूरा करके दिखा देते. भर्तियों को पूरा होने के समय के औसत को 6 महीने पर ला देते जो इस वक्त 2 से 3 साल है. बिल्कुल हो सकता है. उनके जैसा ऊर्जावान मंत्री चाहे तो क्या नहीं कर सकता है. वैसे अभी तक नहीं हुआ, प्रभु जी नहीं कर पाए तो इसका मतलब यह नहीं कि पीयूष गोयल से नहीं होगा. लाखों छात्रों की दुआएं मिलेंगे. जो भी है तीन सांसदों की बदौलत रेलवे में भर्ती को लेकर आपके पास कम से कम कुछ ठोस आंकड़ा तो आ गया. इसलिए इनका शुक्रिया तो बनता ही है. क्या वाकई रेलवे में स्टाफ की भारी कमी नहीं है, इस पर रेल यूनियन का क्या कहना है.

एसएससी की परीक्षा हमेशा विवादों में रहती है. इसके परीक्षा केंद्रों का भी हाल लेना ज़रूरी हो गया है कि परीक्षा होती कहां हैं. किस तरह के सेंटर होते हैं. इस बीच आपको पता ही है कि एसएससी सीजीएल 2015 और 16 की परीक्षा का नतीजा अगस्त से अक्तूबर 2017 के बीच आ चुका था. मगर जनवरी बीत जाने तक इनकी ज्वाइनिंग नहीं हुई थी. 15000 से अधिक छात्र परेशान घूम रहे थे. इसी को लेकर हमारी सीरीज़ शुरू हुई थी. हमने आपको बताया था कि 11,000 नौजवानों की ज्वाइनिंग की प्रक्रिया शुरू हुई है. मगर इसे लेकर भी छात्र मैसेज करने लगे हैं कि किसी का मेडिकल हो गया है मगर लेटर नहीं मिल रहा है, तो किसी की ज्वाइनिंग काडर मिलने के बाद अटकी हुई है. फिर भी मामला आगे बढ़ा है तो छात्र खुश हैं.

डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट में अकाउंटेंट पद के लिए चुने गए छात्रों की बेसब्री बढ़ती जा रही है कि उनका लेटर कब आएगा.  सोमवार 5 मार्च को जब एक्साइज़ और कस्टम विभाग में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर और टैक्स क्लर्क की ज्वाइनिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई. इनकी ही संख्या 1635 है. ये छात्र बहुत खुश हैं. पहले तो परीक्षा पास कीजिए तीन साल में, फिर पास कर ज्वाइनिंग के लिए इंतज़ार कीजिए सात आठ महीने. कितना टॉर्चर होता होगा. 

क्या आप जानते हैं कि एसएससी की परीक्षा किन सेंटरों पर होती है. कुछ तो बड़े सेंटर होते हैं जो आईटी कंपनियों की होती है, लेकिन बहुत सेंटर का हाल देखकर आप हैरान रह जाएंगे कि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ कैसे हो सकता है. हम सेंटर चुनने की प्रक्रिया में नहीं जाना चाहते मगर हम चाहते हैं कि आप इन सेंटरों का मुआयना करें. जायज़ा लें. देखें कि आपके बच्चों के साथ किस तरह का मज़ाक हो रहा है. पहले ये वीडियो देखिए, इलाहाबाद में 5 और 6 मार्च को छात्रों ने एसएससी के इंतज़ामों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया, रैली निकाली और धरना भी दिया है. इनकी रैली का नारा है पहले लड़े हैं गोरों से अब लड़ेंगे चोरों से. 

अब आते हैं परीक्षा सेंटर के सवाल पर. कई सेंटरों को लेकर छात्रों ने सवाल उठाएं हैं. बनारस में हमारे सहयोगी अजय सिंह ने खुद जाकर मौके पर कई सेंटरों को चेक किया है. कई सेंटर छोटे-छोटे घरों में किराए पर चलते वाले कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में चलते हैं. बैठने की जगह नहीं होती, इनका पता भी मुश्किल से मिलता है. इन सेंटरों में सेटिंग के ज़रिए नकल की गुज़ाइश बढ़ जाती है. पहले परीक्षा सब्जेक्टिव होती थी तो स्कूल कॉलेज में होती थी, जब से आब्जेक्टिव पैटर्न आया है तब से कंप्यूटर सेंटर में होने लगी है. इन सेंटरों को आउट सोर्स किया जाने लगा है.

वाराणसी के सिगरा इलाके के इस सेंटर को देखिए. ये हार्डवेयर इंस्टीट्यूट है यहां भी परीक्षा हो रही है. छोटे से जगह में चल रहे इस इंस्टिट्यूट में रोल नंबर गेट पर लगा है. अंदर परीक्षा चल रही है. छात्र कहते हैं कि जो भीतर गए हैं हम देख नहीं पा रहे हैं कि वो क्या गुल खिला रहे हैं. दरअसल सेंटर कम होने के कारण ये परीक्षाएं कई पाली में और कई दिन तक चलती है. इस वजह से भी धांधली हो जाती है और धांधली की अफवाह भी उड़ जाती है. अजय सिंह ने कोचिंग मैनेजर से बात की आप खुद सुन लें. 

हम तो एक शहर से बता रहे हैं. छात्रों ने कई शहरों से जो तस्वीरें भेजी हैं वो भयावह हैं. आप यकीन नहीं करेंगे इतनी बड़ी परीक्षा का यह हाल हो सकता है. जब हमारे पास संसाधन नहीं हैं तो फिर आन लाइन परीक्षा की मारामारी क्यों है. वाराणसी के सिगरा इलाके में ही यह दूसरा सेंटर है. सड़क पर जनरेटर रखा है और उसी पर रोल नंबर और सिटिंग अरेंजमेंट की सूची चिपका दी गई है. इस बिल्डिंग में कंप्यूटर इंस्टिट्यूट के अलावा हॉस्टल भी है और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां भी चलती हैं. यही एसएससी का सेंटर है. यह बिल्डिंग भाजपा के विधायक की है. गेट पर का नाम भी टंगा है. रवी त्रिपाठी जी भदोही से भाजपा के विधायक हैं. हम नहीं कहते कि उनकी कोई भूमिका है मगर परीक्षा केंद्र के बाहर विधायक का नाम टंगा देखकर अफवाहों को बल मिलने लगता है. उनकी ब्लिडिंग में अगर किराये पर चलने वाले कंप्यूटर सेंटर में एसएससी की परीक्षा होती तो छात्र स्वाभाविक रूप से संदेह कर सकते हैं. एसएससी को ऐसी जगहों पर सेंटर देने से पहले ठीक से जांच करनी चाहिए.

उत्तर प्रदेश में 12, 460 शिक्षकों की भर्ती का मामला अजीब मोड़ से गुज़रता रहता है. हमने इन शिक्षकों का मामला कई बार उठाया मगर उससे कई सौ गुना बार इन छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया है. सिर्फ धरना प्रदर्शन ही नहीं बल्कि इन शिक्षकों ने अपनी लड़ाई अदालत में भी लड़ी. वहां से जीत कर भी ये हार जाते हैं. 3 नवंबर 2017 को हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने यूपी सरकार से कहा था कि 2 महीने में इन शिक्षकों की भर्ती हो जानी चाहिए. 3 जनवरी 2018 को दो महीने पूरे हो गए मगर 12,460 शिक्षक बहाली का इंतज़ार करते रह गए. फिर यह मामला डिविज़न बेंच में सुना गया. वहां से भी ये 12, 460 शिक्षक जीत गए. इस बार हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से कहा कि 4 हफ्ते के भीतर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कीजिए. 6 मार्च को चार हफ्ते पूरे हो गए. छात्रों को कुछ पता नहीं है. शायद सरकार को पता हो जो किसी को पता नहीं है.  

2016 में 12, 460 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन निकला था. मार्च 2017 तक इसकी काउंसलिंग चलती रही. 18 मार्च 2017 तक सारे ज़िले के कट ऑफ गए और मेरिट लिस्ट बन गई थी. लेकिन 23 मार्च को योगी सरकार ने इन भर्तियों पर रोक लगा दी. इसके बाद से ये नौजवान हर मौके पर प्रदर्शन कर रहे हैं. ये तस्वीरें उन्हीं के प्रदर्शनों की है, उन्हीं की भेजी हुई है. यहां तक कि 16 जुलाई 2017 से तीन सितंबर 2017 तक ढाई महीने लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना भी दिया. 12, 460 शिक्षक कोर्ट से जीत जाते हैं मगर सरकार से नहीं जीत पाते हैं. हर तरह के मंत्री से मिल आते हैं, सांसदों से मिल आते हैं मगर इनकी भर्ती की प्रक्रिया शुरू नहीं होती. कोर्ट का आदेश भी लागू नहीं हो पोता है. 

आप देख ही रहे हैं कि नौकरियों की क्या हालत है. हम 24 वें एपिसोड तक आ चुके हैं. पता नहीं कितने एपिसोड तक चलते चले जाएंगे, लेकिन हालात में कोई खास बदलाव नहीं है. 12, 460 शिक्षक कोर्ट से दो दो बार मुकदमा जीत जाते हैं, मगर उन आदेशों के बाद भी नौकरी नहीं मिलती है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
UnemploymentSeries, Unemployment, Government Job, Prime Time
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com